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मायागंज में इलाज की गजब लीला:भागलपुर के सबसे बड़े अस्पताल में डिप्रेशन की मरीज का बेड बदल दिया, गलत इंजेक्शन लगने पर डॉक्टर बोले- चिंता नहीं करें, यहां सबको एक ही दवा दी जाती है

भागलपुर12 दिन पहलेलेखक: कृष्णा बल्लभ नारायण
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मायागंज अस्पताल में भर्ती मरीज ऋचा मिश्रा। - Dainik Bhaskar
मायागंज अस्पताल में भर्ती मरीज ऋचा मिश्रा।

भागलपुर के सबसे बड़े अस्पताल 'मायागंज' की गजब 'माया' है। इसमें लापरवाही की हद हो गई है। मरीज का बेड बदलने के साथ ही दवा भी बदल दी गई। यह पकड़ में तब आया जब गलत दवा खाने से मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजन उसे डिस्चार्ज कराने की गुहार लगाने पहुंचे। वहां गए तो पता चला कि उसे तो गलत दवा दी जा रही है। यह लापरवाही हुई है डिप्रेशन की शिकार ऋचा मिश्रा के साथ। बताया जाता है कि डॉक्टर की लिस्ट के मुताबिक बेड नंबर 96 मिलना था, लेकिन अस्पताल की एक नर्स ने उन्हें बेड नंबर 46 अलॉट कर दिया। इससे दवाइयां और इंजेक्शन भी ऋचा मिश्रा को बेड नंबर 46 के मुताबिक दे दी गई। इसके बाद मरीज को बार-बार चक्कर आने लगा। मरीज ने बताया कि उनकी सेहत और भी खराब हो गई है।

मरीज की हालत देख परिजन नर्स के पास पहुंचे, क्योंकि देखने के लिए डॉक्टर नहीं आ रहे थे। डिस्चार्ज करने के सवाल पर नर्स ने जवाब दिया कि आपका मरीज (बेड संख्या 96) तो गायब है। उसे फरार घोषित कर दिया गया है। उन्हें हम रिलीज कैसे करे? यह सुनते ही मरीज के परिजन हैरान हो गए। उन्होंने कहा कि ऋचा मिश्रा बेड संख्या 46 पर है, न कि 96 पर। अभी भी वह बेड संख्या 46 पर ही लेटी हुई है, जहां उसे भर्ती कराया गया था।

96 नंबर बेड पर दूसरे मरीज का चल रहा इलाज।
96 नंबर बेड पर दूसरे मरीज का चल रहा इलाज।

डॉक्टर का हैरानी भरा जवाब

फिर परिजनों ने पूछा कि आप लोग तो दवा भी गलत चला दिए हैं। इंजेक्शन भी दूसरे मरीज वाला ही लग गया होगा। तब नर्स ने कहा कि पुर्जा पर दवाई डॉक्टर ही लिखते हैं। यह मरीज डॉ एमएन झा की यूनिट में भर्ती हैं, इसलिए इसका जवाब वही देंगे। डॉक्टर से पूछने पर उनका जवाब हैरानी भरा था। डॉक्टर ने परिजनों को बताया कि आपके चारों तरफ सबको एक ही एंटीबायोटिक दवा दी जाती है, इसलिए इसमें नुकसान नहीं हुआ है। वहीं, मरीज ऋचा मिश्रा ने बताया कि तबीयत और भी खराब हो रही है। बार-बार चक्कर आ रहा है। समझ में नहीं आ रहा है कि यहां मेरा इलाज ठीक हुआ या गलत।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से दी गई पर्ची।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से दी गई पर्ची।

8 साल से डिप्रेशन की बीमारी

मरीज ऋचा मिश्रा आदमपुर थाना क्षेत्र के जगन्नाथ राम लेन की हैं। पिछले 8 साल से डिप्रेशन का इलाज चल रहा है। 16 जुलाई को उन्होंने डिप्रेशन की दो टेबलेट की जगह चार टेबलेट खा ली थी, जिससे उनकी सेहत ज्यादा खराब हो गई थी। फिर 16 जुलाई को ही मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी में भर्ती कराया। इसके बाद प्रबंधन की ओर से उन्हें मेडिसिन इनडोर के बेड संख्या 46 पर भर्ती कर दिया, जिसका ईआरएम 6579 है। जबकि, डॉक्टर की लिस्ट में उनका बेड नंबर 96 था।

96 नंबर पर दूसरे मरीज का इलाज

वहीं, भास्कर ने बेड नंबर 96 पर पड़ताल शुरू की तब पता चला कि मरीज को फरार घोषित कर अब मेडिसिन इनडोर के बेड संख्या 96 पर खंजरपुर गांव के लाल मोहन यादव का इलाज चल रहा है। इस मरीज का इलाज भी डॉ एमएन झा की यूनिट में ही चल रहा है। यह मरीज 17 जुलाई को भर्ती किया गया था, जो अभी भी इलाज में है। वहीं, इस पूरे मामले पर मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास से बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

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