खनन अधिकारी या माफिया!:संजय कुमार ने बालू के अवैध खेल में शामिल होकर इनकम से 51% ज्यादा संपत्ति बनाई, पत्नी के नाम से 17 अकाउंट मिले, दुकानें भी हैं

पटना20 दिन पहले
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छापेमारी के दौरान घर के बाहर तैनात STF जवान। - Dainik Bhaskar
छापेमारी के दौरान घर के बाहर तैनात STF जवान।

बालू के अवैध खनन और इसके गोरखधंधे में बिहार के खनन विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर (मुख्यालय) संजय कुमार भी शामिल थे। सरकारी नौकरी में रहते हुए इन्होंने अपने पद का खूब दुरुपयोग किया। काली कमाई के जरिए फ्लैट और दुकान खरीदे। बुधवार को इनके दो ठिकानों पर आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने रेड कर दी। पटना के आर्य कुमार रोड में इनका घर है। साथ में यहीं पर एक मेडिकल शॉप भी है। दूसरा ठिकाना खेतान मार्केट में खुशी लहंगा स्टोर है।

इन सभी जगहों पर बुधवार को EOU के DSP अपनी टीम के साथ पहुंचे। घर और दुकान की तलाशी ली। इससे पहले इंटरनल जांच के दौरान EOU ने काफी सारे सबूत इनके खिलाफ पहले ही जुटा लिए थे। मंगलवार को आय से अधिक संपत्ति की FIR नंबर 19/21 दर्ज की गई। फिर कोर्ट से रेड करने के लिए सर्च वारंट हासिल किया गया।

आय से 51% अधिक की मिली संपत्ति

मिली जानकारी के अनुसार, संजय कुमार 12 नवंबर 1987 को सरकारी नौकरी में आए थे। नोएडा में 3 और 1 BHK फ्लैट है। खुशी लहंगा हाउस के नाम से पटना ने खेतान मार्केट में शॉप नम्बर 67/72 इन्हीं का है। पत्नी के नाम से ICICI और HDFC समेत कई बैंकों में कुल 17 अकाउंट मिले। इनमें 16 सेविंग्स तो 1 करंट अकाउंट है। सभी को मिलाकर 1.58 करोड़ रुपए जमा मिले। 66.65 लाख रुपया LIC समेत कई जगहों पर इन्वेस्ट किये गए हैं। सरकारी सैलरी से 51 प्रतिशत अधिक 1.29 करोड़ से अधिक की चल-अचल संपत्ति अर्जित की गई है।

ADG नैयर हसनैन खान के अनुसार, कई घंटों तक चली रेड की कार्रवाई का बाद यह सब जानकारियां सामने आई हैं। बालू माफिया के साथ देने और इस अवैध खेल में शामिल संजय कुमार 7वें सरकारी अफसर हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई चल रही है।

अब तक इनके खिलाफ हुई कार्रवाई

बालू के खेल में शामिल प्रशासनिक और पुलिस के 6 अफसर-कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। सबसे पहले डिहरी के SDM सुनील सिंह के खिलाफ पटना से लेकर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर तक छापेमारी हुई थी। इनके पास सरकारी सैलरी से 77 प्रतिशत अधिक की चल-अचल संपत्ति मिली थी। दूसरी कार्रवाई पालीगंज के सस्पेंडेट SDPO तनवीर अहमद के ऊपर हुई थी। छापेमारी के दौरान इनके पास से सरकारी सैलरी से 39 प्रतिशत अधिक चल अचल संपत्ति मिली थी। तीसरी कार्रवाई भोजपुर के सस्पेंड SDPO पर हुई। इनके पास से 73 प्रतिशत अधिक चल-अचल संपत्ति मिली थी।

भोजपुर के ही MVI पर हुई थी कार्रवाई

चौथी कार्रवाई भोजपुर के ही MVI पर हुई थी। इनके पास 154 प्रतिशत अधिक की संपत्ति मिली। पांचवीं कार्रवाई IPS और भोजपुर के पूर्व SP राकेश कुमार दुबे के ऊपर हुई। इनके पास से 90 प्रतिशत अधिक मिली। इनके बाद छठी कार्रवाई बिहार पुलिस के सिपाही और बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष पर हुई थी। इनके पास से 544 प्रतिशत अधिक की संपत्ति मिली थी। पुलिस मुख्यालय पहले भी साफ कर चुका है कि इस तरह के और भी अफसर और कर्मचारी हैं, जो आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। वैसे सभी अफसर और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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