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जातीय जनगणना पर JDU-RJD साथ-साथ!:जनगणना कराने की मांग पर JDU की सख्ती बढ़ रही, RJD के तेवर तल्ख हैं; अलग-थलग पड़ती जा रही BJP

पटना4 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद
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महंगाई और जातीय जणगनना के सवाल पर JDU और RJD एक मंच पर आ गईं तो बिहार की राजनीति बदलने लगेगी। - Dainik Bhaskar
महंगाई और जातीय जणगनना के सवाल पर JDU और RJD एक मंच पर आ गईं तो बिहार की राजनीति बदलने लगेगी।

बिहार की राजनीति में दिनों बाद ऐसा हुआ है कि RJD- JDU किसी मुद्दे पर एकमत हैं। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार जातीय जनगणना कराने पर एकमत रहे हैं। अब जब केन्द्र सरकार ने कहा कि वह सिर्फ अनुसूचित जाति और जनजाति की जनगणना ही कराएगी तो फिर से RJD- JDU ने अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है। इतिहास में जाएं तो बिहार विधान मंडल में तीन ऐसे बड़े मुद्दे आए जिस पर सभी दलों की आम सहमति रही। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, पूर्ण शराबबंदी और जातीय जनगणना। लेकिन केन्द्र की BJP सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दे रही और नीतीश कुमार लगातार मांग रहे। पूर्ण शराबबंदी पर कांग्रेस और RJD पार्टियां संशोधन की मांग कर रही हैं और जातीय जनगणना पर सबसे दिलचस्प स्थिति हो गई है बिहार की राजनीति की।

हिजड़ों की गिनती हो सकती है पिछड़ों की नहीं?- JDU

JDU नेता गुलाम गौस ने केन्द्र सरकार से मांग कर दी है कि वह जातीय जनगणना की उपेक्षा न करे। इससे जनता में गलत संदेश जाएगा और पिछड़ी जातियों में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। वर्तमान केन्द्र सरकार कांग्रेस की भूल को न अपनाए। गौस ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे देश में हिजड़ों की गिनती तो हो सकती है परन्तु पिछड़ों की नहीं? उनके इस बयान के बाद BJP के साथ JDU की तल्खियत बढ़ने के आसार हैं।

BJP और JDU के बीच जातीय जनगणना को लेकर अलग-अलग चाल है। JDU चाहती है कि जातीय जनगणना हो। ठीक उसी तरह जैसे कि RJD जातीय जनगणना चाह रही है। BJP इस मामले में अलग-थलग पड़ती जा रही है दूसरी तरफ JDU और RJD के मिले हुए सुर दोनों पार्टियों को अभी वैचारिक रुप से एक मंच पर लाए हुए है। विचारों का यह मिलन कहीं BJP के लिए महंगा न पड़ जाए इसका भी कयास लगाया जाने लगा है।

महंगाई के सवाल पर और जातीय जनगणना पर नीतीश की राय केन्द्र से अलग

नीतीश कुमार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत पर यह बयान देकर सबको चौंका चुके हैं कि ईमानदारी से कहूं तो मैंने इस पर अभी विचार नहीं किया है, पर इस पर मैं विचार करूंगा कि क्या किया जा सकता है। BJP ने विधान सभा चुनाव में किस तरह से JDU को गच्चा दिया यह सबको मालूम है। नीतीश कुमार को तब कहना पड़ा था कि वे समझ ही नहीं पाए कि कौन उनका अपना है कौन पराया! महंगाई के सवाल पर और जातीय जनगणना के सवाल पर JDU और RJD एक मंच पर आ गईं तो बिहार की राजनीति बदलने लगेगी।

सरकार के अंदर और घटक दलों के बीच अंतर्विरोध- RJD

RJD के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि जातीय जनगणना पर दो बार बिहार विधान मंडल से सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित हो चुका है जिसमें BJP भी शामिल थी। केन्द्र सरकार में JDU भी शामिल है और उसकी बात BJP नहीं मान रही। सरकार के अंदर और घटक दलों के बीच ही महत्वपूर्ण मसलों पर इतना बड़ा अंतर्विरोध है तो फिर ऐसे में सरकार भले ही चल सकती है पर कोई काम नहीं हो सकता।

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