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निगेटिव दौर की सबसे पॉजिटिव कहानी:7 महीने की बच्ची से हारा कोरोना; इसकी झप्पी से मां भी संक्रमण मुक्त हुईं, पूरा परिवार जीता

पटना5 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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  • 2 साल का भाई गंभीर हुआ, लेकिन वह भी रिकवर हो गया
  • हर तरफ हार मत देखिए, इस जीत से सबक लीजिए

पूरी दुनिया को परेशान करने वाले और भारत में तांडव मचा रहे कोरोनावायरस को पटना की 7 महीने की बच्ची ने हरा दिया। वायरस ने पकड़ तो मजबूत बनाई थी, लेकिन मासूम ने हंसते-खेलते उसे पटखनी दे दी। बुखार में भी हंसती रही। पूरा घर पॉजिटिव रिपोर्ट को निगेटिव करने के लिए अवंतिका की पॉजिटिविटी में ऐसा रमा कि पूछिए मत। अवंतिका का सवा 2 साल का भाई शिवांश गंभीर भी हुआ, लेकिन वह भी इसे देखते-देखते ठीक हो गया। कोरोना को लेकर हर तरफ से आ रही निगेटिव खबरों के बीच भास्कर ने यह पॉजिटिव कहानी पूरे दस्तावेज के साथ ढूंढ़ निकाली। ऐसी कहानी, जो वास्तविक जीवन में सीख दे रही कि हारना नहीं है।

AIIMS में मरीजों को देखने के क्रम में डॉक्टर पिता हुए पॉजिटिव
डॉ. अमृत राज शर्मा AIIMS के ENT विभाग में सीनियर रेजिडेंट हैं। डॉ. अमृत की पत्नी अनामिका PNB में हैं। अवंतिका के जन्म के लिए ली गई मैटरनिटी लीव के दौरान ही यह सब हो गया। डॉ. अमृत कोरोना काल में भी मरीजों की सेवा कर रहे हैं। घर में 7 माह की मासूम अवंतिका और सवा दो साल का बेटा शिवांश है। बच्चों की देखभाल के लिए एक मेड और एक रिश्तेदार की बेटी भी साथ में परिवार की तरह रहती हैं। भास्कर से बातचीत में डॉ. अमृत राज कहते हैं कि काफी सावधानी से रहने के बावजूद ENT में क्लोज कॉन्टैक्ट से मरीजों का इलाज करने के दौरान वह कोरोना संक्रमित हो गए।

खुद क्वारैंटाइन हुए, फिर भी पत्नी और दोनों बच्चे हो गए संक्रमित
डॉ. अृमत राज बताते हैं कि 8 अप्रैल को उन्हें बुखार आया, जिसके बाद वह घर में ही क्वारैंटाइन हो गए। 9 अप्रैल को टेस्ट की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन 10 अप्रैल को लक्षण आ गए। सर्दी के साथ खांसी आने लगी। पत्नी अनामिका को भी लक्षण दिख गए। वे भी क्वारैंटाइन हो गईं। 7 महीने की बच्ची को 24 घंटे तक मां से अलग रखा, ताकि वह संक्रमित नहीं हो। फिर जांच कराने पर पति-पत्नी पॉजिटिव निकले। घर वालों से दूरी बनाई, अलग-अलग कमरे में रहने लगे। परेशानी पीछा नहीं छोड़ रही थी। दूर रहने के बावजूद 7 माह की बेटी को खांसी-बुखार हो गया। मां से अलग रह रही बेटी भी कोरोना पॉजिटिव हो गई और फिर बेटा शिवांश भी गंभीर हो गया। बुखार के साथ अचानक 50-60 उल्टियां हो गईं। तुरंत एम्स पहुंचे, लेकिन कोई प्राइवेट रूम नहीं मिल सका।

जिस संस्थान में डॉक्टर, वहां नहीं मिल सका था बेड
डॉ. अमृत राज का कहना है कि तकलीफ तो तब हुई जब उन्हें AIIMS में प्राइवेट रूम नहीं दिया गया। जनरल वार्ड में आइसोलेशन के लिए रखा जा रहा था। वह मायूस होकर बच्चे का इलाज कराकर घर आ गए। पूरा परिवार पॉजिटिव था और इस पर संस्थान में रूम नहीं मिलना बड़ा तनाव था। इसके बाद ENT की HoD डॉ कांति भावन की कोशिश से उन्हें प्राइवेट रूम मिल गया तो डॉ. अमृत अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ भर्ती हो गए। वे 6 दिनों तक AIIMS में भर्ती रहे।

बाद में पॉजिटिव हुई अवंतिका सबसे पहले हुई स्वस्थ
डॉ. अमृत राज कहते हैं कि उन्होंने वैक्सीन की दोनों डोज ली थीं, इस वजह से उन पर वायरस का ज्यादा असर नहीं हुआ। लेकिन 7 महीने की बेटी ने तो वैक्सीन वालों से भी तेजी से वायरस को फाइट दी। बच्ची को लेकर पूरा परिवार काफी डरा हुआ था, लेकिन बुखार और कोविड के पूरे लक्षण होने के बाद भी उसका हंसना एक दिन भी बंद नहीं हुआ। जब वह मां के पास सीने से लिपटी रहती थी तो मां को भी जल्द ठीक होने की हिम्मत मिलती गई। मासूम को देखकर ही पूरा परिवार तेजी से वायरस से फाइट करता रहा।

डॉ. अमृत कहते हैं कि अगर घर में जच्चा-बच्चा पॉजिटिव हों और बच्चे को मां की फीडिंग की जरूरत पड़ती हो तो दोनों को साथ रखें। दोनों में तेजी से सुधार होगा। उनके घर में सभी सदस्यों में से 7 माह की बेटी ने सबसे पहले कोविड को मात दी। इसके पीछे बड़ा संदेश यही है कि उसे कोई डर नहीं था, वह कोरोना के बारे में अनजान थी। इसी तरह किसी को भी कोरोना से डरना नहीं है, बस हिम्मत से गाइडलाइन का पालन करते हुए वायरस को मात देनी है।

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