जनता दरबार में शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले अधिक:एक छात्र स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड को लेकर CM से उलझा, नीतीश बोले- छात्रों की परेशानी दूर कीजिए

पटना5 महीने पहले
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जनता दरबार में फरियाद सुनते CM नीतीश कुमार। - Dainik Bhaskar
जनता दरबार में फरियाद सुनते CM नीतीश कुमार।

CM नीतीश कुमार जनता के दरबार में लोगों की समस्या सुन रहे है। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, वित्त और श्रम संसाधन विभाग से जुड़े मामलों की सुनवाई हो रही है। CM संबंधित विभागों को जरूरी निर्देश भी दे रहे है। आज जनता के दरबार में कोरोना से मौत के बाद मुआवजा नहीं मिलने के कई मामले सामने आए। जिस पर सीएम नीतीश ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि कैसे चूक हो जा रही है। एक मृतका के पति ने जनता दरबार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से फरियाद की। मृतका आंगनबाड़ी सेविका है। अक्टूबर 2020 में उसकी कोरोना से मौत हो गयी थी।

जनता दरबार में गोपालगंज के एक छात्र ने कहा कि उसे स्‍टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। छात्र का कहना था कि पाटलिपुत्र विश्‍वविद्यालय में उसका तीन साल का कोर्स छह साल में भी पूरा नहीं हुआ। अधिकारी कहते हैं कि तुम्‍हें मुख्‍यमंत्री की वजह से ही योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इस पर मुख्‍यमंत्री ने कहा कि मैं तुम्‍हें अधिकारी के पास भेजता हूं, वे सारी बात समझ लेंगे। लेकिन इसके बाद भी छात्र अपनी बात बोलता ही जा रहा था। इस पर मुख्‍यमंत्री झल्‍ला गए। वे बोले- प्रवचन देने लगता है सब। हालांकि इसके तुरंत बाद उन्‍होंने अधिकारी को कहा कि इन शिकायतों को गंभीरता से सुनिए और छात्रों की परेशानी दूर कीजिए।

CM नीतीश कुमार ने बिहार में आंगनबाड़ी सेविका की बहाली में अनियमितता को लेकर अधिकारियों की क्लास ली। CM ने जनता दरबार के दौरान एक मामले की सुनवाई करते ही अधिकारी को फोन किया और अधिकारी से पूछा कि भाई आंगनबाड़ी सेविका बहाली में अनियमितता के बहुत मामले आ रहे हैं, ऐसे क्यों? उन्होंने इसको लेकर अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भी निर्देश दिए।

वहीं, मुख्यमंत्री के जनता दरबार में एक शख्स ने भगवानपुर प्रखंड में हुई शिक्षक बहाली में बड़े फर्जीवाड़े की पोल खोल कर रख दी है। प्रखंड के मुंदीपुर गांव के रहने वाले इस व्यक्ति ने यह आरोप लगाया है कि प्रखंड के शंकरपुर पंचायत में शिक्षक नियोजन में प्रवीण कुमार नाम के एक व्यक्ति ने नियोजन इकाई से मिली भगत करके 2016 में 2006 के पैनल में आवेदन पंजी, मेधा सूचि और काउंसिलिंग रजिस्टर में अपना नाम प्रविष्ट करा लिया है। जबकि वह 2006 के पैनल में आवेदक नहीं था। उन्होंने यह दावा किया कि जांच के क्रम में वो इस बात को साबित कर देंगे। इस पर CM नीतीश कुमार ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया और जांच कराने की बात कही।

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