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गया में नक्सलियों ने चिपकाया पर्चा:मुठभेड़ को लेकर पत्रकारों पर साधा निशाना, पुलिस की बातों में नहीं आने की दी सलाह, पर्चे की सत्यता की जांच कर रही पुलिस

गया5 दिन पहले
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सांकेतिक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
सांकेतिक तस्वीर।

गया में भाकपा (माओवादी ) मध्य जोन कमेटी ने अब पत्रकारों को भी मुठभेड़ मामलों की खबर को लेकर निशाने पर लिया है। पहली बार नक्सलियों ने ऐसा काम किया है। नक्सलियों का कहना है कि पुलिस की बातों में न आएं और मामलों की जांच कर उजागर करें। नक्सलियों ने पत्रकारों के अलावा बुद्धिजीवियों और डॉक्टरों को भी यही नसीहत दी है।

खास बात यह है कि जिस इमामगंज क्षेत्र में पत्रकारों से संबंधित पर्चा छोड़ा गया है। वहां की पुलिस इस मामले में कुछ भी कहने से फिलहाल बच रही है। इमामगंज पुलिस का कहना है कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर पर्चे की सत्यता की जांच की जा रही है। फिलहाल इस मामले में कुछ भी कहना ठीक नहीं है।

नक्सलियों की ओर से चिपकाया गया पोस्टर।
नक्सलियों की ओर से चिपकाया गया पोस्टर।

नक्सलियों ने चिपकाया पर्चा

नक्सलियों ने जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली पर्चे छोड़े और चस्पा किए जाने का काम अक्सर किया जाता रहा है। इस दौरान जिले के इमामगंज प्रखंड के गोरिया गांव बाजार की दुकानों के बाहर नक्सली पर्चा बीते दिनों चस्पा किया गया। उस पर्चे में नक्सलियों द्वारा कहा गया कि बीती मार्च में अर्द्ध सैनिक बल और पुलिस के साथ नक्सलियों की मुठभेड़ की घटना हुई थी, जो कि गलत है। उस मुठभेड़ में उसके चार साथी मारे गये थे। जिसे नक्सली संगठन खारिज कर रहा है।

पत्रकारों से नक्सल संगठन की अपील

नक्सलियों का कहना है कि उसके साथियों को धोखे के साथ पकड़वाया गया और उनकी बेरहमी से हत्या की गई और फिर उसे मुठभेड़ दिखा गया। हालांकि इस बात को नक्सली बीते मार्च से ही पर्चा के माध्यम से कहते चले आ रहे हैं। लेकिन इस बार नक्सलियों के पर्चे ने एक नए मोड़ पर लाकर सोचने को खड़ा कर दिया है। इस बार नक्सलियों ने पत्रकारों को भी नसीहतें दी है।

पत्रकारों से संगठन ने अपील की है कि मुठभेड़ की घटनाओं से जुड़ी पुलिस की बातें, तर्क व साक्ष्य को पीड़ित परिवार के घर जाकर जांच पड़ताल कर उजागर करें। इस काम के लिए उसने जिले के बुद्धिजीवियों और डॉक्टरों को भी नसीहतें दी है। संगठन में मौजूद विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि पत्रकार पुलिस की भाषा लिख रहे हैं, जो कि सच से परे है। यही वजह है कि पत्रकारों को लेकर संगठन के पदाधिकारी खफा भी हैं।

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