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CM आवास के पास कोरोना गाइडलाइन टूटी:पुलिस पहले से जानती थी 3 सियासी कार्यक्रम होंगे, फिर भी भीड़ रोकने के नहीं किए इंतजाम; सिक्योरिटी देने में लगा रहा प्रशासन

पटना2 महीने पहले
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पटना एयरपोर्ट पर चिराग के स्वागत के लिए उमड़ी भीड़। - Dainik Bhaskar
पटना एयरपोर्ट पर चिराग के स्वागत के लिए उमड़ी भीड़।

CM नीतीश कुमार के आवास से महज डेढ़ किमी की दूरी पर नेता सोमवार को कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते रहे, लेकिन इस पर किसी की नजर नहीं गई। मुख्यमंत्री एक तरफ सोमवार को अनलॉक-4 का निर्देश जारी कर रहे थे। दूसरी तरफ राजधानी में ही तीन जगहों पर हर नियम को तोड़ा जा रहा था।

वहीं, शिक्षक अभ्यर्थियों पर डंडा बरसाने वाली पुलिस मूकदर्शक बनकर तमाशा देखती रही। आम लोगों को भीड़ जुटाने से भी मनाही है। शादी-समारोह में भी सिर्फ 20 लोगों की अनुमति है, लेकिन पॉलिटिकल कार्यक्रमों को खुली आजादी। कोई रोक-टोक नहीं।

सरकार से अब जनता पूछ रही है कि आम और खास में यह अंतर क्यों। कोरोना गाइडलाइन तोड़ने पर कहीं लाठी बरसाई जा रही, कहीं बिना अनुमति के नेताओं का कार्यक्रम हो रहा है। सियासी पार्टियों के तीन कार्यक्रम हुए। तीनों पहले से निर्धारित थे। कहीं भी कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं हुआ। क्या नीतीश सरकार और प्रशासन को जानकारी नहीं थी कि इतनी भीड़ उमड़ने वाली है। यह कैसे संभव है, जब तीनों कार्यक्रम के बारे में पहले से ही बिहार की सियासत में बवाल मचा था।

नीतीश सरकार और प्रशासन को जानकारी नहीं थी तो सरकार की इंटेलिजेंस क्या कर रही थी। उसे भी पता नहीं चला कि राजधानी में इतनी भीड़ होने वाली है।

चाचा और भतीजा ने तोड़ी कोरोना गाइडलाइन

सबसे पहले बात करते हैं रामविलास पासवान की जयंती की। रामविलास पासवान की जयंती उनके भाई पशुपति पारस और उनके बेटे चिराग पासवान ने अलग-अलग मनाने का ऐलान किया। पशुपति पारस ने पटना में जयंती मनाई तो, चिराग पासवान ने पटना से जाकर हाजीपुर में आशीर्वाद यात्रा निकाली। अब इस भीड़ का अंदाजा लगाइए। एयरपोर्ट के रास्ते पर LJP का कार्यालय है। इस कार्यालय में पशुपति पारस ने अपने बड़े भाई रामविलास पासवान की जयंती समारोह रखा था।

समारोह में दो हजार से ज्यादा लोगों ने शिरकत की। प्रशासन के आला अधिकारी ट्रैफिक को ठीक करने के लिए वहां मौजूद थे, लेकिन उन्हें यह भीड़ नहीं दिख रही थी। जबकि, गाड़ियों का काफिला LJP कार्यालय के पास खड़ी थी। पुलिस पदाधिकारी सबको व्यवस्थित कराने में लगे थे, लेकिन उन्हें कोरोना गाइडलाइन के मुताबिक भीड़ नहीं दिख रही थी।

इन पुलिस पदाधिकारियों को भीड़ आम लोगों के शादी और श्राद्ध में दिखती है। जहां की संख्या 25 तय की गई है। कोरोना गाइडलाइन में कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम या समारोह करने की मनाही है और उसी राजनैतिक गलियारे में यह कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे।

सिक्योरिटी देने में लगा रहा प्रशासन

उधर, बिहार सरकार को इस बात की चिंता थी कि कहीं चिराग पासवान एयरपोर्ट से उतर कर LJP कार्यालय के तरफ से गुजर गए तो लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति खराब हो जाएगी। इस स्थिति में चिराग पासवान के काफिले को प्रशासन ने सीधे बेली रोड की तरफ मोड़ दिया ताकि चाचा भतीजे में सीधी टक्कर ना हो। यहां भी चिराग पासवान के साथ सैकड़ों गाड़ी थी, लोग थे, हुजूम साथ में चल रहा था, प्रशासन उन्हें सिक्योरिटी दे रहा था।

प्रशासन को चिराग पासवान के साथ चलने वाली भीड़ नहीं दिखी। जबकि चिराग पासवान ने भी अरसे पहले यह ऐलान किया था कि वह आशीर्वाद यात्रा निकालेंगे और हाजीपुर जाएंगे और हाजीपुर से यह यात्रा निकलेगी। हाजीपुर में भी आलम यही रहा हजारों की संख्या को चिराग पासवान ने संबोधित किया।

RJD के कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग गायब।
RJD के कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग गायब।

कोरोना गाइडलाइन तोड़ने में विपक्ष भी पीछे नहीं

अब बात बिहार के मुख्य विपक्षी दल RJD की कर लेते हैं। 5 जुलाई को RJD ने अपना 25 वा स्थापना दिवस मनाया। सिल्वर जुबली के इस मौके पर तेजस्वी यादव सहित आरजेडी के बड़े नेता कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। इसके अलावा सैकड़ों कार्यकर्ता भी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। मंच नेताओं से खचाखच भरा था। कदम रखने की भी जगह नहीं थी। सभी नेता एक दूसरे से चिपक कर बैठे थे।

प्रशासन के आला अधिकारी कार्यालय के बाहर गाड़ियों को व्यवस्थित करने में लगे थे। बता दें कि ठीक JDU कार्यालय के सामने ही RJd का भी कार्यालय है। यह मोस्ट VIP इलाका माना जाता है, लेकिन इन जगहों पर भी कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया। भीड़ RJD कार्यालय में पहुंची भी, कार्यक्रम भी हुआ और भीड़ निकल भी गई और प्रशासन को कुछ भी नजर नहीं आया।

जवाब नहीं दे सके DM

इस पूरे मामले पर भास्कर ने पटना के DM डॉ. चंद्रशेखर सिंह से बातचीत की। उनके जवाब भी संतोषजनक नहीं आए। DM ने कहा कि किसी ने अनुमति नहीं ली थी। हाईकोर्ट के पास अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के लिए अनुमति मांगी गई थी। लेकिन, नहीं दी गई थी। भास्कर ने जब सवाल पूछा कि कार्रवाई होगी तो डीएम बोले कि वो देखेंगे। एडवांस में कैसे बोल सकते हैं।

इनका क्या है कहना

सोशल एक्टिविस्ट कुमार राघवेंद्र बताते हैं कि कोरोना गाइडलाइन के नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए। आम लोगों के लिए अलग और खास लोगों के लिए अलग नहीं होना चाहिए। तीनों राजनीतिक कार्यक्रम सरकार की नजर में थे। सरकार और प्रशासन को पहले यह तय करना चाहिए था कि इन कार्यक्रमों में कितनी उपस्थिति रहेगी या कार्यक्रमों की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। कुमार राघवेंद्र यह भी बताते हैं कि इसमें गलती इन राजनीतिक दलों का नहीं है।

साफ तौर पर सरकार की उदासीनता का यह उदाहरण है। इन सभी ने अपने कार्यक्रमों की घोषणा पहले से की हुई थी और काफी दिनों से इनकी तैयारी भी चल रही थी। सरकार और प्रशासन के लोग चाहते तो इनके साथ समन्वय बनाकर इस कार्यक्रम को छोटा भी कर सकते थे या फिर कोई दूसरा रास्ता भी निकाल सकते थे, लेकिन सरकार पूरी तरह से इन सभी कार्यक्रमों के सामने पंगु दिखी। बिहार सरकार जिस गाइडलाइन की बात करती है उसकी धज्जियां इन लोगों ने ही उड़ाई है।

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