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15 साल से तबादले का इंतजार:नौकरी के कारण ससुराल नहीं जा पाई बेटियां, साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षक परेशान

पटना5 महीने पहले
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  • सेवा शर्त नियमावली को लागू करने के लिए कमेटी बनी पर रिपोर्ट अब तक नहीं आई
  • संघ का आरोप- शिक्षकों का शोषण किया जा रहा, सरकार उनको बंधुआ मजदूर समझ रही

सफलता कुमारी भागलपुर के सकरामा मध्य विद्यालय में नियोजित शिक्षिका हैं। इन्हें नौकरी शादी के बाद मिली। पति वरुण देव कटिहार के प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय, अमदाबाद में पहले से शिक्षक हैं। भागलपुर से कटिहार की दूरी लगभग 90 किलोमीटर है। ऐसे में सफलता कुमारी अपना तबादला कटिहार होने की बाट जोह रही हैं। इसी तरह शिक्षिका सोनी कुमारी का मायके अररिया है। शादी से पहले इनकी नौकरी लगी। उस समय 2007 से अब तक ट्रांसफर नहीं होने की वजह से परेशानी झेल रही हैं। इनकी ससुराल कटिहार है। कटिहार से अररिया की दूरी 75 किमी है। स्कूल में टीचर की नौकरी करने के लिए इन्हें ज्यादातर समय मायके में ही रहना पड़ रहा है। प्रीति का मायका मुंगेर है और ससुराल बांका। टीचर की नौकरी कर रही हैं अररिया में। इनकी दिक्कत यह है कि यह न ससुराल में और न मायके में ठीक से रह पा रही हैं।

पूरा परिवार अस्त-व्यस्त

सफलता, सोनी और प्रीति ऐसी अकेली शिक्षिकाएं नहीं हैं। बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों का तबादला नहीं हो रहा, जबकि इसी साल सरकार ने इनके लिए नई सेवा शर्त नियमावली भी बनाई है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और दिव्यांगों को हो रही है। सरकार ने घर के पास वाले इलाके के स्कूलों में पोस्टिंग तो कर दी लेकिन इस बीच कई महिलाओं की शादी हो गई और वे अपने मायके में ही रहकर नौकरी करने को मजबूर हैं। वे चाहती हैं कि उनका ट्रांसफर ससुराल के पास वाले स्कूल में कर दिया जाए। लेकिन यह नहीं हो पा रहा है। ऐसी महिलाओं की संख्या बड़ी है। बच्चों को भी साथ रखना पड़ रहा है। यानी पूरा परिवार अस्त-व्यस्त है। इसमें ऐसे शिक्षक भी हैं जो पिछले 15 साल से नौकरी कर रहे हैं। महिला शिक्षकों की बड़ी संख्या प्राथमिक स्कूलों में है और वे सुदूर इलाकों तक आ-जा रही हैं।

दिव्यांग शिक्षकों को परिवार के सहारे की जरूरत

इसी तरह की परेशानी दिव्यांगों के साथ भी है। कई दिव्यांगों को परिवार के सहारे की सख्त जरूरत पड़ती है। लेकिन उनका भी ट्रांसफर नहीं हो रहा है। साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों में महिलाओं और दिव्यांगों की बात करें तो इनकी संख्या लगभग डेढ़ लाख हैं। नई शिक्षक शर्त नियमावली के अनुसार महिलाएं और दिव्यांगों को अपने सेवाकाल में एक बार अंतर जिला और अंतर नियोजन इकाई ट्रांसफर किया जा सकेगा। लेकिन इनके ट्रांसफर की प्रक्रिया विभाग कैसे निर्धारित करता है यह अब तक तय नहीं किया गया है। सरकार इसको लेकर ड्राफ्ट तैयार कर रही है। इसकी रिपोर्ट अब तक अटकी हुई है।

शिक्षक संघ का विरोध

नियमावली में पुरुषों को म्यूचुअल ट्रांसफर देने की बात कही गई है। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ का विरोध ट्रांसफर के इस नियम के खिलाफ है। शिक्षकों ने ऐसे कई मुद्दों को लेकर हड़ताल भी की थी जिसे सरकार ने इस वायदे के साथ तुड़वाया कि सरकार वार्ता करेगी लेकिन अब तक वार्ता नहीं की गई है।

सरकार पर आरोप

बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता प्रेमचंद कहते हैं कि सरकार ने कोरोनाकाल का फायदा उठाया है। शिक्षक संघों के साथ वार्ता नहीं की गई। शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है। म्यूचुअल ट्रांसफर से शिक्षक कितनी बड़ी परेशानी में पड़ेंगे इसकी कल्पना डराने वाली है। महिला, दिव्यांग के साथ अन्य पर भी ध्यान देना चाहिए। सरकार शिक्षकों को बंधुआ मजदूर समझ रही है। वहीं, माध्यमिक शिक्षा के डिप्टी डायरेक्टर अमित कुमार बताते हैं कि यह बताना कठिन है कि कब तक नियोजित शिक्षकों का ट्रांसफर किया जा सकेगा। नियमावली के अनुसार डिटेल इंस्ट्रक्शन के लिए कमेटी बनी है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद विभाग आगे का काम करेगा। समय बताना कठिन है, लेकिन जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा।

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