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AIIMS में 4 बच्चे भर्ती, एक की हालत गंभीर:पोस्ट कोविड का मामला, इलाज में जुटी डॉक्टरों की टीम, MSIC से पीड़ित बच्चों की बढ़ रही है संख्या

पटनाएक महीने पहले
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पटना AIIMS में 4 बच्चे भर्ती हुए हैं जो MSIC (मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रेन) से पीड़ित हैं। यह पोस्ट कोविड यानी कोरोना होने के बाद अटैक होता है। चारों में एक की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम इलाज में जुटी है। लेकिन बच्चों की सेहत में अभी कोई विशेष सुधार नहीं है। AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी बीमारी में इलाज थोड़ा भी लेट हो तो जानलेवा हो जाता है।

एक-एक कर भर्ती हुए बच्चे

पटना AIIMS में भी 4 बच्चों को लेकर संस्थान का कहना है कि वह एक एक कर अस्पताल आए हैं। चारों में एक की हालत काफी खराब है, इलाज से सुधार तेजी से नहीं हो रहा है। हाल ही में पटना के गोसाइं टोला की एक 11 साल की बच्ची की भी मौत इसी बीमारी से पटना AIIMS में हुई है। इस बीमारी को लेकर पटना AIIMS का शिशु रोग विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को विशेष निगरानी में रखा गया है।

खतरनाक है बच्चों में MSIC

मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रेन (MSIC ) काफी खतरनाक बीमारी है। इसमें एक एक कर बच्चों के शरीर का ऑर्गन फेल होने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह पोस्ट कोविड के बाद देखा जाता है। कोरोना से ठीक होने के बाद बच्चों में इसका संक्रमण होता है। इसमें खून के थक्के बनने शुरु हो जाते हैं जो बाद में चलकर हार्ट और किडनी के साथ लीवर को डैमेज कर देते हैं।

कोरोना होने के बाद में यह मामले आ रहे हैं जिसमें बच्चों की हालत बिगड़ रही है। हालांकि घर वालों को पता भी नहीं चल रहा है और बच्चों को हल्की खांसी बुखार के बाद फिर हालत खराब हो जाती है। संक्रमण से उबरने के बाद फिर तेज बुखार होता है और इसके बाद वह काफी गंभीर हो जाते हैं। ऐसे माना जा रहा है कि बच्चों में कोरोना का लक्षण विशेष नहीं मिला लेकिन उसके 15 से एक माह बाद हालत गंभीर हो गई।

पटना AIIMS में अलर्ट

MIS - C (मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रेन) को लेकर पटना AIIMS में अलर्ट है। कोविड के नोडल डॉ संजीव का कहना है कि AIIMS में इस बीमारी से पीड़त 4 बच्चे भर्ती हैं। इसमें एक की हालत गंभीर है।

अलर्ट मोड पर व्यवस्था है और बच्चों का इलाज किया जा रहा है। ऐसे केस बढ़ रहे हैं। इसमें मल्टी ऑर्गन फेल होने का खतरा होता है। इस कारण से इन बच्चों को बेहतर ट्रीटमेंट मिले इसपर ध्यान दिया जाता है। डॉ संजीव का कहना है कि बच्चों को लेकर विशेष तैयारी है और इस बीमारी के मामले आ रहे हैं, इस कारण से डॉक्टर भी अलर्ट हैं।

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