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बंगाल रिजल्ट का बिहार में इंपैक्ट:BJP सरकार न बनने से RJD-JDU खुश; तेजस्वी की पार्टी खुलकर मुस्करा रही, नीतीश के लोग अंदर ही अंदर

पटना5 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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बंगाल में BJP की सरकार नहीं बन पाने से JDU के अंदर संतोष का भाव है। यह बाहर से भले नहीं दिख रहा पर आपसी बातचीत में JDU कार्यकर्ता कह रहे हैं कि नीतीश कुमार को संजीवनी मिल गई। - Dainik Bhaskar
बंगाल में BJP की सरकार नहीं बन पाने से JDU के अंदर संतोष का भाव है। यह बाहर से भले नहीं दिख रहा पर आपसी बातचीत में JDU कार्यकर्ता कह रहे हैं कि नीतीश कुमार को संजीवनी मिल गई।

बंगाल चुनाव परिणाम के बड़े असर हैं। बिहार की राजनीति को ठीक से समझने वाले आपस में बातें कर रहे हैं कि नीतीश कुमार को संजीवनी मिल गई। बंगाल में BJP की जीत होती तो वह बिहार में और ज्यादा एग्रेसिव हो जाती। दीदी की जीत से RJD तो खुश है ही, JDU भी है। हालांकि दोनों की खुशी में अंतर है। RJD बाहर और अंदर दोनों से खुश है लेकिन JDU अंदर से। गठबंधन धर्म की वजह से वो मुस्करा नहीं सकती। अंदर कुछ होता है और बाहर कुछ, यही राजनीति है।

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JDU के चुनाव प्रचार में भी बंगाल नहीं गए थे नीतीश

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे से ही JDU डिमॉरलाइज हो गई थी। उनकी सीटें BJP की वजह से खिसक गईं। LJP की कारस्तानी पर प्रधानमंत्री ने कुछ भी रोकने जैसा नहीं कहा था और उल्टे केन्द्र के गठबंधन में LJP को शामिल रखा गया। LJP खुद एक सीट जीत सकी थी लेकिन कम से कम 30 सीटों पर JDU को नुकसान पहुंचाया था। चुनाव के बाद नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री भले बन गए लेकिन BJP सीटों के लिहाज से बड़ा भाई बन गया। नीतीश कुमार ने बाद में यह राज खोला भी कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे, BJP के दबाव में पद को स्वीकारा।

अब बंगाल में BJP की सरकार नहीं बन पाने से JDU कार्यकर्ताओं के अंदर गजब का संतोष भाव है। यह बाहर से भले नहीं दिख रहा पर आपसी बातचीत में JDU कार्यकर्ता यही बतिया रहे हैं कि इसकी तो आशंका थी ही...। यह और बात है बंगाल चुनाव में JDU के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार, राम तेरी गंगा मैली वाली हिरोइन मंदाकिनी के साथ जीप पर चुनाव प्रचार कर रहे थे। गुलाम रसूल बलियावी जैसे नेता भी एक्टिव थे, लेकिन बड़ा सच यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुनाव प्रचार में पश्चिम बंगाल नहीं गए थे।

दीदी के साथ तालमेल न होने के बावजूद RJD ने समर्थन किया

नेता प्रतिपक्ष और RJD नेता तेजस्वी यादव ने पश्चिम बंगाल जाकर खुद ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उससे पहले पार्टी के दो वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी और श्याम रजक को सीटों के तालमेल के लिए लगाया गया था, लेकिन ममता बनर्जी तैयार नहीं हुई। तेजस्वी यादव ने बिना शर्त, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को समर्थन का ऐलान किया था। यही नहीं, RJD नेताओं ने वहां कंपेनिंग भी की और वहां रह रहे बिहारी वोटर्स को BJP के खिलाफ मोबिलाइज भी किया। तेजस्वी यादव हों, श्याम रजक हों या अब्दुल बारी सिद्दीकी, सभी ने चुनाव से पहले यही कहा था कि बंगाल में उनका एकमात्र मकसद है BJP को रोकना। RJD इसमें सफल हो गई।

बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले CM ममता बनर्जी से मुलाक़ात कर तेजस्वी यादव ने उन्हें बिना शर्त समर्थन दिया था।
बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले CM ममता बनर्जी से मुलाक़ात कर तेजस्वी यादव ने उन्हें बिना शर्त समर्थन दिया था।

प्रवासी बिहारियों ने भी दिखा दी ताकत

पिछले साल जब कोरोना फैला था, तब प्रवासी बिहारियों को आने की अनुमति देने में नीतीश कुमार ने देर की थी। कोटा के बच्चों तक को भूख हड़ताल करनी पड़ी थी। बंगाल में रह रहे प्रवासी बिहारियों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ा था। कहा जा रहा है कि इसका भी बदला बंगाल चुनाव में प्रवासी बिहारियों ने ले लिया।

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