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कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को 1500 रुपए हर माह:CM नीतीश कुमार ने किया ऐलान, बाल सहायता योजना से ऐसे बच्चों को 18 वर्ष तक मिलेगी सहायता

पटना23 दिन पहले
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सांकेतिक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज ऐसे बच्चों के लिए मदद का ऐलान किया। सरकार ने इन बच्चों को हर महीने 1500 रुपए देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने अपने ट्विटर के जरिए इस योजना का ऐलान किया है।

बाल सहायता योजना से 18 वर्ष तक मिलेगी सहायता
अनाथ हुए बच्चों को बाल सहायता योजना के तहत मदद राशि दी जाएगी। हर महीने 1500 की ये मदद राशि 18 वर्ष तक बच्चों को दी जाएगी। जिन बच्चों के माता-पिता में से किसी एक की भी कोरोना से मौत हुई, उन्हें भी इस योजना में कवर किया जाएगा। इसके साथ ही जिन अनाथ बच्चे-बच्चियों के अभिभावक नहीं हैं, उनकी देखरेख बालगृह में की जाएगी। अनाथ बच्चियों का कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में प्राथमिकता पर नामांकन कराया जाएगा।

प्रभावित बच्चों की लिस्ट तैयार की जा रही
समाज कल्याण विभाग की तरफ से आंगनबाड़ी सेविकाओं के जरिए कोरोना महामारी से प्रभावित बच्चों की ट्रेसिंग कर, उनकी लिस्ट तैयार की जा रही है। बाल सहायता योजना से पहले इन बच्चों को सरकार की योजना 'परवरिश' के जरिए हर महीने 1 हजार तक की आर्थिक मदद देने की बात कही गई थी। पटना के चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर वरुण कुमार के मुताबिक ट्रेसिंग का काम 1 सप्ताह पहले शुरू किया गया है। पूरे प्रदेश में अब तक इस तरह के 43 बच्चों की सूचना मिली है। अपने मां-बाप को खो चुके सूबे के 43 बच्चों को समाज कल्याण विभाग ने परवरिश योजना से जोड़ लिया है।

दोनों योजनाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
अनाथ बच्चों को परवरिश योजना में शामिल किया जा चुका है । मुख्यमंत्री के स्तर से आज बाल सहायता योजना की जानकारी दी गई है। ऐसे में फिलहाल ये स्पष्ट होना बाकी है कि क्या बच्चों को दोनों योजनाओं का लाभ मिलेगा या किसी एक का। परवरिश पहले से चलाई जा रही योजना है, जबकि बाल सहायता योजना कोरोना काल में शुरू की गई है। परवरिश में बच्चों को 18 साल तक हर महीने 1000 की मदद मिलती है। इसमें वैसे बच्चों को लाभ दिया जाता है, जिनके अभिभावक कुष्ठ रोग या फिर किसी अन्य तरह की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों। अनाथ बच्चों के मामले में किसी स्वजन के सामने नहीं आने पर बच्चों को विभाग अपने स्तर से समाज कल्याण विभाग की देखरेख में संचालित केयर होम (आश्रय गृह) में रखता है।

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