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आज के दिन हुई थी शराबबंदी, आज ही खुली पोल:झारखंड से बिहार आता था महुआ, जयगीर के जंगल में रोज बनता था 15 हजार लीटर दारू, 300 गांवों में होती थी सप्लाई

गया5 दिन पहलेलेखक: दीपेश
बाराचट्‌टी के जयगीर जंगल में शराब की भट्‌ठी नष्ट करती पुलिस।
  • बाराचट्‌टी के जयगीर जंगल में नष्ट की गई शराब की फैक्ट्री
  • 25 शराब माफियाओं की टीम बनाती थी देसी दारू
  • 100 लोग रखे गए थे सिर्फ झारखंड से महुआ लाने के लिए

आज ही के दिन बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुई थी। कानून बन गया था बिहार में शराब पीना, बनाना और बेचना अपराध होगा। पकड़े जाने पर जेल और जुर्माना तय होगा, लेकिन आज ही के दिन गया के बाराचट्‌टी के बुमेर और जयगीर जंगल में अवैध शराब निर्माण का बड़ा खुलासा हुआ है। यहां एक साल से अधिक समय से 25 शराब माफिया छिप कर देसी दारू बना रहे थे। पूरे जंगल में इनकी भटि्ठयां चल रही थी। यहां से बाराचट्‌टी, मोहनपुर और डोभी के करीब 300 गांवों में प्रतिदिन 50 लीटर के आसपास देसी शराब की सप्लाई की जाती थी। मोटे तौर पर इसका गणित समझें तो 300x50=15 हजार लीटर दारू रोज बनाया और बेचा जाता था।

10 लाख मूल्य की 1500 लीटर शराब नष्ट
गया जिले के बाराचट्टी के बुमेर जयगीर जंगल में पुलिस ने 10 लाख रुपए की शराब को नष्ट कर दिया। बुमेर और जयगीर के जंगल में बड़ी-बड़ी भटि्ठयां बनाकर एल्मुनियम के बर्तन में शराब तैयार की जाती थी। तस्करों द्वारा महुआ को फूलने के लिए रखे गए कई बर्तन भी मिले। सुरक्षाबलों द्वारा सारे बर्तनों को नष्ट किया गया। शराब भट्‌ठी को भी नष्ट कर दिया गया। वनों के क्षेत्र पदाधिकारी मोहम्मद अफसार ने बताया कि जानकारी मिली थी कि जयगीर बुमेर जंगल के इलाके में बड़े पैमाने पर महुआ से शराब बनाने का धंधा चल रहा है और उसकी सप्लाई आसपास के प्रखंडों में की जा रही है। इसके बाद उत्पाद विभाग की मदद से बड़ी कार्रवाई की गई।

हाथ नहीं लगे माफिया, नहीं तो होता और बड़ा खुलासा
पुलिस की छापेमारी के दौरान शराब माफिया हाथ नहीं लगे। भनक लगते ही सब फरार हो गए। अगर ये पुलिस के हाथ लग जाते तो कई अन्य ठिकानों के बारे में भी बड़ा खुलासा होता। सूत्रों के मुताबिक 25 शराब माफिया अलग-अलग भटि्ठयों पर शराब का अवैध निर्माण से जुड़े थे। इनके अंडर में 25-30 आदमी काम करते थे। कुल मिलाकर काफी बड़े नेटवर्क के जरिए 300 से अधिक गांवों में शराब की सप्लाई होती थी।

सिर्फ महुआ लाने के लिए 100 लोगों की टीम
छापेमारी के दौरान पता चला कि शराब माफियाओं ने 100 लोगों की टीम सिर्फ झारखंड से महुआ लाने के लिए तैयार कर रखी थी। झारखंड से लाए गए महुआ से अपनी भटि्ठयों पर तो शराब बनाते ही थे। कच्चा माल के रूप में महुआ की सप्लाई भी करते थे। पुलिस अब सक्रियता से फरार शराब माफियाओं और इनके अन्य ठिकानों की खोज में जुट गई है।

ऐसे बनती थी महुए से शराब

  • पहले महुआ को पूरी तरह से सुखाया जाता था
  • इसके बाद उन्हें पानी में कुछ दिनों तक भिगोकर रखा जाता था
  • उसके बाद उस बर्तन को आग पर गरम किया जाता था और गरम होने पर जो भाप निकलती थी उसको पाइप के द्वारा दूसरे बर्तन में इकट्ठा किया जाता था
  • भाप ठंडी होने पर लिक्विड फॉर्म में जो मिलता था, वह देसी शराब के रूप में बेची जाती थी

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