बिहार में हर्ष फायरिंग का कानून है, मानता कोई नहीं:अप्रैल से जुलाई तक 37 शुभ मुहूर्त पर 15 बार फायरिंग हुई, दूल्हे के भाई सहित 5 की जान चली गई; ज्यादातर जगह अवैध हथियारों से चली गोलियां

पटना4 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह

बिहार में करीब 4 माह में हर्ष फायर से 5 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें एक दूल्हे के भाई सहित दो बच्चे भी शामिल हैं। अप्रैल से जुलाई तक 37 शुभ मुहूर्त थे। इस दौरान प्रदेश में हर्ष फायरिंग के 15 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। हर्ष फायरिंग करने वाले इसका वीडियो भी बनाते हैं। इन सबके बीच पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस की पहुंच से कहीं अपराधी तो कहीं हथियार गायब हैं। जबकि, प्रदेश में हर्ष फायरिंग कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। हर्ष फायर करने पर सजा का प्रावधान है।

हर्ष फायरिंग को लेकर दैनिक भास्कर ने पड़ताल की है। पड़ताल में सामने आया कि ज्यादातर हर्ष फायरिंग गैर लाइसेंसी हथियारों से की गई है। सुपौल में 17 जुलाई को सामने आए मामले में भी गैर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग हुई थी। इस घटना में दुल्हन के पैर में ही गोली लग गई थी। मामले में दुल्हन के जीजा की गिरफ्तारी हुई है और उसे आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया गया है।

तारीखस्थानघटनागिरफ्तारीहथियार की बरामदगी
17 जुलाईसुपौलदुल्हन के पैर में लगी गोलीजीजा गिरफ्तारनहीं
22 मईमधेपुरादूल्हे के भाई की मौतनहींनहीं
21 जूनपटनाकई राउंड फायरिंगनहींनहीं
5 जुलाईसुपौलतमंचे पर डिस्कोनहींनहीं
25 मईमुंगेरवरमाला के मंच पर फायरिंगनहींनहीं
26 मईकैमूरदूल्हे के भतीजे को लगी गोलीनहींनहीं
18 जूनभोजपुर2 बच्चों की मौत1आरोपी गिरफ्तारनहीं
13 अप्रैलपूर्णियाकोई कैजुअल्टी नहींनहींनहीं
19 जूनभोजपुरबुजुर्ग की मौत1 गिरफ्तारीनहीं

अप्रैल से जुलाई के बीच कहां-कहां हुई गैर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग

  • 17 जुलाई को सुपौल में सामने आए मामले में भी गैर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग हुई थी। दुल्हन के पैर में गोली लगी। जीजा गिरफ्तार। नहीं मिला हथियार।
  • 22 मई मधेपुरा के उदाकिशुनगंज थाना के चानन गांव में दूल्हे के भाई की हर्ष फायरिंग से मौत हो गई।
  • 21 जून पटना के पास नौबतपुर में बार बालाओं के डांस में कुछ युवकों ने पिस्टल से कई राउंड फायरिंग की। आरोपी गिरफ्तार, नहीं मिला हथियार ।
  • 5 जुलाई सुपौल के राघोपुर थाना क्षेत्र के कोरियापट्टी गांव में शादी में बार बालाओं के साथ 2 युवक तमंचे पर डिस्को कर रहे थे। सभी आरोपी फरार।
  • 25 मई मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड के अमारी गांव में वरमाला के दौरान मंच पर युवक कट्टा लेकर चढ़ गए।
  • 26 मई सासाराम जिले में भानस पुलिस चौकी के कटियारा गांव में तिलक समारोह के दौरान हर्ष फायरिंग हुई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई ।
  • 6 जून कैमूर के कुदरा थाना के फकराबाद में शादी समारोह में हुई हर्ष फायरिंग में दूल्हे का 10 वर्षीय भतीजा गोली लगने से घायल हो गया।
  • 18 जून भोजपुर में हर्ष फायरिंग में दो बच्चों को गोली मार दी गई। घटना चरपोखरी थाना के काउप गांव में घटित हुई थी। 1 आरोपी की हुई गिरफ्तारी, नहीं जब्त हुआ हथियार।
  • 13 अप्रैल केहाट थाना की पुलिस ने हर्ष फायरिंग करने के आरोप पर पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। एक व्यक्ति द्वारा हर्ष फायरिंग की गई थी। किसी आरोपी की नहीं हुई पहचान।
  • 19 जून भोजपुर जिले के ज्ञानपुर में हुई शादी के दौरान एक बुजुर्ग की गोली लगने से मौत हो गई थी। एक आरोपी की हुई गिरफ्तारी, 2 फरार, नहीं मिला हथियार ।

सोशल मीडिया पर वीडियो डाल रहे अपराधी

हर्ष फायरिंग के ज्यादातर मामले सोशल मीडिया के जरिये सामने आते हैं। इसका साफ मतलब है कि गैर लाइसेंसी हथियारों को लेकर घूम रहे अपराधी इन हथियारों को खुलेआम लहराने में बिल्कुल नहीं हिचकिचाते। शादी से लेकर सार्वजनिक समारोहों में सैकड़ों की भीड़ के सामने धांय-धांय गोलियां चलाकर यह पुलिस को खुली चुनौती दे रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस ऐसे मामलों में लाचार सी दिखती है।

क्या है नियम

हर्ष फायरिंग के मामलों गैर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग करनेवालों पर आर्म्स एक्ट की धारा 25(1)-b(a) लगाई जाती है। इसमें 2 साल से 5 साल की सजा होती है। 1 लाख का तक फाइन हो सकता है। लाइसेंसी हथियार से फायरिंग के मामलों में दोषियों के लिए 6 महीने की सजा और 2 हजार तक का फाइन है।

पुलिस की जांच में लाइसेंसी हथियार का गलत इस्तेमाल सामने आने पर लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है, लेकिन अगर इन मामलों में किसी को गोली लग जाती और उससे उसकी मौत हो जाती है तो 14 साल तक जेल में रहना पड़ सकता है।

अप्रैल से जुलाई तक हर्ष फायरिंग में 5 की हुई मौत

बीते 4 महीनों में हुई हर्ष फायरिंग में 5 की मौत हो चुकी है। बिहार पुलिस मुख्यालय के पास इसे लेकर कोई आंकड़ा नहीं है। ऐसे मामलों में कार्रवाई तभी हो पाती है, जब वीडियो वायरल हो जाए और वो चर्चा में आ जाएं ।

कानून की जानकार श्रुति सिंह कहती हैं सभी मामले सामने आते नहीं, क्योंकि इसे कहीं ना कही समाज उत्सव का हिस्सा मान लेता है। पुलिस भी इन मामलों को लेकर ऐसा ही नजरिया रखती है। इसलिए इन पर संजीदा नहीं है। कार्रवाई उन्हीं मामलों में होती है, जिसमें कोई दुर्घटना हो जाए।

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