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असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू आज से:हाईकोर्ट ने आरक्षण नियमों के उल्लंघन मामले में की सुनवाई, राज्य सरकार को एक हफ्ते के अंदर जवाबी हलफनामा देने को कहा

पटना3 महीने पहले
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बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग। - Dainik Bhaskar
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग।

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग 4648 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली के लिए 15 जुलाई से इंटरव्यू की शुरुआत कर रहा है। सबसे पहले अंगिका विषय का इंटरव्यू निर्धारित है। दूसरी तरफ बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने के मामले में सुनवाई की।

पटना हाईकोर्ट में जस्टिस विकास जैन ने डॉ. आमोद प्रबोधि व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को एक सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि इस रिट के परिणाम का असर बहाली प्रक्रिया पर आगे पड़ेगा।

एक सप्ताह में जरूरी हलफनामा देने का निर्देश

सीडब्ल्यूजेसी नंबर 8932 ऑफ 2020 (डॉ आमोद प्रबोधि और अन्य बनाम बिहार राज्य और अन्य) की सुनवाई 14 जुलाई को न्यायमूर्ति विकास जैन की पीठ ने की। इस रिट आवेदन के माध्यम से याचिकाकर्ताओं ने बिहार राज्य के विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की नियमित नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन को चुनौती दी थी। विज्ञापन संवैधानिक जनादेश के उल्लंघन के साथ-साथ इंदिरा साहनी मामले से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के उल्लंघन में जारी किया गया था, जो आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को अनिवार्य करता है, जबकि उपरोक्त विज्ञापन में 70 फीसदी से अधिक रिक्तियां आरक्षित करने का आरोप है।

न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद और यह ध्यान में रखते हुए कि उक्त पद के लिए साक्षात्कार 15 जुलाई 2021 से शुरू किया गया है, राज्य सरकार को एक सप्ताह की अवधि के साथ आवश्यक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस बीच न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश के रूप में निर्देश दिया कि चयन/ निर्णय की कोई भी प्रक्रिया वर्तमान रिट आवेदन के अंतिम परिणाम का पालन करेगी।

आरक्षण में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी

वरिष्ठ अधिवक्ता पी. के. शाही ने कोर्ट को बताया कि नियुक्ति में 50 फीसदी से अधिक पदों को आरक्षित नहीं किया जा सकता है, जबकि आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में 70 फीसदी आरक्षित किया गया है। यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। शाही ने कोर्ट को बताया कि 70 फीसदी आरक्षण देने का अर्थ है कि संवैधानिक प्रावधानों का इन पदों पर नियुक्ति के लिए निकाले गए विज्ञापन में अनदेखी की गई है। इस मामले पर अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद की जाएगी।

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