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बिहार की 11 नदियां लाल निशान के पार:बेतिया और मोतिहारी में सड़क पर 4-5 फीट बह रहा पानी, बगहा में उफान पर मसान नदी

बेतिया/बगहा/मोतिहारी4 महीने पहले
बिहार में बाढ़ से बदहाली।

नेपाल और सीमांचल के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद महानंदा और परमान नदियों का जलस्तर भी कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गया। इसके साथ ही अब सूबे की 11 प्रमुख नदियां लाल निशान को पार कर चुकी है। सोमवार की रात महानंदा, परमान के अलावा कोसी, कमला-बलान, अधवारा, बागमती, बूढ़ी गंडक, गंडक, सोन, खिरोई और ललबकिया नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। बागमती खतरे के निशान से दो मीटर ऊपर तो कमला 177 सेंटीमीटर, गंडक 143 सेमी और ललबकेया एक मीटर ऊपर बह रही है।

वहीं, नॉर्थ बिहार का बेतिया और मोतिहारी जिला बाढ़ की चपेट में है। यहां बाढ़ कहर बरपा रही है। कई परिवार के आशियाने खत्म हो गए तो कई घरों में साल भर का अनाज पल भर में ही स्वाहा हो गया। पानी की तेज धारा में सब कुछ बह गया है। मोतिहारी जिले में तो करीब 200 परिवार सड़क पर रहने को मजबूर हैं। सड़क पर 4-5 फीट पानी बह रहा है।

वहीं, बेतिया जिले के बगहा में मसान नदी उफान पर है। लोग घर छोड़कर निकल गए हैं। यहां डेढ़ अरब से तैयार सोलर पावर प्लांट पर भी बाढ़ की वजह से खतरा मंडरा रहा है। सीएम नीतीश कुमार ने मंगलवार को कई इलाकों का हवाई सर्वे किया।

सड़क किनारे तंबू में रहने को मजबूर लोग।
सड़क किनारे तंबू में रहने को मजबूर लोग।

सांप-बिच्छू काटने का भी डर

कवन कसूर कइली की भगवान इ दिन देखवले ह, इ जिंदगी जिअला से अच्छा रहित की मर गइल रहती। यह शब्द मोतिहारी की बाढ़ पीड़िता 55 वर्षीय मालती देवी का है। बाढ़ की तबाही से छलका हुआ दर्द बयां करने के लिए यह काफी है। मोतिहारी-बेतिया रोड में लगभग 200 से अधिक परिवार सड़क पर तंबू तानकर जीवन बसर कर रहे हैं। घर डूब गया है।

वहीं, फूलमती देवी ने कहा कि रात कटला से कटत नइखे, रातभर बच्चा सब के डर रहता की सांप-बिच्छू ना काट लेवे।

बेतिया-मोतिहारी मुख्य पथ में 4 से 5 फीट बह रहा पानी

इस रोड के चंचल बाबा मठ से आगे सड़क पर लगभग 4 से 5 फीट पानी बह रहा है। इधर से लगभग सभी गाड़ियों का आना-जाना बंद हो गया है। लोग जानपुल रोड होकर बंजरिया, छपवा, सुगौली आदि स्थानों पर जाने को विवश हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि इस रोड से पानी नहीं बह रहा है।

इस सड़क पर भी जानपुल से आगे कई जगहों पर पानी बह रहा है। जिससे गाड़ियों का परिचालन तो हो रहा है, लेकिन चालक को इस दौरान काफी सूझ-बूझ के साथ गाड़ियां निकालनी पड़ रही है।

कई गांव टापू में तब्दील

वहीं, बेतिया जिले के बेतिया-मैनाटांड़ रोड पर जान जोखिम में डालकर लोग सड़क पार कर रहे हैं। सड़क पर पानी का बहाव काफी तेज है। हालांकि कुछ स्थानीय लोग सड़क पार करने में लोगों की मदद कर रहे हैं जिससे कोई अनहोनी ना हो। जिले में बाढ़ से स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। गांवों में पानी घुस जाने से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोग ऊंचे स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हैं।

बाढ़ के चलते बेतिया-मैनाटांड़ मुख्य मार्ग पर 3 से 4 फीट पानी बह रहा है। सड़कों पर पानी का बहाव इतना तेज है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बेतिया से मैनाटांड़ जाने वाली सड़क के किनारे बसे कई गांव टापू में तब्दील हो चुके हैं। इन गांवों में आने-जाने का रास्ता बंद है। उसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर सड़क पार कर रहे हैं। कई वाहन बीच सड़क पर ही फंसे हुए हैं।

मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र का हवाई सर्वे करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।
मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र का हवाई सर्वे करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

दो भागों में बंट गया गांव

बेतिया जिले में मसान नदी कहर बरपा रही है। बरियरव पंचायत के बरियरव गांव में मुड़ गया। इसके बाद चार घर इसके तेज धार में बह गए। इतना ही नहीं नदी में गांव के बीचो-बीच से निकल गई, जिसके बाद इस गांव के लगभग 40 घर नदी के दूसरे भाग में चले गए और बाकी घर दूसरे भाग में रह गए।

ग्रामीणों ने बताया कि 30 से अधिक वर्षों से वे नदी कटाव की मार सहते आ रहे हैं, पर इस बार जो भीषण कटाव हो रहा है प्रशासन की तरफ से कोई भी उचित सहायता नहीं मिली।

डेढ़ अरब से तैयार सोलर पावर प्लांट पर मंडरा रहा खतरा

बेतिया जिले के ही रामनगर प्रखंड के मुंडेरा गांव के सोलर पावर प्लांट मसान नदी की जद में आ गया है। नदी की मुख्यधारा प्लांट के पश्चिमी हिस्से के 25 फिट दूर है। 2015 में पावर प्लांट तैयार किया गया। इस पावर प्लांट से 10 मेगावाट बिजली सप्लाई होती है। बाढ़ की चपेट में आकर प्लांट को खासा नुकसान हुआ है।

पानी उतरने के बाद इन दिनों 2 मेगावाट बिजली आपूर्ति हो रही है। इसके पश्चिमी हिस्से में लगातार काटाव हो रहा है। अगर यह प्लांट कट जाता है तो 10 मेगावाट की बिजली सप्लाई बंद हो जाएगी। स्थानीय स्तर पर बहुत सारे लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

मुजफ्फरपुर में 50 हजार आबादी परेशान

मुजफ्फरपुर के औराई, कटरा एवं गायघाट में बाढ़ की स्थिति भयावह है। तीनों प्रखंड के 50 हजार आबादी बाढ़ के पानी से गिर गए हैं। गंडक की बाढ़ के कारण साहेबगंज प्रखंड में तीन पंचायत की 10,000 से अधिक आबादी प्रभावित हो गई है।

उधर, तटबंधों पर कापी दबाव उत्पन्न हो गया है। नए-नए इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है। महानंदा पूर्णिया और कटिहार में खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गयी। यहां नदी लाल निशान से 71 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सोन नदी इन्द्रपुरी में भी खतरे के निशान को पार कर गई है।

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