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अनाथ बच्चों की देखरेख सरकार करे:विधानसभा की वर्चुअल बैठक में भाकपा (माले) की मांग- 3 महीने के अंदर प्रदेश में सभी को वैक्सीन दी जाए

पटना5 महीने पहले
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भाकपा माले विधायक महबुब आलम।(फाइल इमेज) - Dainik Bhaskar
भाकपा माले विधायक महबुब आलम।(फाइल इमेज)
  • इस दौर में मारे गए सभी लोगों की मौत का संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिजनों को तत्काल 4 लाख मुआवजा दे सरकार
  • नौकरशाही के हवाले करने की बजाय 6 माह के लिए पंचायतों के कार्यकाल का विस्तार हो

बिहार विधानसभा की गुरुवार को हुई वर्चुअल बैठक में भाकपा माले विधायक दल ने 3 महीने के भीतर सभी लोगों को कोविड वैक्सीन देने की मांग की। भाकपा-माले विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि बिना वैक्सीनेशन के हम इस महामारी का मुकाबला नहीं कर सकते। इसलिए, अब सरकार को कोई देरी नहीं करनी चाहिए। लेकिन, वैक्सीनेशन के मामले में हमारा राज्य पूरे देश में सबसे निचले पायदान पर है। पंचायत स्तर पर टीका केंद्रों का विस्तार किया जाए और जैसे भी संभव हो पर्याप्त मात्रा में टीका उपलब्ध कराया जाए। साथ ही परिजनों की मौत के बाद बच्चों की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।

इन 12 विधायकों ने हिस्सा लिया
भाकपा- माले के सभी 12 विधायकों ने वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में दरौली विधायक सत्यदेव राम, तरारी विधायक सुदामा प्रसाद, पालीगंज विधायक संदीप सौरव, अरवल विधायक महानंद सिंह, अगिआंव विधायक मनोज मंजिल, घोसी विधायक रामबली सिंह यादव, काराकाट विधायक अरुण सिंह, सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता, डुमरांव विधायक अजीत कुशवाहा, फुलवारी विधायक गोपाल रविदास और जीरादेइ के विधायक अमरजीत कुशवाहा ने भाग लिया।

मुफ्त टीका का वादा कहां ?
माले विधायक दल ने यह भी याद दिलाया कि विगत विधानसभा चुनाव के समय प्रधानमंत्री ने मुफ्त टीका का वादा किया था। लेकिन अब वे इससे मुकर रहे हैं और टीकाकरण का पूरा बोझ राज्य पर डाल दिया है। इसलिए टीकाकरण के लिए केन्द्र सरकार के बजट में आवंटित 35000 करोड़ की राशि में अपने हिस्से के लिए भी केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जाए।

अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेवारी भी सरकार ले

माले विधायकों ने कहा कि इस दौरान मारे गए सभी लोगों को कोरोना के कारण हुई मौत मानकर सरकार तमाम लोगों को 4 लाख की तयशुदा अनुग्रह राशि प्रदान करे और साथ ही अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेवारी ले।

पंचायतों के अधिकार को 6 माह बढ़ाया जाए
उन्होंने पंचायतों के अधिकार को 6 माह बढ़ाने की भी मांग की। कहा कि पंचायतों के विभिन्न जनप्रतिनिधि जनता से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं, इसलिए हमारी मांग है कि कोविड से राहत बचाव अभियान में उनके अनुभवों का इस्तेमाल किया जाए। लेकिन हमें जानकारी मिल रही है कि सरकार पंचायतों के अधिकार नौकरशाही के हवाले करने पर तुली हुई है। यह फैसला पूरी तरह से गलत व अलोकतांत्रिक है। पंचायतों चुनाव को स्थगित करके 6 माह तक के लिए उसके कार्यकाल में बढ़ोतरी करना ही अभी सबसे सटीक कदम होगा।

विधायक-पार्षदों की सलाह सर्वोपरि हो

माले विधायकों ने विधायकों / पार्षदों से बिना किसी बातचीत 2021-22 के क्षेत्र विकास योजना मद से 2-2 करोड़ की राशि अधिग्रहित कर लेने के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कम से कम 50 प्रतिशत हिस्से को संबंधित जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में खर्च करने की मांग की। साथ ही कहा कि और राशि आवंटन की पूरी प्रक्रिया में विधायकों/पार्षदों की सहभागिता और उनकी सलाह को सर्वोपरि रखा जाए।

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