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गया का चुनावी मुकाबला:चार विधानसभा सीटों पर टिकी सबकी निगाहें, पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री तक हैं मैदान-ए-जंग में

गया6 महीने पहले
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गया में इमामगंज से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी तो गया शहर से कृषि मंत्री प्रेम कुमार मैदान में हैं। - Dainik Bhaskar
गया में इमामगंज से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी तो गया शहर से कृषि मंत्री प्रेम कुमार मैदान में हैं।
  • गया में अतरी, इमामगंज, बेलागंज और गया शहर हैं हॉट सीट
  • इमामगंज से पूर्व सीएम मांझी तो गया शहर से कृषि मंत्री प्रेम कुमार हैं मुकाबले में

गया की चार विधानसभा सीटों पर सबकी निगाहें हैं। इमामगंज, बेलागंज, गया शहर और अतरी हॉट सीट हैं, इसलिए यहां मुकाबला भी टक्कर का होनेवाला है। इन सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री तक उम्मीदवार हैं। एनडीए और महागठबंधन ने अपने-अपने सबसे भरोसेमंद चेहरों को उतारा है। अब देखना यह है कि जनता का मिजाज इस चुनाव में कैसा रहेगा।

इमामगंज में मांझी और चौधरी आमने-सामने

इमामगंज जिले की सबसे हॉट सीट है। यहां एनडीए से पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और महागठबंधन से बिहार विधानसभा के पूर्व स्पीकर और राजद प्रत्याशी उदय नारायण चौधरी आमने-सामने हैं। इनका मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि पिछली बार 2015 में मौजूदा विधायक मांझी ने चौधरी को 29,408 वोटों से हराया था। इस सीट पर लोजपा से शोभा सिन्हा भी प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं क्योंकि उनके ससुर राम स्वरूप पासवान 1995 में समता पार्टी से विधायक रह चुके हैं।

यहां अब तक हुए कुल 15 विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक चार बार कांग्रेस, तीन बार जदयू, दो बार समता पार्टी और एक-एक बार हम (सेक्युलर), जनता दल, जनता पार्टी, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, स्वतंत्र पार्टी और निर्दलीय को जीत मिली है। कांग्रेस को यहां 1985 से जीत नहीं मिल पाई है। सबसे अहम बात ये है कि भाजपा और राजद को आजतक यहां जीत नहीं मिली है।

गया शहर में कृषि मंत्री प्रेम कुमार हैं फेवरेट

गया शहर सीट पर भाजपा प्रत्याशी कृषि मंत्री प्रेम कुमार व कांग्रेस प्रत्याशी अखौरी ओंकार नाथ मुकाबले में हैं। इस सीट से लगातार सात बार विधायक रहे प्रेम कुमार की दावेदारी मजबूत है लेकिन नगर निगम के डिप्टी मेयर ओंकार नाथ भी जोर-शोर से जुटे हैं। वह इससे पहले भी दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। एक बार कांग्रेस से तो दूसरी बार वह निर्दलीय मैदान में थे। प्रेम कुमार भाजपा के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। वह नगर विकास सह आवास, पीएचइडी, कृषि सहित कई अन्य मंत्रालयों में भी रह चुके हैं। इधर अखौरी ओंकार नाथ भी नगर निगम के कई बार डिप्टी मेयर रह चुके हैं। इसलिए टक्कर कांटे की होने की संभावना है लेकिन अनुमानों के लिहाज से भाजपा ही फेवरेट है।

बेलागंज में सात विधानसभा चुनावों से एक ही कहानी

पिछले सात विधानसभा चुनावों से बेलागंज सीट की एक ही कहानी है - पार्टी हो कोई भी, लेकिन चेहरा वही। यहां राजद के सुरेन्द्र प्रसाद यादव का दबदबा कायम है। उनका मुकाबला टिकारी के मौजूदा विधायक और जदयू प्रत्याशी अभय कुशवाहा से है। सुरेन्द्र प्रसाद यादव 1990 से 2015 तक लगातार जीतते आए हैं। दो बार जनता दल और पांच बार राजद से उन्होंने जीत हासिल की है। पिछली बार 'हम' के शरीम अली को 30,341 वोट से हराया था। लोजपा ने यहां से रामाश्रय शर्मा उर्फ पुण्य देव शर्मा पर बाजी लगाई है।

इस सीट पर अभी तक हुए कुल 14 विधानसभा चुनावों में पांच बार राजद, तीन बार कांग्रेस, दो बार जदयू और एक-एक बार अगपा, कांग्रेस (यू), कांग्रेस (ओ) और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी को जीत मिली है। 1985 के बाद से कांग्रेस यहां भी जीत नहीं पाई है जबकि भाजपा या जदयू का खाता नहीं खुला है।

अतरी में राजेन्द्र यादव का गढ़ कैसे टूटेगा

महागठबंधन ने इस सीट पर राजद से अजय देव यादव को उतारा है। एनडीए से जदयू की प्रत्याशी मनोरमा देवी उनसे दो-दो हाथ करेंगी। अजय यादव इस सीट से तीन बार विधायक रहे राजेन्द्र यादव और मौजूदा विधायक कुंती देवी के बेटे हैं। सीट पर राजेन्द्र यादव परिवार का दबदबा रहा है। राजेन्द्र यादव खुद लगातार तीन बार 1995, 2000, 2005 में जीते। इसके बाद 2015 में उनकी पत्नी कुंती देवी ने लोजपा के अरविंद कुमार सिंह को 13,817 वोट से हराया था। इस सीट पर अभी तक हुए कुल 16 विधानसभा चुनावों में चार-चार बार कांग्रेस और राजद, दो बार निर्दलीय, एक-एक बार जदयू, जनता दल, कांग्रेस (यू), जनता पार्टी, कांग्रेस (ओ) और जनसंघ को जीत मिली।

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