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  • Bihar Health Secretary Said 9375 People Have Died Due To Corona Not 5458 Till 8th June 2021

बिहार सरकार अब तक झूठ बोलती रही:14 महीने बाद सामने आए प्रधान सचिव ने कहा- सही नहीं था कोरोना से मौत का डेटा, 5458 नहीं, 9375 लोगों की गईं हैं जानें

पटनाएक महीने पहले
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बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि मौतों का आंकड़ा अपडेट नहीं किया गया। - Dainik Bhaskar
बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि मौतों का आंकड़ा अपडेट नहीं किया गया।

बिहार का स्वास्थ्य विभाग कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा छिपा रहा था। मौत का आंकड़ा 72% कम बताया जा रहा था। यह कबूलनामा बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत का है। उन्होंने बुधवार को ऑनलाइन प्रेस काॅन्फ्रेंस कर बताया कि इसका खुलासा दो स्तर से कराई गई जांच में हुआ है। यानी स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में 8 जून तक कोरोना से 5458 मौत का आंकड़ा बताया था, वह गलत है। वास्तविक आंकड़ा 9375 है।

सरकार अपनी गलती तो स्वीकार कर रही है, लेकिन कुतर्क कर अपना बचाव भी कर रही है। अब तर्क दिया जा रहा है कि जो आंकड़े बढ़े हैं, उसमें होम आईसोलेशन और अस्पताल में जाने के दौरान रास्ते में होने वाली मौत भी शामिल है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले मौत के आंकड़ों में चोरी का खुलासा पटना जिला प्रशासन की समीक्षा में भी हुआ था।

दो स्तर पर बनी कमेटी की जांच में सामने आया सच
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत का कहना है कि कोरोना से होने वाली मौत में जिलों से आंकड़ा नहीं भेजा जा रहा था। कोरोना से होने वाली मौतों की समीक्षा कराई गई है। एक में मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक व प्रिंसिपल के साथ मेडिसिन विभाग के HOD को रखा गया था। दूसरी टीम में सिविल सर्जन-ACMO के साथ एक अन्य मेडिकल अफसर को शामिल किया गया था। समीक्षा में यह बात सामने आई कि कोरोना से मौत के आंकड़ों को अपडेट नहीं किया जा रहा था। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जहां से इस तरह की मनमानी की जा रही थी।

23 दिन में उठ गया मौत से पर्दा
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने 18 मई को कमेटी गठित कर कोरोना से होने वाली मौत की समीक्षा का आदेश दिया था। मेडिकल कॉलेज और जिलों से हुई समीक्षा में पाया गया कि 72% मौत रिकॉर्ड में आई ही नहीं है। प्रधान सचिव ने माना है कि इस संवेदनशील मामले में विभाग में काफी असंवेदनशीलता की गई है। इसका जिम्मेदार जो होगा उसे भुगतना होगा। लेकिन इतनी बड़ी लापरवाही पर कार्रवाई कितने लोगों पर की गई इस सवाल पर प्रधान सचिव चुप्पी साध गए।

जानिए कैसे पड़ा था आंकड़ों पर पर्दा

  • स्वास्थ्य विभाग हर दिन कोरोना का आंकड़ा जारी करता है।
  • अब तक मौत के आंकड़ों को लेकर कभी सवाल नहीं खड़ा किया गया था।
  • दूसरी लहर में मौत का ग्राफ तेजी से बढ़ा तो आंकड़ों पर पर्दा पड़ गया।
  • स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कोरोना से होने वाली मौत की जानकारी छिपाई गई।

बिहार में मौतों का आंकड़ा सबसे ज्यादा

देश में बुधवार को 6,139 मौतें दर्ज की गई। इनमें सबसे बड़ी 3, 951 मौतें बिहार की जुड़ी। इससे पहले महाराष्ट्र ने भी मौतों के आंकड़ों में संशोधन किया था।

मौतों का आंकड़ा।
मौतों का आंकड़ा।

ये आंकड़ें भी सच नहीं!

बिहार सरकार ने पटना में कोरोना से मौत का आंकड़ा 7 जून तक 1,223 बताया था और 8 जून तक का आंकड़ा 2293 जारी किया था। अचानक आए इन आंकड़ों का सच कितना है, इसका अंदाजा आप ही लगाएं। क्योंकि भास्कर के पास पटना के 3 घाटों पर ही इस साल अप्रैल मई में 3,243 शवों के कोविड प्रोटोकॉल से अंत्येष्टि का आंकड़ा है। यह आंकड़ा भी सरकारी है और बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने पटना समेत पूरे बिहार का जो सुधारा हुआ आंकड़ा पेश किया, वह भी।

राजधानी पटना में मौत के आंकड़े जब इस तरह छिपाए गए हों तो बाकी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल नहीं। बुधवार को जारी आंकड़ों में होम आइसोलेशन, कोविड केयर सेंटर, प्राइवेट अस्पताल, अस्पताल पहुंचने के दौरान कोरोना से मरने वालों और देर से कोरोना मौत की सूचना देने वालों की भी जानकारी अपडेट किए जाने की बात कही गई। जबकि, भास्कर ने पटना के सिर्फ चारों सरकारी अस्पतालों में कोविड से इस साल अप्रैल मई में 1,470 मौतों की जानकारी निकाली।

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