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पहली बार ब्लैक एंड व्हाइट फंगस एक साथ:पटना IGIMS के डॉक्टरों ने सर्जरी कर बचाई दो मरीजों की जान, डॉक्टर बोले- ब्लैक से कम खतरनाक है व्हाइट फंगस

पटना3 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा
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IGIMS के डॉक्टरों की टीम एक साथ मिले ब्लैक एंड व्हाइट फंगस को स्टडी कर रहा है। - Dainik Bhaskar
IGIMS के डॉक्टरों की टीम एक साथ मिले ब्लैक एंड व्हाइट फंगस को स्टडी कर रहा है।

बिहार में पहली बार दो मरीजों में ब्लैक और व्हाइट फंगस एक साथ मिले हैं। दोनों संक्रमित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में भर्ती हैं। डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी से दोनों मरीजों के शरीर से फंगस को अलग कर दिया है। दोनों मरीज अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। अब संस्थान एक साथ मिले ब्लैक एंड व्हाइट फंगस की स्टडी कर रही है।

IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल का कहना है कि डॉक्टरों की टीम ब्लैक फंगस में काफी बेहतर काम कर रही है।

डॉक्टरों को कर दिया हैरान

IGIMS में पहली बार ऐसा मामला आया है जब एक ही मरीज में ब्लैक एंड व्हाइट फंगस साथ-साथ मिले हैं। दोनों मरीजों को संस्थान में भर्ती किया गया था। जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि भी हो गई। ऑपरेशन से पहले जब डॉक्टरों की टीम ने काफी बारीकी से परीक्षण किया तो चौंकाने वाला मामला सामने आया।

ब्लैक के साथ व्हाइट फंगस साथ-साथ साइनस में था। दो ऐसे मरीज कुछ दिन के अंतर पर भर्ती हुए हैं, जिसमें ब्लैक के साथ व्हाइट फंगस का संक्रमण एक साथ पाया गया है। डॉक्टरों के लिए यह नया मामला था। ऑपरेशन के बाद सैंपल को जांच के लिए भेजकर टीम स्टडी में जुटी है।

एक साथ जाल बनाए थे फंगस

IGIMS के ENT के HOD डॉ. राकेश सिंह और उनकी टीम में शामिल डॉक्टरों ने बताया कि दोनों मरीजों में यह संक्रमण नाक से आगे बढ़कर साइनस में जाल बना चुका था। आंख और नाक के बीच दोनों फंगस जाल बना चुके थे। दोनों के साइनस से दोनों तरह के फंगस के जाल को सर्जरी से निकला गया है।

व्हाइट से ज्यादा खतरनाक ब्लैक फंगस

IGIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मनीष मंडल का कहना है कि ब्लैक फंगस व्हाइट फंगस से अधिक खतरनाक होता है। ब्लैक फंगस जानलेवा होता है। हालांकि, ह्वाइट फंगस भी नाक के रास्ते साइनस या ब्रेन तक जाता है तो जानलेवा हो जाता है।

IGIMS के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. संजीत का कहना है कि व्हाइट फंगस बाहरी स्किन पर होता है और यह ब्लैक फंगस की तरह खतरनाक नहीं होता है। लेकिन साइनस में अगर दोनों फंगस है तो कई गुणा अधिक खतरनाक हो जाते हैं। ब्लैक फंगस खून में फैलता है, यह कैंसर की तरह होता है। इस कारण से ब्लैक फंगस ज्यादा ही खतरनाक होता है।

डॉ. संजीत का कहना है कि दो मरीजाें में ब्लैक एंड व्हाइट फंगस एक साथ मिले हैं। पहली बार ऐसा देखा गया है। दोनों मरीजों की सर्जरी के कल्चर जांच के लिए सैंपल भेजा गया है। टीम स्टडी कर रही है कि एक साथ ब्लैक और व्हाइट फंगस कैसे आया। जांच और स्टडी के बाद ही फंगस के बारे में कुछ स्पष्ट कहा जा सकता है।

फंगस के जटिल संक्रमण की सर्जरी में रिकॉर्ड

ENT के HOD डॉ. राकेश सिंह और उनकी टीम में शामिल डॉक्टरों ने बताया कि संक्रमितों में जटिल से जटिल स्थिति को सर्जरी से ठीक किया जा रहा है। नाक के रास्ते ब्रेन की सर्जी से लेकर साइनस और आंख तक पहुंचे साइनस को निकाला जा रहा है। इसमें संक्रमण के स्टेज के आधार पर सर्जरी के लिए विभागों को शामिल किया जाता है।

स्टेज वन में ENT और स्टेज टू में ENT के साथ EYE और स्टेज 3 में ENT और EYE के साथ न्यूरो व अन्य विभाग के एक्सपर्ट की टीम को साथ लेकर सर्जरी की जाती है। ब्लैक फंगस के बेहतर इलाज के लिए संस्थान के निदेशक डॉ. एन आर विश्वास ने भी पूरी टीम को बधाई दी है।

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