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बेऊर जेल के बाहर पिता से लिपटकर रोया:छह आतंकियों को ऑटो से बस स्टैंड पहुंचाया था, अगले दिन अखबार देख सन्न हो गया

पटना7 महीने पहले
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पटना के गांधी मैदान सीरियल ब्लास्ट मामले में सात साल की सजा पाने वाला रांची का मो. इफ्तिखार आज बेऊर जेल से रिहा हो गया। 27 साल के इफ्तिखार की सजा की मियाद एक नवंबर को सजा सुनाए जाने के पहले ही पूरी हो गई थी। आज चार नवंबर को दोपहर 1:05 पर इफ्तिखार को बेउर जेल से रिहा कर दिया गया।

रिहाई के तुरंत बाद ही भास्कर ने इफ्तिखार से बात की तो उसका दर्द छलक उठा। आगे पढ़िए 27 अक्टूबर 2013 को हुए ब्लास्ट के एक दिन पहले से आज रिहाई तक की कहानी। बातचीत के क्रम में भी इफ्तिखार की आंखें डबडबायी रहीं।

रिहाई के बाद अपने भतीजे और पिता के साथ इफ्तिखार।
रिहाई के बाद अपने भतीजे और पिता के साथ इफ्तिखार।

इफ्तिखार ने बताया कि उसके यहां गरीबी का आलम यह है कि पिता मोहम्मद मुस्तफा सड़क किनारे चाय बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। तीन भाइयों में सबसे छोटा इफ्तिखार आलम ऑटो चलाया करता था। बताता है कि उसे वह दिन आज भी याद है, जब उसके ऑटो पर हैदर अली, इम्तियाज सहित 6 लोग बैठे थे और रांची बस स्टैंड पहुंचाने को कहा था।

उसे इस बात की तनिक भी भनक नहीं थी कि ऑटो पर बैठकर जाने वाले सभी लोग किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने पटना जा रहे हैं। दूसरे दिन जैसे ही पटना के गांधी मैदान में ब्लास्ट की सूचना अखबार के माध्यम से सुनी तो पैरों तले जमीन खिसक गई।

जिस वक्त उसे NIA के द्वारा गिरफ्तार किया गया था, उसका एक बेटा 6 माह का और एक बेटी डेढ़ वर्ष की थी। उसके जेल जाने के बाद एकमात्र बहन इस कदर गम में डूब गई कि बाद में देहांत हो गया। जेल से छूटने के बाद अब वह फिर से अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करेगा। अपनी पत्नी और बच्चों को हर हाल में खुश रखने की कोशिश करेगा।

बातचीत के क्रम में मोहम्मद इफ्तिखार ने बताया कि NIA अधिकारियों के किए जुल्मों को वह कभी भूल नहीं सकता है। उसपर कई बार आतंकियों वाले जुर्म कबूल करने का भी दबाव डाला गया। जब उसने ऐसा करने से इनकार किया तो बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। अल्लाह, ऐसी सजा किसी को नसीब ना हो।

जेल से निकला तो इंतजार कर रहे थे पिता

7 साल की सजा काटने के बाद बुधवार को कोर्ट में नाजिर रसीद जमा हुई। गुरुवार को जेल से छूटते ही गेट पर इंतजार कर रहे पिता को देखते ही इफ्तिखार उनसे लिपट गया और काफी देर तक रोता रहा। पिता के साथ आए उसके भतीजे और ससुर के भी आंखों से आंसू छलक पड़े।

(बेऊर से ज्ञान शंकर की रिपोर्ट)

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