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एनसीआरबी का आंकड़ा:बिहार में बुजुर्गों पर प्रताड़ना में 41 फीसदी की कमी, पटना में ताे एक भी मामला नहीं

बिहार14 दिन पहले
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  • गुजरात टाॅप पर, बिहार 22वें नंबर पर, 2019 में बिहार में बुजुर्ग महिलाओं से रेप की एक भी वारदात नहीं

(माे. सिकन्दर) बुजुर्गों को प्रताड़ित करने और उनके खिलाफ हिंसा के मामले में बिहार में कमी आई है। एनसीआरबी द्वारा साल 2019 के लिए जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार 2018 में बुजुर्गों के खिलाफ 424 आपराधिक घटनाएं दर्ज की गईं जबकि 2019 में यह घटकर 251 हो गईं।

यानी 2018 के मुकाबले 2019 में बिहार में बुजुर्गाें पर प्रताड़ना के मामले में 40.80 फीसदी की कमी आई। पटना की बात करें ताे 2019 में एक भी बुजुर्ग काे प्रताड़ित करने या उनके खिलाफ काेई हिंसात्मक वारदात नहीं हुई। बुजुर्गों के खिलाफ सबसे अधिक हिंसा का मामला गुजरात में आया है।

गुजरात में साल 2019 में गुजरात में 4088 मामले दर्ज हुए और गुजरात का क्राइम रेट 85.4 प्रतिशत है। वहीं 73.2 फीसदी क्राइम रेट के साथ मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर जबकि 67.3 फीसदी क्राइम रेट के साथ छत्तीसगढ़ तीसरे नंबर पर है। 29 राज्यों में बुजुर्गाें पर क्राइम रेट बिहार 22 वें नंबर पर है।

बिहार में 34 बुजुर्ग की हत्या, उत्तर प्रदेश में 209: सिर्फ हत्या के आंकड़ों को देखें तो बिहार में साल 2019 में 34 बुजुर्गों की हत्या हुईं। वहीं सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में 209 बुजुर्गों की हत्या हुई। तमिलनाडु में 177, महाराष्ट्र में 162 और मध्य प्रदेश में 114 बुजुर्गों की हत्या हुई।
2019 में बिहार में बुजुर्ग महिलाओं से रेप की एक भी वारदात नहीं
2019 में बिहार में बुजुर्ग महिलाओं से रेप की एक भी वारदात नहीं नहीं हुई। केरल में ऐसे 15 मामले आए। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आठ और उत्तर प्रदेश में तीन घटनाएं हुईं। बुजुर्गों से विभिन्न प्रकार के ठगी के मामले सबसे अधिक महाराष्ट्र में 49 आए। बिहार और गुजरात में 12, तेलंगाना में 20 और यूपी में छह ऐसे मामले दर्ज हुए।
महानगराें में मुंबई टाॅप पर, पटना में लगातार दूसरे साल एक भी नहीं
देश के 19 महानगरों के आंकड़ों को देखें तो पटना में बुजुर्गों के खिलाफ हिंसा का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। जबकि मुंबई में सबसे अधिक 1231 मामले आए जिसका क्राइम रेट 25.1 रहा। वहीं दिल्ली में 1026 मामले आए और क्राइम रेट 22.1 रहा। वहीं अहमदाबाद का क्राइम रेट 16.2 प्रतिशत रहा। साल 2018 में भी पटना में बुजुर्गों के खिलाफ हिंसा का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था।

जबकि साल 2017 में 7 मामले दर्ज हुए थे। बुजुर्गों की हत्या के आंकड़ों को देखें तो पटना में साल 2019 में एक भी बुजुर्ग की हत्या नहीं हुई। हत्या के मामले सबसे अधिक दिल्ली में आए। दिल्ली में साल 2019 में 13 बुजुर्ग की हत्या हुई जबकि चेन्नई में 10 और मुंबई में आठ बुजुर्गाें की हत्या हुई।

बच्चों के प्रति अपराध बिहार में 27 और पटना में 150 प्रतिशत बढ़ा

बिहार में बच्चों और नाबालिगों के प्रति हो रहे आपराधिक घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। आईपीसी और स्पेशल लोकल लॉ के तहत दर्ज मामलों में साल दर साल इजाफा ही देखा गया है। बिहार में साल 2017 में 5386, 2018 में 7340 और साल 2019 में 9320 मामले दर्ज हुए। साल 2018 और 2019 के आंकड़ों की तुलना करें तो बिहार में बच्चों के प्रति होने वाले अपराध में 26.97 फीसदी का इजाफा हुआ है। राजधानी पटना में बच्चों और नाबालिगों के प्रति अपराध में 150 फीसदी का इजाफा हुआ है। देश भर में साल 2018 में 141764 मामले सामने आए वहीं साल 2019 में यह मामला बढ़कर 148185 हो गया। बच्चों और नाबालिगों को लेकर हो रहे अपराध में देश स्तर पर 4.5 फीसदी का इजाफा हुआ है। हालांकि बच्चों को लेकर हो रहे अपराध में 29 राज्यों की सूची में बिहार 24वें नंबर पर है। बिहार का क्राइम रेट 20.8 है, जबकि सबसे अधिक सिक्किम का क्राइम रेट 80.3 है। दूसरे नंबर पर 63.3 क्राइम रेट के साथ मध्य प्रदेश है जहां 19028 मामले आए।

बिहार में 112 बच्चों की हत्या और 3 की रेप के बाद हत्या हुई
देश भर के राज्यों को देखें तो बच्चों की हत्या के मामले में बिहार 19वें स्थान पर है। बिहार में साल 2019 में 112 बच्चों की हत्या हुईं। वहीं रेप के बाद हत्या के तीन मामले आए। सबसे अधिक 291 बच्चों की हत्या उत्तर प्रदेश में हुई। वहीं रेप के बाद हत्या के मामले भी सबसे अधिक 30 मामले उत्तर प्रदेश में ही आए। मध्य प्रदेश में 158, महाराष्ट्र में 169 बच्चों की हत्या हुई।
शादी की नीयत से 4483 बच्चियों का अपहरण, फिरौती के मामले 18
बिहार में साल 2019 में 6334 बच्चों का अपहरण किया गया। सबसे अधिक 4483 बच्चियों का अपहरण शादी की नियत से किया गया। वहीं फिरौती के लिए 18 बच्चों का अपहरण किया गया। वहीं गुमशूदगी के 1303 मामले आए जिसे बाद में किडनैपिंग केस में बदल दिया गया। बाल मजदूरी के मामलों को देखें तो साल 2019 में बिहार में 12 मामले आए जिसमें 48 बच्चे पीड़ित थे।

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