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बिहार के 4% गांव की पड़ताल में बड़ा खुलासा:भाकपा माले का दावा- राज्य के 13 जिलों में कोरोना से 7200 की मौत, 50 हजार गांवों में मौत का आंकड़ा सरकारी डेटा से 20 गुणा अधिक

पटनाएक वर्ष पहले
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भाकपा-माले ने सर्वे कराया सर्वे, परिजनों से बातचीत के बाद जारी की बुकलेट, ‘सदी की त्रासदी, सत्ता का झूठ’ नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का किया प्रदर्शन - Dainik Bhaskar
भाकपा-माले ने सर्वे कराया सर्वे, परिजनों से बातचीत के बाद जारी की बुकलेट, ‘सदी की त्रासदी, सत्ता का झूठ’ नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का किया प्रदर्शन

कोविड से मौत की पड़ताल में बिहार के 13 गांवों में जमीनी सर्वे कराया गया है। सर्वे में कोरोना से मरने वालों के परिजनों से बातचीत के बाद डेटा तैयार किया गया है। बिहार में कुल 50 हजार छोटे बड़े गांव में और सर्वे महज 4% प्रतिशत गांवों का सर्वे किया गया है जिसमें 7200 लोगों की मौत कोरोना से हुई है। यह दावा भाकपा-माले का है। जमीनी स्तर और मृतक के परिजनों से बातचीत के आधार पर कराए गए सर्वे में दावा किया जा रहा है कि बिहार में कोरोना से सरकारी आंकड़ों से 20 गुणा अधिक मौत हुई है। भाकपा-माले ने ‘कोविड की दूसरी लहर का सच’ बुकलेट का लोकर्पण और ‘सदी की त्रासदी, सत्ता का झूठ’ नामक डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया है।

सर्वे में एक एक घर तक पहुंची टीम
भाकपा-माले ने सर्वे का आधार बताते हुए कहा है कि 13 गांवों में कार्याकर्ता पहुंचे हैं और हर गांव में मौत के आंकड़ों की पूरी सूची तैयार की है। सूची में मृतक के साथ परिवार के लोगों से बातचीत के आधार पर पूरा ब्यौरा है। माले विधायक कुणाल ने दावा किया है कि बिहार के कई जिलों में भाकपा-माले ने कोविड की दूसरी लहर के दौरान मारे गए लोगों की सूची को अंतिम रूप से जारी कर दिया गया। 13 जिलों में आयोजित सर्वे के आधार पर जारी आंकड़े सरकारी दावों की पोल खाेलने वाले हैं। विधायक का दावा है कि हमारे द्वारा जांचे गए गांव बिहार के कुल गांवों के 4 प्रतिशत ही हैं। इनमें ही 7200 लोगों की कोविड से हुई है। बिहार में तकरीबन 50 हजार छोटे-बड़े गांव हैं। इसलिए मौत का वास्तविक आंकड़ा सरकारी आंकड़े के लगभग 20 गुना से अधिक 2 लाख तक पहुंचता है।

न के बराबर जांच में भी मौत का आंकड़ा डरावना
माले विधायक कुणाल का दावा है कि हमारी टीम शहरों अथवा कस्बों की जांच न के बराबर कर सकी है। यदि हम ऐसा कर पाते तो जाहिर है कि यह आंकड़ा और अधिक हो जाता।

माले के सर्वे में यह सच आया सामने

  • कोविड लक्षणों से मृतकों में 15.47% प्रतिशत लोगों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
  • महज 19.91 प्रतिशत ही कोविड जांच हो पाई।
  • 80.81 प्रतिशत मृतकों की कोई जांच ही नहीं हो पाई, जो कोविड लक्षणों से पीड़ित थे।
  • कुल मृतकों के आंकड़े में 3957 लोगों ने देहाती इलाज कराया है।
  • 2767 मृतकों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया गया।
  • महज 1260 लोगों ने सरकारी अस्पताल में इलाज कराया।
  • 7200 लोगों की मौत में महज 25 लोगों को ही मुआवजा मिल पाया।

सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल
भाकपा-माले का कहना है कि सर्वे और पड़ताल में जो आंकड़े सामने आए हैं इससे यह बात साफ है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से फेल है। आंकड़ों का हवाला देते हुए माले विधायक ने कहा कि आंकड़ा ही साबित करता है कि कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था किस कदर नकारा साबित हुई है। सरकार कोरोना की लड़ाई में जनता में विश्वास खो चुकी है। बड़ी संख्या में मृतकों को मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। हालांकि हाल के दिनों में मुआवजा की संख्या में कुछ वृद्धि होने की बात भी कही जा रही है।

झूठ को बेनकाब करना है
स्वस्थ बिहार-हमारा अधिकार, विषय पर आयोजित जन कन्वेंशन को माले नेताओं के साथ-साथ चिकित्सकों, आशा कार्यकर्ताओं व पार्टी विधायकों ने भी संबोधित किया। माले महासचिव ने इस मौके पर कहा कि कोविड के दौर में हमने जो कुछ झेला, जो उसे महसूस किया, उसे आंदोलन का मुद्दा बना देना है। सरकार इसे मुद्दा बनने नहीं देना चाहती है। सरकार इस प्रचार में लगी है कि लोगों को कोरोना वैक्सीन मिल गया, तो सरकार को धन्यवाद किया जाए। वे प्रचारित कर रहे हैं कि मोदी जी ने देश को बचा लिया। इस झूठ को बेनकाब करना है।

मौत का आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से 20 गुणा अधिक
सर्वे के रिपोर्ट के आधार पर ही बताया गया कि मौत का आंकड़ा सरकारी आंकड़ाें से कम से कम 20 गुणा अधिक है। माले ने इसे जनसंहार की संज्ञा दी है। जब लोगों को ऑक्सीजन की जरूरत थी, सरकार ने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं करवाया। कोविड की पहली लहर के बावजूद भी सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने की कोई कोशिश नहीं की। अस्पताल होते तो इतने व्यापक पैमाने पर मौतें नहीं हुई होतीं।

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