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कोरोना के वीर फिर से तैयार:कोई लोगों तक पहुंचा रहा ऑक्सीजन, कोई वैन से बांट रहा भोजन, किसी ने रक्तदान की उठाई जिम्मेदारी

पटनाएक वर्ष पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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कोरोना संक्रमण के बीच बच्चे को भोजन देते कोरोना वॉरियर। - Dainik Bhaskar
कोरोना संक्रमण के बीच बच्चे को भोजन देते कोरोना वॉरियर।
  • पिछली बार से इस साल ऑक्सीजन की मांग बढ़ी
  • कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद अंतिम संस्कार में भी जुटे हैं वॉरियर्स

कोविड-19 के दूसरे फेज ने सब की चिंता बढ़ा दी है। सरकार जहां इससे निपटने के अलग-अलग उपाय ढूंढ रही है। वहीं, कोरोना काल में जो लोगों के लिए देवता बनकर सामने आए थे। उन पर भी जिम्मेदारी बढ़ गई है। कोरोना का यह फेज काफी खतरनाक है। यह लोगों में जल्दी स्प्रेड कर रहा है। ऐसे में लोगों के लिए जो आवश्यक चीजें हैं। उसकी व्यवस्था कर रहे लोगों के पास डिमांड बढ़ गई है। वहीं कोविड-19 से हो रही मौत के अंतिम संस्कार में भी लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उसको लेकर भी व्यवस्था की जा रही है। इस बार भी पिछले साल के उन समाज सेवकों को ढूंढ रहे हैं, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से लोगो की सेवा की थी। इस बार भी ये फ्रंट वारियर्स लोगों की सेवा करने के लिए तैयार है। भास्कर पिछले साल के कोरोना वारियर्स से आपको मुलाकात करा रही है, जो इस बार भी कोरोना से लड़ने के लिए तैयार हैं। वे लोगों को मदद करने में जुट गए हैं।

ऑक्सीजन के जरिए लोगों की बचा रहे हैं जिंदगी।
ऑक्सीजन के जरिए लोगों की बचा रहे हैं जिंदगी।

1 ऑक्सीजन मैन, गौरव कुमार

गौरव कुमार को 'ऑक्सीजन मैन' के नाम से भी जाना जाता है। वे पिछले साल कोरोना से संक्रमित हो गए थे। इन्हें ऑक्सीजन की कमी हुई थी। सरकारी व्यवस्था से नाराज गौरव कुमार ने अलग से लोगों के लिए ऑक्सीजन मुहैया कराना शुरू कर दिया। पिछले साल से लेकर अब तक गौरव कुमार ने सैकड़ों लोगों की जान ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराकर बचाई है। गौरव कुमार बताते हैं कि अभी उनके पास 108 ऑक्सीजन सिलेंडर है और इसे उन्होंने 3 भाग में बांट रखा है। एक बड़ा भाग उनके आवास पर रहता है, दूसरा बड़ा भाग उनके दफ्तर में रहता है और तीसरा भाग इनकी गाड़ी में अक्सर रहता है। ताकि कभी भी जरूरत हो तो लोगों तक आसानी से पहुंच सकें। गौरव आगे कहते है कि मैंने अभी तक 134 सिलेंडर पटना में लगाया है। करीब 60 % लोग घर में रहकर इस संक्रमण से उबर चुके हैं। कोई मौत नहीं हुई है। शनिवार रात से अभी तक 56 सिलेंडर की डिमांड हुई जो काफी बड़ी मात्रा है। 17 लोगों को उपलब्ध करा चुका हूं । पिछले साल 20 जुलाई से होली तक 1,034 लोगों को खुद लगाया है।

2 मुकेश हिसारिया

मुकेश हिसारिया बहुत पहले से ही रक्तदान को लेकर मुहिम चलाते रहे हैं। लेकिन कोरोना काल मे इनकी जिम्मेदारी काफी बढ़ गई थी। 2020 से लेकर अब तक कोरोना काल में लोगों से सुरक्षित रहने की अपील करते रहे हैं। मुकेश इस दौरान लोगों तक जरूरी सामान भी पहुंचाते रहे हैं। मास्क, सेनिटाइजर सहित जरूरी दवाएं संक्रमितों तक पहुंचा रहे हैं। कोरोना के दूसरे फेज में यदि किसी की मौत हो जा रही है तो उसके अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था भी मुकेश हिसारिया कर रहे है। कोविड 19 के संक्रमण में जहां अपने साथ छोड़ कर भाग जाते हैं। वहां मुकेश हिसारिया पहुंचकर उसकी मदद कर रहे हैं। मुकेश बताते है कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच Remdesivir Injection की कमी हो रही है। जो लोगों के लिए वरदान है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

3 राजीव मिश्रा

राजीव मिश्रा काफी अरसे से रोटी बैंक चलाते हैं। पिछले साल जब कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो लॉकडाउन हो गया। लोगों के सामने खाने-पीने की समस्या हो गई। राजीव मिश्रा ने रोटी बैंक के तहत लोगों तक भोजन पहुंचाया। राजीव बताते हैं कि पिछले साल कंटेनर में भोजन लेकर लोगों को कतार में लगा कर भोजन देते थे। लेकिन कोरोना के दूसरे फेज में इसके स्प्रेड को देखते हुए व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब यह अलग-अलग पैकेट बनाकर लोगों से दूरी मेंटेन करते हुए भोजन देते हैं। राजीव बताते हैं कि कोरोना का जो भी गाइडलाइन है, उसको पूरा करते हुए वह और उनके वॉलिंटियर अपने आप को लगातार सेनिटाइज करते रहते हैं। रोटी बैंक के जरिए सुबह से शाम तक लोगों को भोजन दिया जा रहा है। अलग-अलग इलाकों में जाकर रोटी बैंक का वैन लोगों तक भोजन पहुंचा रहा है।

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