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CM के जनता दरबार में नहीं पहुंच रही गुहार:सभी फरियादियों की समस्या नहीं सुन पा रहे CM, अब तक 7,955 ने आवेदन दिया; 252 की ही समस्याएं जान सकें नीतीश कुमार

पटना2 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
जनता दरबार में फरियादी की समस्या को सुनते सीएम नीतीश कुमार।- फाइल

5 साल बाद 12 जुलाई को शुरू हुआ CM नीतीश कुमार का जनता दरबार अधिकारियों की मनमानी का भेंट चढ़ गया है। आंकड़े भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। पिछले दो जनता दरबार में मुख्यमंत्री सिर्फ 252 लोगों की ही फरियाद सुन पाए हैं। जबकि, 7,955 लोगों ने अपनी समस्या बताने के लिए आवेदन किया है। हालांकि, हर सोमवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में अलग-अलग विभाग तय किए गए हैं।

जुलाई के दूसरे सोमवार को 146 और तीसरे सोमवार को 106 लोगों की फरियाद सुनी गई है। जबकि, पहले सोमवार के 2,270, दूसरे सोमवार के लिए 2,643 और तीसरे सोमवार के लिए 3,042 आवेदन लोगों ने दे दिए हैं। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अलग-अलग विभागों के तहत 257 तरह के आवेदन दिए जा चुके हैं। जिसमें सामान्य प्रशासन से सबसे ज्यादा शिकायत पहुंची है, इसके अलावा शिक्षा विभाग की शिकायत भी अधिक दिख रही है।

मुख्यमंत्री जनता दरबार के अधिकारियों के मुताबिक, जितने भी आवेदन आए हैं, उन सभी आवेदनों पर सुनवाई की जाएगी और संबंधित विभाग को उस शिकायत को दूर करने की हिदायत दी जाएगी। इस बार कोरोना के मद्देनजर मुख्यमंत्री से मिलने वाले फरियादियों की संख्या को सीमित रखा गया है। कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत कई तरह की सीमाएं हैं, ऐसे में फरियादी ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं। उनके आवेदनों पर जल्द सुनवाई की बात कही जा रही है।

जनता दरबार में आवेदन देने के लिए फरियादियों की भीड़।
जनता दरबार में आवेदन देने के लिए फरियादियों की भीड़।

JKDMM वेबसाइट पर आवेदन

इस बार जनता दरबार के लिए ऑनलाइन आवेदनों को मांगा गया है। इसके लिए बिहार सरकार ने JKDMM वेबसाइट भी बनाई है। जिस पर जाकर लोग अपने आवेदन कर सकते हैं। सबसे बड़ी बात है कि कई हजार ऐसे लोग हैं, जो मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अपना आवेदन देना तो चाहते हैं। उनके पास न तो कंप्यूटर है और न ही एंड्रॉयड फोन है। ऐसे में एक बड़ा तबका मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अपनी फरियाद सुनाने से वंचित रह जा रहा है।

इसी का नतीजा है कि जब भी मुख्यमंत्री का जनता दरबार सोमवार को लगाया जा रहा है। उसके बाहर हजारों लोगों की भीड़ लग जाती है, सबकी अपनी अलग-अलग समस्याएं होती हैं। सब हाथ से लिखा हुआ लेकर इस आस में पहुंचते हैं कि मुख्यमंत्री उनकी फरियाद को सुन लेंगे और उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन इस बार ऑनलाइन आवेदन के अलावा किसी भी तरह के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, सरकार के तरफ से एक व्यवस्था जरूर की गई है कि जिनके पास कंप्यूटर और एंड्राइड फोन नहीं है वह स्थानीय प्रशासन के पास अपना आवेदन जमा करके मुख्यमंत्री के जनता दरबार में जाने की अपील कर सकते हैं। स्थानीय प्रशासन उसे ऑनलाइन अप्लाई करेगा और उस आवेदन को जनता दरबार के लिए लिया जाएगा।

इनका क्या है कहना

मुख्यमंत्री जनता दरबार लगातार कवर करते आ रहे UNI के पत्रकार रवि उपाध्याय बताते हैं कि 5 साल पहले जिस तरह से जनता दरबार का आयोजन होता था उससे बिल्कुल अलग यह जनता दरबार है। पहले वाले जनता दरबार में मुख्यमंत्री पूरे दिन लोगों की फरियाद सुनते थे। दो शिफ्ट में एक-एक दिन में 2-2 हजार तक लोगों की फरियाद को सुना जाता था। कोरोना काल में परिस्थितियां बदल गई है।

मुख्यमंत्री जनता दरबार का अलग सेल चलाया जा रहा है। जिसमें आने वाले आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। भले लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिल नहीं पा रहे हैं, लेकिन उनके आवेदन पर जनता दरबार की मुहर लग जा रही है और संबंधित विभाग में पहुंचने पर उस पर कार्रवाई भी हो रही है।

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