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कोरोना का खौफ:चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर ही 'शोपीस' बनी कोविड गाइडलाइन, नॉमिनेशन में उमड़ रहे हुजूम, उड़ीं प्रोटोकॉल की धज्जियां

पटनाएक वर्ष पहले
आयुक्त कार्यालय पटना के बाहर लगी नामांकन दाखिल करने आए नेताओं के समर्थकों की भीड़।
  • विधानसभा चुनाव में कोरोना विस्फोट का बड़ा खतरा, प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के सामने टूटी चुनाव आयोग की गाइडलाइन
  • नामांकन में टूटा कोविड प्रोटोकॉल, दो व्यक्ति की अनुमति थी, 20 गाड़ी से आए प्रत्याशी

कोरोना काल में चुनाव से संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। कोविड को लेकर जारी गाइडलाइन कागजों तक सिमट गई है। संक्रमण के खतरे से बेफिक्र चुनावी भीड़ महामारी के मुहाने पर ले जा सकती है। आयोग की गाइडलाइन निर्वाचन कार्यालयों की दहलीज पर टूट रही है। चुनाव आयोग की गाइडलाइन कैसे टूट रही है इसका उदाहरण गुरुवार को पटना प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के सामने दिखा। नामांकन के पहले दिन जब यह हाल है तो मतदान तक क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।

आयुक्त कार्यालय के गेट से थोड़ी दूर टंगा कोविड गाइडलाइन का पोस्टर। किसी ने पोस्टर में लिखी बातों पर ध्यान नहीं दिया।
आयुक्त कार्यालय के गेट से थोड़ी दूर टंगा कोविड गाइडलाइन का पोस्टर। किसी ने पोस्टर में लिखी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

ऐसे टूटी आयोग की गाइडलाइन
नामांकन की व्यवस्था पटना प्रमंडलीय कार्यालय में की गई है। गुरुवार को नामांकन का पहला दिन रहा। कार्यालय के बाहर भारी हुजूम था। गाड़ियों की कतार से सड़क जाम थी। प्रमंडलीय कार्यालय के सामने मुख्य गेट पर सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया था, लेकिन बाहर भीड़ को नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

प्रत्याशियों ने कोविड से बचाव को लेकर गाइडलाइन का पालन नहीं किया और न ही जिम्मेदारों ने ही इसमें कोई सख्ती दिखाई। आयुक्त कार्यालय के बाहर भारी भीड़ थी और नारेबाजी का शोर कार्यालय के अंदर तक पहुंच रहा था। चुनाव आयोग द्वारा पर्यवेक्षक से लेकर अन्य पदाधिकारियों को लगाया गया था, लेकिन भीड़ को सोशल डिस्टेंसिंग का पाठ पढ़ाने वाला कोई नहीं था। गेट के अंदर तो दो से तीन लोग ही प्रत्याशी के साथ जा रहे थे, लेकिन थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशन की सिर्फ औपचारिकता ही की जा रही थी।

आयुक्त कार्यालय के बाहर जुटी भीड़।
आयुक्त कार्यालय के बाहर जुटी भीड़।

नामांकन में यह हाल तो चुनाव में कौन होगा जिम्मेदार?
नामांकन के दौरान ही जब कोरोना से बचाव को लेकर निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन टूट गई तो चुनाव प्रचार, मतदान और मतगणना तक क्या होगा इसका अंदाजा लगाकर ही हृदय कांप जाता है। नामांकन के पहले दिन की भीड़ ने यह संकेत दे दिया है कि अगर आयोग गंभीर नहीं हुआ तो चुनाव के बाद बिहार को कोरोना विस्फोट से बचाना बड़ी चुनौती होगी।

चुनाव आयोग की गाइडलाइन के बाद आम जनता कोरोना के संक्रमण से कैसे बचेगी यह बड़ा सवाल है। चुनाव बाद अगर कोरोना विस्फोट हुआ तो कौन जिम्मेदार होगा? यह बड़ा सवाल है। नामांकन के पहले दिन जिम्मेदारों की मनमानी सामने आई है। यह कोरोना संक्रमण फैलने का संकेत दे रही है। बिहार को कोरोना बम से बचाना आसान नहीं दिख रहा है।

आयुक्त कार्यालय के गेट पर लगा नेताओं के समर्थकों का जमावड़ा।
आयुक्त कार्यालय के गेट पर लगा नेताओं के समर्थकों का जमावड़ा।

भीड़ नहीं हुई काबू तो मतदान पर दिखेगा असर
नेताओं और उनके समर्थकों की भीड़ पर काबू नहीं पाया गया तो इसका असर मतदान पर भी पड़ सकता है। चुनाव की गहमागहमी को लेकर जिस तरह से कार्यालयों में भीड़ और सड़कों पर वाहनों का रेला है, ऐसे में आम लोगों में कोरोना को लेकर दहशत है। आयुक्त कार्यालय के पास गुरुवार को जाम में फंसे रामकरन, शोभित और मुकेश तिवारी ने बताया कि कोरोना काल में चुनाव में इस तरह मनमानी हुई तो बिहार को कोरोना विस्फोट के लिए तैयार रहना होगा।

सड़क पर सोशल डिस्टेंसिंग की जांच करने वाला कोई नहीं है। पोलिंग से पहले कोरोना विस्फोट का डर है। ऐसी दशा में कौन वोटिंग के लिए जाएगा? आटो चालक रमेश का कहना है कि गांधी मैदान से आयुक्त कार्यालय आने में आधा घंटा लग गया। कोरोना के संक्रमण के बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गाइडलाइन का पालन कराने वाली पुलिस कहां है? इसका भी जवाब देने वाला कोई नहीं।

आयुक्त कार्यालय में तैनात पुलिस के जवान गेट के बाहर जुटी भीड़ को हटा नहीं पाए।
आयुक्त कार्यालय में तैनात पुलिस के जवान गेट के बाहर जुटी भीड़ को हटा नहीं पाए।

पार्टी कार्यालयों के बाहर भी कोई निगरानी नहीं
राजनीतिक पार्टी के कार्यालयों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन पार्टी कार्यालयों में टूट रही है। आश्चर्य की बात तो यह है कि गाइडलाइन जारी करने और उसका पालन कराने वालों के बीच क्या सामंजस्य है? या भी पता नहीं चल रहा है।

कंटेंट: मनीष मिश्रा

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