गंगा में होगा AC क्रूज का सफर, VIDEO:कोरोनाकाल में पटना के प्रणव शाही ने क्रूज बोट बनाया; खिड़कियों से गंगा और सनसेट की खूबसूरती दिखती है

पटनाएक महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
तीन घंटे के लिए इसे आप हायर करते हैं तो आपको चुकाने होंगे 12 हजार रुपए।

पटना में सन सेट की खूबसूरती देखना हो तो गंगा किनारे से देखिए। अब आप रिवर क्रूजर बोट से चाय-कॉफी पीते हुए अपनी यह इच्छा पूरी कर सकते हैं। रिवर क्रूजर बोट पर सवार होकर आप पटना का ग्लोरियस स्पॉट भी घाट किनारे से देख सकते हैं। पटना के प्रणव शाही ने एक साथ 70- 80 लोगों को गंगा की सैर कराने वाला एयरकंडिशन्ड क्रूजर पार्टी बोट तैयार किया है। ्रइस खूबसूरत बोट का नाम उन्होंने एमवी अल्फा रखा है। तीन घंटे के लिए इसे आप हायर करते हैं तो आपको 12 हजार रुपए चुकाने होंगे।

शाही ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई नहीं की है, लेकिन अपने पैशन की वजह से इन्होंने यह खूबसूरत बोट बनाई है। प्रणव, मगध मोटर्स स्पोर्ट्स क्लब के प्रेसीडेंट हैं और ऑटोमोबाइल्स में खासी रुचि रखते हैं। बोट बनाने की बाकी तकनीक उन्होंने किताबें पढ़कर या गूगल से सीखीं। वह बताते हैं- 'इसे किसी कंपनी से खरीदेंगे तो 50 लाख रुपए से कम नहीं लगेगा, लेकिन इस पर मुश्किल से 20-25 लाख का खर्च आया है।'

कोरोना के समय जब उनकी बाहरी गतिविधियां कम थीं तब उस समय का इस्तेमाल इन्होंने इसे तैयार करने में लगाया। वह बताते हैं- 'इसे तैयार करने में लगभग छह माह का समय लगा। इससे पहले 30 सीट वाला एमवी फॉक्स भी तैयार किया था। बोट पर अपने पुश्तैनी बोट की तस्वीरें भी लगाई हैं। एमवी अल्फा में एयरकंडिशन हॉल है, जहां खिड़कियों से गंगा और सनसेट की खूबसूरती दिखती है। रात के समय खूबसूरत लाइटिंग के बीच इन खिड़कियों से गंगा को निहारने का आनंद कुछ और ही है।'

डिजाइन खुद बनाया

प्रणव बताते हैं- 'कोलकाता से फेब्रिकेटर मंगवाकर एमवी अल्फा क्रूजर बनवाया है। पूरी डिजाइन खुद तैयार की है। इसमें सोलर पैनल लगाया है। भोजन बनाने के लिए किचन है और एक टॉयलेट भी। जेनरेटर की भी व्यवस्था है। सरकार की ओर से गंगा विहार करने के लिए एमवी गंगा विहार बोट है, लेकिन इसे सरकार नियमित रूप से नहीं चला पा रही।' दूसरी तरफ प्रणव शाही अपने व्यक्तिगत प्रयास से यह बोट चलाने जा रहे हैं।

एक माह में शुरू हो जाएगा

अभी गंगा में बाढ़ की वजह से बोटिंग पर रोक है, लेकिन जैसे ही सरकार की ओर से परमिशन मिलेगा यह बोट चलने लगेगा। प्रणव बताते हैं- 'रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई किया है, जो इस माह तक मिल जाएगा। यह स्टील का बना है इसलिए पानी के लिकेज की आशंका नहीं है। चार फीट डेफ्थ तक है। इसलिए काफी सेफ है। लाइफ जैकेट, लाइफ गार्ड भी इसमें होंगे।'

NIT घाट से प्राइवेट लोगों को भी बोटिंग की सुविधा दे सरकार

प्रणव कहते हैं- 'गंगा पार्थिंग और लाइटिंग को देखना है तो यह बेहतर मौका है। सरकार NIT घाट से बोटिंग की सुविधा प्राइवेट लोगों को भी दे दे तो बेहतर होगा। NIT घाट से हरिहरनाथ मंदिर तक की यात्रा लोगों को कराई जा सकती है। कोलाकाता में 200 क्रूज चल रहे हैं। उसी तरह पटना में भी इसे डेवलप किया जाए तो लोगों को पाटलिपुत्र को भी समझने में मदद मिलेगी और गंगा की चौड़ाई का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा।'

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