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भास्कर एक्सक्लूसिव:बिहार में कोरोना के बेहतर मैनेजमेंट के दावे करती शानदार कॉफी टेबल बुक छपी; प्रधान सचिव की लिखी प्रस्तावना से शुरू, उनकी टीम के डिटेल से अंत

पटना6 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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कॉफी टेबल बुक के हिंदी वर्जन में कवर पेज पर छपा नाम भी अशुद्ध लिखा गया। - Dainik Bhaskar
कॉफी टेबल बुक के हिंदी वर्जन में कवर पेज पर छपा नाम भी अशुद्ध लिखा गया।

घातक महामारी कोरोना और उससे निपटने की इतनी शानदार प्रस्तुति आपने कहीं नहीं देखी होगी। पिछले साल कोरोना महामारी पर सरकार अपने इंतजाम से इतनी खुश है कि आपदा प्रबंधन विभाग ने इस पर एक शानदार कॉफी टेबल बुक प्रकाशित किया है। अक्टूबर-सितंबर 2020 में यह प्रकाशित हुआ और फरवरी-मार्च 2021 तक यह लोगों को भेजा जाता रहा। ताकि स्थापित हो सके कि सरकार ने कोरोना से लड़ाई में ऐतिहासिक कार्य ही नहीं किया, बल्कि ऐतिहासिक जीत भी हासिल की। यह उसी जश्न का प्रतीक है।

कॉफी टेबल बुक का नाम भी शुद्ध नहीं लिख सके

कुल 92 पेज की इस प्रस्तुति में मोटे पेपर और खूबसूरत क्वालिटी के फोटो का इस्तेमाल है। सरकार ने खुद को इतिहास में बेहतर इंतजाम के लिए जगह देने का खुद से ही बड़ा प्रयास किया है। दिलचस्प यह कि कवर पेज पर कॉफी टेबल बुक का नाम 'मीमांसा ' रखा गया है, पर इसे शुद्ध-शुद्ध लिखना भी नहीं आया। 'मीमांसा' को 'मिमांसा' लिखा गया है। किसी पढ़े-लिखे व्यक्ति के लिए यहीं से अनिच्छा पैदा हो जाती है।

न मुख्यमंत्री, न मंत्री, न मुख्य सचिव का वक्तव्य, सब कुछ वन मैन शो

इस कॉफी टेबल बुक को 'कोविड-19 से लड़ाईः एक पुनरावलोकन, मार्च- जुलाई 2020' बताया गया है। मुख्य रूप से यह आपदा प्रबंधन विभाग की प्रस्तुति है, लेकिन इसमें सहयोग लिया गया है बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और एशियन डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस सेंटर का। इस पर कॉपी राइट आपदा प्रबंधन विभाग, बिहार सरकार का ही है। फिर भी सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री या मुख्य सचिव का वक्तव्य इसमें नहीं है। हां, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की कलम से उनके फोटो के साथ वक्तव्य जरूर है।

प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की कलम से शुरुआत।
प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की कलम से शुरुआत।

खतरे का अंदाजा था तो कदम क्या बढ़ाए, साफ दिख रहा है

पिछले साल क्वारैंटाइन सेंटर की कैसी स्थिति रही, वह मीडिया में आती रही, लेकिन प्रधान सचिव ने लिखा है- 'सरकार ने भोजन, अस्थायी आश्रयों और लौटे प्रवासी श्रमिक, जो लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित हुए थे, के लिए क्वारैंटाइन उपायों को प्रदान करने में बहुत काम किया।' कोविड के वैश्विक परिदृश्य से लेकर भारत कैसे ठहर गया और बिहार सरकार ने कैसे बेहतरीन प्रयास किए, इसका लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया है। बताया गया है कि दूसरे राज्यों से 30 लाख से अधिक प्रवासी कामगारों के बिहार आने से आबादी में कम से कम तीन प्रतिशत बढ़ोतरी हो गई। इसमें इस बात की आशंका जरूर है कि आने वाले समय में कोविड-19 और विषाणु जनित रोगों के खतरे बढ़ सकते हैं।

मार्च-जून 2020 तक के कोविड प्रबंधन का इतिहास

13 मार्च 2020 से लेकर 8 जून 2020 तक लॉकडाउन के कालक्रम का तिथि वार ब्यौरा इसमें है। महामारी के समय बाहर से आने वाले बिहारियों के लिए कैसे-कैसे इंतजाम किए गए, इसका विस्तार से वर्णन इसमें है। महामारी के बाद की तैयारी, महामारी में सुरक्षा, संकट के दौरान संचार, डिजिटल समाधान नामक अध्याय के बाद सबसे अंत में 'अनिश्चित समय: संकल्प दृष्टि' और 'नए अनुक्रम में आपदा प्रबंधन' नामक अध्याय है।

आप ही से शुरू, आप ही से अंत

कॉफी टेबल बुक में बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग में कोविड-19 प्रबंधन के लिए कोर टीम, एनडीआरएफ टीम, स्टैंडर्ड कम्यूनिकेशन टीम के अलावा जिला स्तरीय रिस्पॉन्स टीम के सदस्यों का फोटो उनके पद सहित प्रकाशित है। सबसे शुरु में विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की तस्वीर और सबसे अंत में बतौर कॉफी टेबल बुक की संकल्पना और मार्गदर्शक के तौर पर भी इनकी तस्वीर प्रकाशित है। यह बताती है कि शानदार कॉफी टेबल बुक के साथ इसका बड़ा श्रेय लेने की कोशिश आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ने की है।

अंत में भी बतौर संकल्पना और मार्गदर्शक विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की तस्वीर प्रकाशित है।
अंत में भी बतौर संकल्पना और मार्गदर्शक विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत की तस्वीर प्रकाशित है।
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