• Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Bihar News; 100+ Vials Of Covishield Found In Munger Sadar Hospital, Each Vial Had 2 To 3 Doses Of Vaccine

वैक्सीन की ऐसी बर्बादी देखी नहीं होगी कहीं:मुंगेर सदर अस्पताल में कोवीशील्ड की 100+ वायल फेंकी मिली, हर वायल में थी 2 से 3 डोज की वैक्सीन

मुंगेर/पटना4 महीने पहले
सदर अस्पताल में फेंकी पड़ी कोवीशील्ड वैक्सीन की वायल।

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में रात दिन एक कर वैज्ञानिकों ने जिस वैक्सीन का ईजाद किया उसे बिहार में बर्बाद किया जा रहा है। एक वायल में 10 डोज होती है, लेकिन 7 से 8 लोगों को टीका लगाकर बाकी बची वैक्सीन फेंक दी जा रही है। यह गंभीर मामला सामने आया है दैनिक भास्कर की पड़ताल में। मुंगेर सदर अस्पताल में 100 से अधिक वायल फेंकी मिली है, जिसमें 2 से 3 डोज और किसी किसी में 50% डोज थे। वैक्सीन की बर्बादी को लेकर भारत सरकार ने कई बार चेताया, लेकिन मनमानी पर अंकुश नहीं लगा।

कई ऐसी शीशी थी, जिसमें आधे से अधिक वैक्सीन थी और उसे खुले में फेंक दिया गया था।
कई ऐसी शीशी थी, जिसमें आधे से अधिक वैक्सीन थी और उसे खुले में फेंक दिया गया था।

VIP के लिए खोल दी जाती है शीशी, 7 डोज का इस्तेमाल

वैक्सीन की हर शीशी में 10 लोगों की डोज होती है। भारत सरकार ने वैक्सीन की बर्बादी रोकने के लिए 10 लोगों के एक साथ आने पर शीशी खोलने का निर्देश दिया है, क्योंकि शीशी खुलने के 4 घंटे बाद वैक्सीन खराब हो जाती है। इसके बाद भी बिहार में VIP के लिए शीशी खुल जाती है।

अफसरों का कहना है कि VIP के आने पर रोक नहीं सकते हैं। सदर अस्पताल में जिला प्रतिरक्षण कार्यालय के पीछे फेंकी गई कोवीशील्ड की 100 से अधिक वायल ऐसी थी, जिसमें 2 से 3 डोज की वैक्सीन थी। कई ऐसी शीशी थी, जिसमें आधे से अधिक वैक्सीन थी और उसे खुले में फेंक दिया गया था। इससे दो से ढाई सौ लोगों को कोरोना की लड़ाई में सुरक्षित किया जा सकता था।

पूरे बिहार में बर्बादी का चल रहा खेल

वैक्सीन की बर्बादी के साथ इसकी शीशी को सुरक्षित नष्ट करने में लापरवाही का खेल पूरे प्रदेश में चल रहा है। पटना में भी वैक्सीनेशन सेंटर पर वैक्सीन की खाली शीशी को खुले में फेंका जा रहा है। इसमें भी दवाएं होती हैं, जिसका उपयोग नहीं किया जाता है। वैक्सीन की एक-एक डोज के लिए मारामारी हो रही है और दूसरी तरफ हर वायल में 2 से 3 डोज बर्बाद हो रही है।

पटना के गर्दनीबाग और एएन कॉलेज के साथ लगभग सभी सेंटरों पर मैनेजमेंट में कमी के कारण वैक्सीन की बर्बादी हो रही है। किसी सेंटर पर यह हिसाब नहीं रखा जाता है कि कितनी वायल खुली है और कितने लोगों को डोज दिया गया है। इस पर अगर काम होता और मनमानी करने वालों पर शिकंजा लगाया जाता तो ऐसा नहीं होता।

DIO डॉ पंकज सागर तो अनजान बनकर बोले कि उन्हें जानकारी ही नहीं है
DIO डॉ पंकज सागर तो अनजान बनकर बोले कि उन्हें जानकारी ही नहीं है

मुंगेर सदर अस्पताल के खेल ने खोला राज

मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार आलोक का कहना है कि नियम है कि बची हुई वैक्सीन को सेफ स्टोर में रखना है। खाली शीशी को सुरक्षित तरीके से नष्ट करना होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। भागलपुर से मेडिकल वेस्ट को सुरक्षित नष्ट करने वाली एजेंसी की टीम आती है और खाली शीशी ले जाती है। DIO डॉ पंकज सागर तो ऐसे मामले से अनजान बन गए और पूछने पर बोले कि उन्हें जानकारी ही नहीं है।

हालांकि जांच की बात कहकर वह दोषियों पर कार्रवाई की भी बात कर रहे हैं। भास्कर की पड़ताल में वायलों में करीब 120 से अधिक ऐसी डिस्कार्ड कोरोना वैक्सीन मिली है, जिसमें किसी में एक तो किसी में एक तो किसी में 5 से 6 डोज की दवा बची हुई थी। अगर आंकड़ों के अनुपात की बात करें 120 वैक्सीन के डिस्कार्ट में 2 डोज भी शेष बचे हैं तो वैक्सीन के 240 डोज महज मनमानी से बर्बाद हो रहे हैं।

कोरोना के वैक्सीन को लेकर यह है नियम

  • वैक्सीन की वायल तभी खोली जाए जब एक साथ 10 लोगों टीका लेने वाले हों।
  • हर वायल को खोलने से पहले कोड डाला जाता है और फिर इसे सुरक्षित रखा जाता है।
  • वायल में अगर डोज बच जाती है तो उसे और सुरक्षित रखना होता है।
  • वैक्सीन का इस्तेमाल होने के बाद वैक्सीन को सुरक्षित नष्ट कराना होता है।
  • वैक्सीन को सुरक्षित नष्ट कराने की जिम्मेदारी DIO की होती है।
  • अगर वैक्सीन खुले में फेंका जा रहा है या डोज बर्बाद हो रही है तो DIO जिम्मेदार हैं।
खबरें और भी हैं...