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IGIMS ने ब्लैक फंगस की सर्जरी का बनाया रिकॉर्ड:बिहार का पहला अस्पताल, जिसने 20 दिनों में 100 मरीजों का ऑपरेशन कर बचाई जान, AIIMS में भी हुई 70 सर्जरी

पटना6 दिन पहले
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IGIMS में ऑपरेशन की तस्वीर। - Dainik Bhaskar
IGIMS में ऑपरेशन की तस्वीर।
  • पटना मेडिकल कॉलेज को ऑपरेशन के मामले में AIIMS और IGIMS से लेना होगा सबक

बिहार में ब्लैक फंगस महामारी घोषित है। लोगों के बीच काफी दहशत भी है। ऐसे में बिहार के दो बड़े अस्पताल IGIMS और AIIMS ने कुछ हद तक अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त किया है। वहीं, इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) ने 20 दिनों के अंदर ब्लैक फंगस के 100 मरीजों का ऑपरेशन कर रिकॉर्ड बनाया है।

बताया जाता है कि इससे पहले बिहार के किसी भी अस्पताल में इतने कम दिनों में 100 ऑपरेशन नहीं हुए हैं। गुरुवार को संस्थान में 110 मरीज भर्ती थे। शुक्रवार को संस्थान के ब्लैक फंगस वार्ड में एक मरीज का ऑपरेशन किया गया है और यह 100वां ऑपरेशन बना है। वहीं, एम्स पटना में अब 4 ओटी में ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। इससे मरीजों को थोड़ी राहत है।

IGIMS के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए ऑपरेशन ज्यादा जरूरी है। ऐसे में मरीजों की जान बचाने के लिए ऑपरेशन लगातार जारी है। जब भी ऑपरेशन की जरूरत होती है, डॉक्टर OT में पहुंच जाते हैं। इसमें समय नहीं दिया जाता है और न ही इंतजार होता है।

IGIMS में 18 मई से ब्लैक फंगस का हो रहा इलाज

IGIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि 18 मई से ब्लैक फंगस ( म्यूकर मायकोसिस) के मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। संस्थान के लिए यह बीमारी नई थी और इस बीमारी में मरीज को नाक, आंख, चेहरे के साइनसेस के साथ दांत या मस्तिष्क में भी ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती थी।

डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि इस बहुमुखी बीमारी में मुख्यतः ENT, आंख, मैकसीलोफेसियल, न्यूरो सर्जरी के साथ एनेसथीसिया विभाग की टीम की जरूरत होती है। इस बीमारी के लिए बड़ा टीम वर्क जरूरी था। इसलिए सब विभागों को मिलाकर एक म्यूकर विभाग तैयार किया गया।

टीम वर्क से हो रहा ब्लैक फंगस का इलाज

डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि हर ब्लैक फंगस मरीज को संस्थान के ENT OPD में लाया गया। जहां सभी विभागों द्वारा जांच की गई। ENT के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस बीमारी में मरीज को स्टेजिंग करना पड़ता है। इसमें चार प्रकार के म्यूकर बीमारी के स्टेज होते हैं। स्टेज -1 में ENT विभाग द्वारा ही ऑपरेशन किया जाता है।

स्टेज -2 में ENT और चक्षु विभाग द्वारा सम्मिलित रूप से ऑपरेशन किया जाता है। स्टेज -3 में ENT, चक्षु और मैकसीलोफेसियल विभाग द्वारा सम्मलित रूप से ऑपरेशन किया जाता है। जब मरीज स्टेज -4 में चला जाता है तो उपरोक्त विभाग के साथ न्यूरो सर्जरी विभाग के सर्जन साथ मिलकर ऑपरेशन करते हैं।

174 मरीज ब्लैक फंगस के हुए हैं भर्ती

डॉ. मनीष मंडल ने बताया कि 18 मई से अब तक म्यूकर विभाग में 174 मरीज ब्लैक फंगस के भर्ती हुए हैं। इनमें से 56 मरीज का इंडोस्कोपिक विधि द्वारा तथा 44 मरीज का ओपेन सर्जरी द्वारा ऑपरेशन किया गया। इस ऑपरेशन के बाद 21 मरीज को वार्ड से छुट्टी कर दी गई है। लगभग 28 मरीज ऑपरेशन के बाद वार्ड में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अभी भी 25 मरीज का ऑपरेशन करना बाकी है। कोशिश की जा रही हैं कि प्रतिदिन 6 से 8 मरीजों का ऑपरेशन किया जा सके, ताकि बैक लॉक खत्म हो सके।

AIIMS में 70 से अधिक सर्जरी

पटना AIIMS में भी लगभग 70 सर्जरी हो चुकी है। पटना AIIMS की ENT विभाग की HOD डॉ. क्रांति भावना का कहना है कि मरीजों के लिए ऑपरेशन जरूरी है और जिसे भी इसकी जरूरत है, उसका ऑपरेशन किया जाता है। पूर्व में दो OT थी, जिसमें ऑपरेशन होता था। अब इसकी संख्या चार कर दी गई है। चारों OT में अब हर दिन 20 ऑपरेशन होंगे। इससे ऑपरेशन को लेकर मरीजों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

PMCH को दो बड़े संस्थानों से लेना होगा सबक

एक तरफ जहां IGIMS ऑपरेशन का रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं PMCH में अभी तक एक भी ऑपरेशन नहीं हो पाया है। ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों की जान पर संकट है। पटना मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को 30 मरीज भर्ती हैं। इनमें 90 प्रतिशत मरीजों की आंख में परेशानी है। इन मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत है, लेकिन व्यवस्था नहीं होने से ऑपरेशन नहीं किया जा रहा है। ऐसे मरीजों की जान के साथ PMCH खिलवाड़ कर रहा है। ऑपरेशन नहीं होने और इलाज में लापरवाही के कारण ही मरीज भर्ती होने के बाद भी हॉस्पिटल से फरार हो जा रहे हैं।

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