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JDU-HAM की जमानत भी नहीं बची:पश्चिम बंगाल के चुनाव में गए थे राष्ट्रीय दल बनने, जमानत भी नहीं बचा पाए, HAM ने एक भी सीट हजार वोट नहीं पाए

पटना7 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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जीतन राम मांझी की पार्टी  HAM का दावा है कि दमखम से लड़े थे लेकिन जनता ने समर्थन नहीं दिया। - Dainik Bhaskar
जीतन राम मांझी की पार्टी HAM का दावा है कि दमखम से लड़े थे लेकिन जनता ने समर्थन नहीं दिया।

कहते हैं, राजनीतिक महत्वाकांक्षा कभी कम नहीं होती है। ऐसी ही महत्वाकांक्षा को पाले JDU और HAM ने पश्चिम बंगाल के चुनाव में ताल ठोक दिया था। JDU ने तो शुरूआती दौर में 75 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बनाया था। लेकिन, चुनाव आते-आते 45 उम्मीदवारों को ही JDU ने मैदान में उतारा। 45 सीटों पर JDU को करारी हार मिली। यहां तक कि JDU किसी सीट पर जमानत भी नहीं बचा पाया। वहीं, जीतन राम मांझी की पार्टी HAM ने 26 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी उम्मीदवार 1000 वोट का आंकड़ा पार नहीं कर पाया।

JDU उम्मीदवार को सबसे ज्यादा 1484 वोट मिले

JDU पश्चिम बंगाल और असम में इस उम्मीद उतरा था कि दोनों राज्यों में प्रदर्शन बेहतर होगा और राष्ट्रीय पार्टी बनाने का सपना भी पूरा होगा। लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो 1 फीसदी वोट भी JDU के खाते में नहीं आया। JDU को 0.02 फीसदी वोट से ही संतोष करना पड़ा। चौरंगी सीट से उम्मीदवार अनिल सिंह को सबसे कम 81 वोट, जमुरिया से गौरीशंकर बनर्जी को सबसे ज्यादा 1484 वोट मिले।

JDU को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाने की कोशिश लंबे समय से की जा रही है। JDU कई राज्यों में चुनाव लड़ चुका है। इस बार पश्चिम बंगाल में भी इस मिशन के तहत पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। लेकिन, वहां कई सीटों पर पार्टी को प्रत्याशी नहीं मिले और जहां उम्मीदवार मैदान में उतरे, वहां उनकी जमानत भी नहीं बची। उन्हें जो वोट हासिल हुए उससे पार्टी नेताओं के दावों की पोल खुल गई है।

HAM उम्मीदवार को सबसे ज्यादा 893 वोट मिले

HAM की बात करें तो उसे आधे दर्जन से कम सीटों के लिए उम्मीदवार मिले थे। इनमें हावड़ा उत्तर से HAM उम्मीदवार अशोक कुमार वर्मा को सबसे कम 251 वोट मिले, वही नवदा से वसीम अकरम को सबसे ज्यादा 893 वोट मिले। HAM के किसी उम्मीदवार ने हजार का भी आंकड़ा पार नहीं किया। HAM पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में हम दमखम से लड़े थे। लेकिन वहां की जनता ने हमारी पार्टी को समर्थन नहीं दिया। वहां की लड़ाई दो ध्रूवों में बंट गई थी।