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ऑक्सीजन की कमी से मौत पर मंगल पांडेय झूठ बोले:याद कीजिए मौत का वह मंजर...जब ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे थे मरीज, HC मांग रहा था जवाब, बेबस सरकार के पास न जवाब था, न इंतजाम

पटना2 दिन पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
ऑक्सीजन की कमी से हुई थी लोगों की मौत। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से सवाल- क्यों बोल रहे हैं झूठ।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बुधवार को दावा किया कि राज्य में ऑक्सीजन की किल्लत से एक भी मौत नहीं हुई है। सरकार ने ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था की थी। दावा किया कि डिमांड 14 गुना बढ़ने के बाद भी पूरी हुई व्यवस्था की गई थी। तीसरी लहर के लिए भी सरकार की तैयारी का पूरा दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत सबके आंखों के सामने है।
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पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने अपना इस्तीफा यह लिखकर दे दिया कि ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत का खतरा है। हाईकोर्ट ने भी यह कहा कि होम आईसोलेशन में संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन की कोई व्यवस्था नहीं। इसके बाद भी मंत्री जी का बयान बड़ा झूठ है। क्योंकि दर्द तो पीड़ित परिवार ही बताएगा जिसके घर में सांस के लिए तड़प तड़प कर किसी ने दम तोड़ा है। दैनिक भास्कर कठिन दौर की कुछ मामलों को याद कर रहा है।
पढ़ें;

27 अप्रैल 2021 को सुबह साढ़े 10 बजे अथमलगोला के दक्षिणीचक निवासी कोरोना संक्रमित 70 साल के शिवदायल सिंह की बाढ़ में अस्पताल के गेट पर ही मौत हो गई थी। मरीज को ऑक्सीजन की आवश्यकता थी। परिजनों ने ऑक्सीजन का इंतजाम किया था लेकिन वह खत्म हो गया और डेढ़ घंटे तक परिवार वाले अस्पताल से मदद की मांग करते रहे, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। डॉक्टरों ने उस दौरान बताया कि 90 से कम ऑक्सीजन पर मरीज को भर्ती नहीं करना था, मरीज का ऑक्सीजन लेबल 67 आ गया था। मौत के बाद घटना की लीपापोती की गई।

हाईकोर्ट ने कहा था- ऑक्सीजन है तो मरीज मर क्यों रहे

पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित समिति ने अप्रैल में दी गई रिपोर्ट में कहा था कि ऑक्सीजन की अनियमित आपूर्ति के कारण अस्पताल प्रशासन मरीजों को भर्ती नहीं कर पा रहा है। डॉ उमेश भदानी, डॉ रवि कृति और डॉक्टर रवि शंकर सिंह की कमेटी की इस रिपोर्ट पर 29 अप्रैल को टिप्पणी करते हुए पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी भी जताई थी। यह आदेश दिया था कि अस्पतालों को 24 घंटे ऑक्सीजन की निर्बाध सप्लाई की जाए। न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह एवं न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खण्डपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ऑक्सीजन को लेक कई आदेश दिया था।

खतरे में थी 84 मरीजों की जान

यह तस्वीर 8 मई की है। सुपौल के त्रिवेणीगंज बुनियादी केंद्र में बने कोविड केयर सेंटर में एक कोरोना मरीज की ऑक्सीजन के अभाव में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। आरोप है कि मरीज जब अस्पताल गया तो ऑक्सीजन लेबल 35 पर आ गया था, लेकिन डॉक्टरों ने समुचित इलाज नहीं किया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। मौत होने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने उसके मुंह में ऑक्सीजन लगा दिया।
यह तस्वीर 8 मई की है। सुपौल के त्रिवेणीगंज बुनियादी केंद्र में बने कोविड केयर सेंटर में एक कोरोना मरीज की ऑक्सीजन के अभाव में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। आरोप है कि मरीज जब अस्पताल गया तो ऑक्सीजन लेबल 35 पर आ गया था, लेकिन डॉक्टरों ने समुचित इलाज नहीं किया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। मौत होने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने उसके मुंह में ऑक्सीजन लगा दिया।

मंत्री जी ऐसा क्यों हुआ था

ऑक्सीजन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि बड़े दुख की बात केंद्र सरकार की ओर से तय 194 मीट्रिक टन ऑक्सीजन में से राज्य सरकार केवल 90 मिट्रिक टन ऑक्सीजन का उठाव कर पा रही है। फिर भी सरकार कह रही है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी नहीं। अगर ऑक्सीजन की कमी नहीं ऑक्सीजन है तो फिर ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत कैसे हो रही है?

बिहार के पूर्व मंत्री को एक अस्पताल ने भर्ती नहीं किया

मंत्री जी होम आईसोलेशन में क्या थी व्यवस्था

कोरोना की दूसरी लहर में लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेड थी। कोरोना जब पीक पर था तो किसी भी सरकारी अस्पताल में बेड नहीं था। सरकार के दावे के बाद भी कोई भी प्राइवेट अस्पताल नियंत्रण में नहीं था। मरीजों से मोटी रकम ली जा रही थी, इसका प्रमाण प्रशासन की कई बड़ी छापेमारी में भी हुआ था। ऐसे में अधिक संख्या में संक्रमित लोग होम आईसोलेशन में थे। इन लोगों के लिए सरकार ने ऑक्सीजन की क्या व्यवस्था की थी यह बड़ा सवाल है।

अप्रैल में पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्रवाई पर यह भी कहा था कि अस्पतालों में बेडों की संख्या घटाना समस्या का समाधान नहीं है। कोर्ट ने 27 अप्रैल को ही कहा था कि होम आईसोलेशन में मर रहे लोगों को ऑक्सीजन कैसे सप्लाई हो इस बारे में कोई कार्य योजना ही नहीं है। होम आईसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए ऑक्सीजन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी सरकार होम आईसोलेशन में रह रहे मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं कर पाई।

NMCH के अधीक्षक ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
NMCH के अधीक्षक ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।

NMCH के सुपरिटकेंडेंट का पत्र क्या बता रहा

ऑक्सीजन की किल्लत से हो रही मौत में NMCH में कई बार तोड़फोड की गई। मरीजों की मौत पर आक्रोशित लोगों ने कई बार बवाल किया था। इस पर नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल NMCH के अधीक्षक ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर कार्यभार से मुक्ति मांगी थी। अधीक्षक ने पत्र में लिखा था कि कुछ दिनों से नालंदा मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता के भंडार पर नियंत्रण कर ऑक्सीजन सिलेंडर NMCH की जगह अस्पतालों को भेजे जाने के किारण NMCH में ऑक्सीजन की काफी मात्रा में कमी आ जा रही है।

अधीक्षक ने कहा था कि उनके अथक प्रयास के बाद भी ऑक्सीजन की आपूर्ति में बाधा आ रही है। अधीक्षक ने यह साफ कर दिया था कि NMCH में भर्ती मरीजों की दर्जनों मरीजों की जान ऑक्सीजन की कमी के कारण खतरे में रहती है। अधीक्षक ने पत्र में लिखा था कि वह सशंकित हैं कि ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मृत्यु के पश्चात इसकी सारी जवाबदेही अधीक्षक नांलदा मेडिकल कॉलेज महाविद्यालय पर आरोप गठित कर कार्रवाई की जाएगी। इस पत्र से भी हड़कंप मचा था, लेकिन इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधरी थी और ऑक्सीजन की नियमित सप्लाई करने में सरकार पूरी तरह फेल रही।

स्वास्थ्य मंत्री से भास्कर के 5 सवाल

  1. होम आईसोलेशन में रह रहे कितने मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई ?
  2. जब कोरोना पीक पर था तो क्या सभी डेडिकेटेड अस्पतालों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल रहा था?
  3. जब सरकार की तरफ से ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था थी तो अस्पताल मरीजों से ऑक्सीजन की डिमांड क्यों कर रहे थे?
  4. अस्पतालों का कोटा कम कर दूसरे अस्पतालों को क्यों दिया जा रहा था, जब ऑक्सीजन की व्यवस्था पर्याप्त थी?
  5. सरकार लोगों को पर्याप्त व्यवस्था की जिससे कोई नहीं मरा तो फिर समाज सेवी और ब्लैक करने वाले किसे ऑक्सीजन दिए?

मरीजों को अस्पताल तक लाने वाले एम्बुलेंस में नहीं मिल रहा ऑक्सीजन

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