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इसे कहते हैं ऊंट के मुंह में जीरा फोड़न:बिहार में 15 लाख 29 हजार 260 लोगों के हुनर को परखा और काम मात्र 3463 को दिया

पटना3 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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सांकेतिक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

कोरोना संकट में देशभर में लाखों लोगों की नौकरियां चली गईं। देशभर में काम करने वाले बिहारी लोग अपने घर लौट आए। इनमें ज्यादातर लोग परिस्थिति ठीक होने के बाद लौटे। बिहार सरकार ने बाहर से लौटे श्रमिकों और नौकरी से जुड़े लोगों के लिए खुद के स्वरोजगार शुरू करने की योजना लाई। बिहार सरकार ने इसके लिए औधोगिक नवप्रवर्तन योजना चलाकर लोगों की मदद करने की शुरुआत की। बिहार सरकार के श्रम विभाग ने वैसे लोगों की स्किल मैपिंग कराई, जिनके हाथ में हुनर था। श्रम विभाग के आंकड़े के मुताबिक इस साल अप्रैल माह तक 15 लाख 29 हजार 260 लोगों की स्किल्ड मैपिंग कराई गई, जिनके हाथ में कोई ना कोई हुनर है। बिहार सरकार की योजना के मुताबिक सभी को कोई ना कोई स्वरोजगार शुरू करने का मौका देना है, लेकिन इसमें कई तरह के ग्रहण हैं।

एक नहीं, अनेक परेशानियां

जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना का लाभ बिहारभर में अभी मात्र 3463 लोग ही ले रहे हैं। हर जिले में करीब 5 से 6 क्लस्टर में 5 , 10 , 15 या 20 लोग मिलकर अलग -अलग व्यपार कर सकते है, जिनमें गारमेंट, कृषि, फ़ूड प्रोसेसिंग, लेदर, लकड़ी, मशरूम, हनी, हर्ब , टेलरिंग जैसे उद्योग की शुरुआत कर रहे हैं। पिछले साल से शुरू हुई योजना में महज 206 प्रोजेक्ट को ही मंजूरी मिली है। वहीं, ज्यादातर प्रोजेक्ट का प्रोडक्शन शुरू नहीं हुआ है। 15 लाख 29 हजार 260 लोग स्किल्ड हैं, लेकिन अभी तक सरकार की इस योजना का लाभ मात्र 3463 को मिल पाया है यानी अभी लगभग 15 लाख 25 हजार लोगों को लाभ नहीं मिल पाया है।

5 लाख अनुदान की भी योजना

जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना के तहत सरकार कोरोना त्रासदी में बिहार लौटे वैसे स्किल्ड लोगों को 10 लाख रुपए का लोन दे रही है, जिनके हाथ में हुनर है और वे अपना स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं। इस योजना में बहुत लोगों ने जब दिलचस्पी नहीं ली तो सरकार ने इस योजना के साथ-साथ CM उद्यमी योजना की भी शुरुआत की है, जिसका लाभ कोरोना के इस दौर में लोग लाभ उठा सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत उद्योग लगाने के लिए सरकार 10 लाख प्रोत्साहन राशि देगी, जिसमें 5 लाख अनुदान दिया जाएगा। इसे बिहार सरकार ने सात निश्चय दो से भी जोड़ दिया है।

कुछ लोगों ने योजना से संवारा अपना भविष्य
कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बिहार में रहकर सरकार की मदद से खुद का कारोबार खड़ा कर लिया है। बिहारभर में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने सरकरी मदद का लाभ लिया और खुद के साथ-साथ कई लोगों के लिए रोजगार सृजन भी किया। ऐसे ही हैं पुरुषोत्तम कुमार। लॉकडाउन के कारण इनकी नौकरी चली गई। जालंधर में रेडीमेड कपड़े की फैक्टरी में इन्होंने काम सीखा था। नौकरी चई गई तो लौटकर अपने घर आ गए। तभी इनको सरकार के द्वारा चलाई जा रही जिला औधोगिक नवप्रवर्तन योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत इन्होंने 10 लोगों के साथ मिलकर एक क्लस्टर बनाकर सरकार की योजना का लाभ लिया। दिसंबर 2020 में इन्होंने रेडीमेड गारमेंट का व्यापार शुरू किया, जिसमे इन्हें सरकार के द्वारा स्किल मैपिंग कराकर रोजगार के लिए 10 लाख का लोन दिया गया। इनके साथ गुजरात, मुम्बई, दिल्ली, पंजाब से आए लोगों ने क्लस्टर बनाकर काम शुरू किया और आज इनलोगों ने बिहार में दर्जनों लोगों को रोजगार भी दिया है। पुरुषोत्तम बताते हैं कि बिहार के बाहर की कंपनियों में बिहार के कुशल कारीगर हैं और उन्हीं की बदौलत बड़ी-बड़ी कंपनियां चल रही हैं। ऐसे में बाहर काम करने वाले लोग यदि बिहार में आकर अपने हुनर को दिखाएंगे तो घर बैठे ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।

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