CBSE की मनमानी पर बिहार में उबाल:वेबसाइट पर नहीं जारी की गई गाइडलाइन, स्टूडेंट्स में बढ़ रहा आक्रोश; प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने कहा- धधक रही मनमानी की आग

पटना4 महीने पहले
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CBSE के कारण कई विद्यालयों के संचालको के ऊपर बच्चों एवं अभिभावकों द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
CBSE के कारण कई विद्यालयों के संचालको के ऊपर बच्चों एवं अभिभावकों द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

रिजल्ट के बाद चल रहे बवाल को लेकर CBSE ने शुक्रवार की शाम 6 बजे तक गाइडलाइन जारी करने की बात कही थी। शनिवार की सुबह तक CBSE ने इस संबंधि में कोई जानकारी नहीं दी है। इससे छात्रों में आक्रोश बढ़ रहा है। प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने तो इसे CBSE की बड़ी मनमानी बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि इससे छात्रों में आक्रोश की आग और बढ़ेगी। क्योंकि CBSE की रिजल्ट से लेकर हर तरह से मनमानी कर रही है।

रिज्ल्ट के बाद से बवाल

प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद का कहना है कि CBSE ने 5 अगस्त को नोटिस जारी किया था और रिजल्ट में असंतोष पर नई गाइडलाइन जारी करने की बाम कही थी। CBSE के मुताबिक शुक्रवार की शाम 6 बजे तक गाइडलाइन जारी हो जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। इससे छात्रों का आक्रोश और बए़ जाएगा। CBSE की गलत नीतियों से बच्चों का 10वीं एवं 12वीं का परिणाम असंतोषजनक रहा है। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि छात्रों में आक्रोश की आग CBSE की मनमानी से भड़की है। अब सारी गलती विद्यालयों पर थोपी जा रही है पर विद्यालयों पर सीबीएसई द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार ही अंक प्रदान करने का दबाव था जिससे अभी आग और भड़कती जा रही है।

CBSE की इस नीति से हो रहा बवाल

  • CBSE बोर्ड द्वारा सभी विद्यालयों को पहले ही विषयवार अंक प्रदान कर उनके अधिकार को सीमित कर दिया गया।
  • इससे सभी विद्यालयों को CBSE अंत मापदंड पर ही प्रदान करने पड़े और अंततः ऐसा किया गया।
  • तय किए गए मानदंड जो कि विगत 3 वर्षों पर आधारित था अलग-अलग था।
  • अब अगर उपरोक्त विवरण के आधार पर ही विद्यालयों अंक प्रदान करने थे तो विद्यालय कैसे कम या ज्यादा अंक दे सकते थे
  • CBSE के द्वारा एक तय संख्या में बच्चों को उत्तरीय अनुसार नियमित विद्यालय ने ऐसा किया।
  • अब अगर छात्रों की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया गया तो इसका संपूर्ण दोष CBSE पर ही जाता है ना कि विद्यालय पर।
  • जिन संबंधित विद्यालयों का पिछले 3 वर्षों का प्रदर्शन बेहतर था उनके भी अंक कम किए गए।
  • अगर बोर्ड द्वारा प्रदान किए गए अंको से विद्यालयों ने 2 अंक भी अधिक दिए तो भी बोर्ड के द्वारा उसे अमान्य कर दिया गया। बोर्ड द्वारा बार-बार अंक कम करवाया गया या किया गया।

CBSE को ठहराया जिम्मेदार

एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने कहा कि CBSE के कारण कई विद्यालयों के संचालको के ऊपर बच्चों एवं अभिभावकों द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है कई विद्यालयों में तोड़फोड़ हंगामा हो रहा है। एसोसिएशन CBSE से मांग करता है कि बच्चों का रिजल्ट ठीक किया जाए जिससे आंदोलन की आग शांत हो जाए। शमायल अहमद ने CBSE के चेयरमैन से मांग किया है कि जल्द से जल्द 10वीं एवं 12वीं के बच्चों को 85% से ऊपर मार्क्स देकर उन बच्चों को मानसिक तौर पर बीमार होने से बचाएं अन्यथा किसी बच्चे के साथ कोई घटना दुर्घटना होती है एवं स्कूल संचालकों के साथ भी कोई घटना दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेवारी CBSE की होगी।

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