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पटना के 3 लाख मुसहर वैक्सीन नहीं लगवा रहे:मुसहर कहते हैं- टीका लगवाया तो मर जाएंगे; पद्मश्री सुधा वर्गीज बोलीं- कोविड से किसी मुसहर की मौत नहीं हुई

पटना4 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
पटना में भास्कर ने मुसहर जाति की महिलाओं और पुरुषों से आशियाना मोड़ स्थित उनके घर पर जाकर बात की।

मुसहरों की स्थिति दलितों में सबसे कमजोर है। गरीबी और लाचारी ऐसी कि ये अक्सर चूहा, घोंघा, सितुआ खाकर जिंदगी काटते हैं। पटना में भास्कर ने आशियाना मोड़ स्थित उनके घर पर जाकर बात की। कोरोना में इस बार जहां पटना में बड़ी संख्या में लोग कोविड के शिकार हुए और मौतें भी हुईं। वहीं, दूसरी तरफ मुसहरों में मौत की सूचना नहीं है। लेकिन चिंता की बात यह है कि वे वैक्सीन लेने को हरगिज तैयार नहीं।

मुसहर कहते हैं कि वैक्सीन लेने पर उन्हें बुखार हो जाएगा और मर जाएंगे। वे ऐसे ही ठीक हैं। बल्कि उनको इस बात से काफी गुस्सा आया कि हम क्यों उनसे यह पूछने उनके घर पर पहुंच गए कि वैक्सीन क्यों नहीं ले रहे हैं।

8 महिलाओं में से कोई परिवार को या खुद को वैक्सीन लगवाने को तैयार नहीं
आशियाना मोड़ पर मुसहरों के लिए भवन लालू-राबड़ी शासन काल में बना था। उसकी ऊपरी मंजिल जर्जर हो चुकी है। नीचे कचरे के बीच जिंदगी है, लेकिन घरों में टीवी लगे हैं। बातचीत में महिलाएं कहती हैं कि हम लोग आराम से कमा-खा रहे हैं। वैक्सीन क्यों लेंगे मरने के लिए? आप ही लीजिए जाकर। दूसरी महिला कहती है, जाइए आगे बढ़िएना।

तीसरी महिला कहती है- काहे के लिए सुई लेंगे, मरने के लिए? चौथी महिला पूछने पर कहती हैं कि हां टीका ले लिए। लेकिन बातचीत में उनका झूठ पकड़ा जाता है। वह कहती हैं कि हम लोग ये सब नहीं मानते हैं टीका-वीका। पांचवीं महिला कहती है- हम टीका नहीं लेंगे। भगवान है जिलाने वाला और बचाने वाला। भूख से मर रहे हैं तो सरकार आ ही नहीं रही है और चले हैं टीका लगवाने।

छठी महिला तो इस पर कुछ बात ही नहीं करना चाहती। वह उठकर चली जाती है। सातवीं महिला कहती है- टीका लगाने से क्या होगा? कुछ नहीं होगा। हम लोग नहीं लेंगे टीका। आठवीं महिला ने हमें देखा तो लगी भाषण देने। कहने लगी- शराब पीने वाले, सुअर खाने वाले को कोरोना होता है कहीं? कोई टीका नहीं लेगा यहां।

दलितों की इसी छोटी सी कॉलोनी में रहने वाले एक व्यक्ति ने कहा- हम लोग वैक्सीन नहीं लेते हैं। हम लोग मास्क भी नहीं लगाते हैं। लॉकडाउन लगाकर सरकार हम लोगों को मार रही है। टीका लगाने से बुखार लग जाएगा तो कमाएंगे-खाएंगे क्या?

दीघा विधायक पास में ही रहते हैं
पिछले साल पटना में इसी कॉलोनी के पास वाले इलाके खाजपुरा से पटना में कोरोना की शुरुआत हुई थी। आशियाना मोड़ से लेकर खाजपुरा तक प्रशासन ने बेली रोड को सील कर दिया था। अब जब वैक्सीन आ गई है, तब मुसहरों के बीच जागरुकता का यह हाल चौंकाने वाला है। उन्हें सिस्टम या सरकार पर कोई भरोसा नहीं है। किसी संस्था या सरकार का कोई अफसर इन्हें समझाने नहीं आ रहा। बगल में दीघा के विधायक संजीव चौरसिया का घर है।

मुसहरों के लिए काम करने वाली पद्मश्री सुधा वर्गीज भी इस रवैये से हैरान
मुसहरों के लिए पटना में पिछले 35 साल से काम रहीं सुधा वर्गीज भी इस रवैये से हैरान हैं। सुधा वर्गीज ने समाज की सबसे निचली पायदान वाली जाति के बीच काम करने की ठानी और इसके लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार मिला है। वे कहती हैं कि अभी तक किसी मुसहर को कोविड महामारी होते उन्होंने नहीं देखा। लेकिन वह यह भी कहती हैं कि यह खतरनाक स्थिति है कि कोई मुसहर वैक्सीन लेने को तैयार नहीं है।

वर्गीज बताती हैं कि मुसहरों के 200 गांवों में वह एक्टिव हैं, सभी जगह यही स्थिति है कि वे वैक्सीन के लिए तैयार ही नहीं हैं। लोग न मास्क लगाते हैं, न कोई सोशल डिस्टेंसिंग है, न हाथ धोना है। कहती हैं कि मुसहर चूहा, मेढक, सितुआ, घोंघा जैसे नॉनवेज खाते हैं। इन सभी में इम्युनिटी बढ़ाने की क्षमता खूब है। ये जाति अंदर से मजबूत है। बताती हैं कि कई बस्तियों में लोगों को जागरूक करने की कोशिश की, लेकिन लोग कहते हैं- छोड़िए दीदी कोई और बात कीजिए, टीका नहीं लगवाएंगे।

पटना में 3 लाख मुसहर रहते हैं
सुधा वर्गीज बताती हैं कि पटना जिले में मुसहरों की करीब 3 लाख आबादी है। बिहार में यह 10 लाख की संख्या में हैं। इनकी स्थिति सुधारने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को भी सुझाव दिए थे, पर सरकार ने कुछ किया नहीं। ये अभी भी काफी अशिक्षित हैं और अपने तरीके से सोचते हैं। सरकार इन्हें शराब के कारोबार से अब तक नहीं निकाल सकी है। शायद ही इनकी कोई बस्ती होगी, जहां शराब न बनाई या बेची जाती हो।

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