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JDU का उत्तराधिकारी तय:सवाल था- आप अध्यक्ष नहीं रहे तो पार्टी का काम कौन देखेगा; नीतीश ने खुद कहा- सबकुछ आरसीपी देखेंगे

पटना5 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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  • पहली बार CM नीतीश ने साफ शब्दों में अपने बाद पार्टी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के बारे में बताया

बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के अंतिम दिन CM नीतीश कुमार ने कहा था कि अंत भला तो सब भला। ये अंतिम चुनाव है। हालांकि बाद में कहा कि वो अंतिम चरण का चुनाव था, इसलिए ऐसा कहा था। लेकिन बिहार की राजनीति में यह प्रचलित है कि नीतीश कुमार बिना सोचे-समझे कुछ भी नहीं बोलते। इसी से सवाल उठता है कि नीतीश कुमार के बाद जदयू का उत्तराधिकारी कौन होगा? जवाब भी नीतीश कुमार ने खुद ही दे दिया है। वो शख्स जो उनके बाद या गैर हाजिरी में सरकार और संगठन को संभाल ले, राम चंद्र प्रसाद सिंह, यानी RCP होंगे।

नीतीश ने खुद पहली बार ऐसा कहा

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने इसे खुद पुख्ता किया है। पिछले दिनों प्रदेश कार्यालय में जब वे नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर रहे थे, तो एक नेता ने पूछा कि आपकी गैर हाजिरी में पार्टी का काम कौन देखेगा? तब नीतीश कुमार कहा कि उनके बाद सब कुछ RCP जी ही देखेंगे।

यह पहला मौका था जब CM नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में अपने बाद पार्टी में उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी के बारे में बताया। राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ऐसे भी पार्टी में नीतीश कुमार के बाद नंबर दो के नेता माने जाते हैं। RCP की जदयू संगठन पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। चुनाव में सीटों का बंटवारा हो या पार्टी प्रत्याशी चुनने की जिम्मेदारी, CM नीतीश उनपर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।

RCP क्यों हैं खास

नीतीश कुमार जब केंद्र सरकार में मंत्री थे, तब से लेकर अबतक साये की तरह आरसीपी सिंह साथ रहे हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे आरसीपी सिंह पहले केंद्र में नीतीश कुमार के सचिव रहे हैं। उसके बाद नीतीश जब बिहार के मुख्यमंत्री बने तो RCP को अपना प्रधान सचिव बनाया। फिर उन्हें राजनीति में ले आए, और अब राज्यसभा का सांसद बना दिया। अभी भी दिल्ली में नीतीश कुमार के सभी निजी या राजनीतिक काम, आरसीपी सिंह ही कर रहे हैं।

कभी कुशवाहा तो कभी PK भी नंबर दो की चर्चा में रहे

नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर हर बार चर्चा होती रही है। जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बन गये थे, उससे पहले विपक्ष के नेता के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा काफी सुर्खियां बटोर चुके थे। माना जा रहा था कि कुशवाहा, नीतीश कुमार के राजनीतिक वारिस होंगे। लेकिन उनके छिटकने के बाद यह चर्चा शांत हो गई थी।

इसके बाद साल 2015 के विधानसभा चुनाव में बड़े दमखम के साथ प्रशांत किशोर (PK) का राजनीतिक उदय हुआ था। नीतीश कुमार ने PK को सीधे जदयू का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना नंबर दो का दर्जा दे दिया था। तब भी राजनीतिक पंडितों ने PK को नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी माना था। लेकिन बाद के दिनों में नीतीश से उनके संबंधों में कड़वाहट आ गई और यह चैप्टर भी क्लोज हो गया। अब नीतीश कुमार ने अपने सबसे भरोसेमंद और पुराने हमराज नेता की ओर इशारा किया है। मतलब साफ है कि नीतीश कुमार की तलाश यहां समाप्त हो गई है।

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