जगदानंद से एक्सक्लूसिव बातचीत:RJD प्रदेश अध्यक्ष ने पूछा- JDU-BJP के ऑफिस विस्तार के लिए सरकार ने कितनी राशि खर्च की?, चीफ सेक्रेटरी का आवास CM हाउस में कैसे मिलाया?

पटना9 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
जगदानंद सिंह ने पूछा कि भाजपा व जेडीयू के कार्यालय पर कितना खर्च हुआ है उसका हिसाब जनता मांगती है।

राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार से पूछा है कि JDU कार्यालय और BJP कार्यालय के विस्तारीकरण पर सरकार ने कितना खर्च किया है? प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने यह सवाल दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में पूछा है।

दरअसल, राजद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर 14 हजार वर्गफीट जमीन पार्टी को देने की मांग की है। राजद ने पार्टी कार्यालय के बगल वाली जमीन मांगी है, लेकिन विभाग ने यह कहकर खारिज कर दिया है कि बगल वाली जमीन हाईकोर्ट पुल की है। अब जगदानंद सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इस मुद्दे पर भास्कर के साथ जगदानंद सिंह की पूरी बातचीत पढ़िए...

सवाल- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आपको इतनी उम्मीद कैसे हो गई?

जवाब- नहीं, नहीं, मैं नीतीश कुमार से उम्मीद नहीं करता। मैं बिहार सरकार के मुखिया, मुख्यमंत्री से उम्मीद कर रहा हूं। 12-13 करोड़ आबादी है, वही सरकार का निर्माण करती है। लोग कहते हैं कि प्रतिपक्ष भी सरकार का ही हिस्सा है। हम भले प्रतिपक्ष हैं, लेकिन हम न उनके दुश्मन हैं और न वे हमारे। खेती, बाढ़, बीमारी, बिजली का कोई भी सवाल उठेगा तो लोग किसके पास जाएंगे? पॉलिटिकल इंस्टीट्यूशन भी संस्था है सरकार की। चाहे वह विधायक हो, विधायिका हो या एक्जीक्यूटिव हो। मुख्यमंत्री कार्यपालिका के प्रधान हैं। मैं जदयू के प्रधान से उम्मीद नहीं कर रहा। मैं तो कहता हूं कि वे अनावश्यक जदयू की कुर्सी पर बैठे हुए हैं। जो भी मुख्यमंत्री होगा, चाहे वह भला या बुरा आदमी के रूप में रहे, बात उसी से न करेंगे।

सवाल- भवन निर्माण विभाग ने कह दिया है कि राजद कार्यालय के बगल वाली जमीन हाईकोर्ट पुल की है।

जवाब- सरकार के कानून में है कि नहीं एक्सजेंच ऑफ द लैंड? आवश्यक यूजर जो हैं उसको जमीन दी जाती है। कोई भी विभाग जमीन का मालिक नहीं है। राजस्व विभाग ही सभी जमीनों की देखरेख करता है और मुख्यमंत्री ही सभी के प्रधान हैं। वे राजस्व मंत्री भी है, भवन निर्माण मंत्री भी हैं, सभी के मंत्री हैं, इसलिए वे मुख्यमंत्री कहे जाते हैं। मुख्यमंत्री की दृष्टि यदि व्यापक नहीं हो, है कि नहीं इसमें हमें शंका रही है, लेकिन इस मुद्दे पर हमें मुख्यमंत्री से उम्मीद हैं। हम जब मंत्री की हैसियत से 11 सर्कुलर रोड में रहते थे उसमें अभी हाईकोर्ट के जज रहते हैं। जहां चीफ सेक्रेटरी रहते थे उसे मुख्यमंत्री के आवास में मिला लिया गया।

सवाल- आपने यह भी सवाल उठाया कि जेडीयू ने अपने ऑफिस का विस्तार किस तरह से किया?

जवाब- अपने से विस्तार नहीं किया है। सरकार की सहमति से जेडीयू ने पार्टी ऑफिस का विस्तार किया। सरकार ने तो जेडीयू के लिए पब्लिक सड़क तक दे दी। खाली जमीन दे दी। पच्चीसों एमएलए प्लैट को तोड़कर भवन बना दिया। करोड़ों रुपए जनता की संपत्ति से लगा दिया। हमें क्या एतराज हो सकता है। भाजपा के कार्यालय और जेडीयू के कार्यालय पर कितना खर्च हुआ है उसका हिसाब जनता मांगती है। राजद के कार्यालय पर सरकार के खजाने से कितना खर्च हुआ वह भी सरकार बताए। हमसे 20 हजार रुपए प्रतिमाह भाड़ा लिया जाता है और जेडीयू से भी उतना ही।

हम कहां कह रहे हैं कि जेडीयू से तीन गुना जमीन के लिए 60 हजार रुपए मांगे जाएं। आज भी हम 14 हजार वर्गफीट जमीन ही मांग रहे हैं। हम तो बराबरी की मांग भी नहीं कर रहे। सरकार के कानून में है कि नहीं कि खेती की जमीन पर एयरपोर्ट बना दें। जहां तक माननीय न्यायालय की बात है तो हम उन्हें आवेदन नहीं दे रहे, पर न्यायालय के लोग भी हमारी बात सुन रहे होंगे। कैमूर के डिस्ट्रिक जज कहां रहते हैं? सिंचाई विभाग के आईबी में। बिल्डिंग मिनिस्टर हो सकता है कानून नहीं जानते हों।

पूछिए शाहनवाज हुसैन से जब उन्हें घर जाने के लिए रास्ते की जरूरत पड़ी तो हमने सिंचाई विभाग की जमीन दी की नहीं? वह पर्सनल यूज था। बिजली मंत्री से पूछिए सुपौल में ग्रिड के लिए जमीन दी कि नहीं। हम अवरोध पैदा नहीं करते।

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