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भास्कर इम्पैक्ट, हटाए जाएंगे सालों से एक जगह जमे पुलिसवाले:खबर चलने के 2 घंटे में ही पुलिस मुख्यालय ने जारी किया आदेश, हटाए जाएंगे 3 साल से एक ही थाने में दारोगा, 33 सिर्फ पटना में

पटना3 महीने पहले
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बिहार के सभी पुलिस अधीक्षकों को जारी आदेश में कहा गया है कि वह शीघ्र समीक्षा कर ऐसे पुलिस कर्मियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित कर लें। - Dainik Bhaskar
बिहार के सभी पुलिस अधीक्षकों को जारी आदेश में कहा गया है कि वह शीघ्र समीक्षा कर ऐसे पुलिस कर्मियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित कर लें।

दैनिक भास्कर की खबर का बड़ा इम्पैक्ट हुआ है। खबर चलते ही 3 साल से एक ही स्थान पर तैनात पुलिस कर्मियों काे लेकर पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी कर दिया है। बिहार के सभी पुलिस अधीक्षकों को जारी आदेश में कहा गया है कि वह शीघ्र समीक्षा कर ऐसे पुलिस कर्मियों को हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित कर लें। दैनिक भास्कर ने मंगलवार शाम एक ही स्थान पर 3 साल से जमे दारोगा की तैनाती से बिगड़ रही कानून व्यवस्था का मामला उठाया था और इसी मामले में शाम तक आदेश जारी कर दिया गया है।

थानों में 3 साल से तैनात दारोगा और ASI की पूरी सेटिंग हो गई थी। कई ऐसे पुलिस वाले भी हैं, जो यारी निभाने में बदनाम भी हुए हैं। ऐसे मामलों को लेकर ही बालू माफिया के साथ अन्य अपराधियों के साथ साठगांठ के मामले भी सामने आए। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह पाया गया कि पटना में 33 दारोगा और 18 ASI एक स्थान पर 3 साल से जमे हैं। इस खुलासे के बाद ही पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मचा और कार्रवाई का आदेश जारी किया गया।

समीक्षा के साथ हटाए जाएंगे 3 साल से जमे दारोगा

पुलिस उप महानिरीक्षक कार्मिक ने 20 जुलाई को जारी आदेश में बिहार के सभी वरीय पुलिस अधीक्षक, सभी पुलिस अधीक्षक ( रेल व इकाई सहित ), सभी प्राचार्य पुलिस प्रशिक्षण संस्थान बिहार को निर्देश दिया है कि 3 साल से एक स्थान पर तैनात पुलिस वालों को हटाया जाए। पुलिस उप महानिरीक्षक कार्मिक का कहना है कि पुलिस मुख्यालय के संज्ञान में आया है कि विभिन्न जिला व इकाईयों में पदस्थापित पुलिस पदाधिकारी, कर्मी लम्बी अवधि से एक ही कार्यालय में तैनात हैं।

गोपनीय शाखा में लंबे समय से तैनाती

पुलिस उप महानिरीक्षक कार्मिक ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा है कि जो पुलिस कर्मी दाराेगा व ASI के साथ अन्य लंबे समय से तैनात हैं उसमें ज्यादातर मामले गोपनीय शाखा अथवा रक्षित कार्यालय के विभिन्न पटल से संबंधित हैं। पुलिस उप महानिरीक्षक कार्मिक ने कहा कि यह प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह स्वस्थ परम्परा नहीं है। साथ ही यह नियमानुकूल भी नहीं है। ऐसे में निर्देशानुसार सूचित किया जाता है कि अपने अधीनस्थ सभी कार्यालयों में कार्यरत पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों के पदस्थापन अवधि की समीक्षा करें तथा जिनकी अवधि 3 वर्ष से अधिक हो गई है, उन्हें दूसरे पटल या कार्यालय में स्थानान्तरण करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही इस कार्रवाई का प्रमाण-पत्र पुलिस मुख्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। इस संबंध में बिहार के DGP ने भी आदेश दिया है।

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पुलिस को दामुक्त करने के लिए पारदर्शिता चाहिए

पटना हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर का कहना है कि बिहार में पुलिस की तैनाती को लेकर पारदर्शिता नहीं होने के कारण पुलिस की साख प्रभावित हो रही है। बिहार पुलिस के DGP और गृह विभाग से लगातार इस मुद्दे पर मांग की जा रही थी कि बालू खनन से लेकर अन्य अपराधों में पुलिस की संलिप्तता सामने आ रही है। सीएम नीतीश कुमार भी जीरा टॉरलेंस पर काम कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस कर्मियों की तैनाती के लिए अगर कोई साॅफ्टवेयर बनाया जाए और इसमें नियम के हिसाब से तैनाती हो ताे ऐसे पुलिस कर्मियों को छांटना आसान होगा, जो एक ही स्थान पर लंबे समय से जमे हैं। पुलिस पुलिस में लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात पुलिस कर्मियों की जानकारी मिलने के बाद पटना हाईकोर्ट की अधिवक्ता रागनी कुमारी का कहना है कि पुलिस कर्मियों की तैनाती में पारदर्शिता से ही लोगों का विश्वास बढ़ेगा। विभाग को पूरी तरह से पारदर्शी होना होगा।

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