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अब यहां खिलाड़ी नहीं, मरीज दिखेंगे:पाटलिपुत्रा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में कोरोना मरीजों के लिए तैयार हो रहे 100 बेड, 48 घंटे में बिहार को मिलेगा पहला अस्थाई अस्पताल

पटना9 महीने पहले
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काम्प्लेक्स के इनडोर स्टेडियम में तैयार हो रहा है 100 बेड का अस्थाई अस्पताल। - Dainik Bhaskar
काम्प्लेक्स के इनडोर स्टेडियम में तैयार हो रहा है 100 बेड का अस्थाई अस्पताल।

कोरोना के मरीजों की बढ़ती तादाद के बीच स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी पटना के कंकड़बाग स्थित पाटलिपुत्रा खेल परिसर को अस्थाई अस्पताल में बदलने का फैसला लिया है। खेल परिसर के इनडोर स्टेडियम में 100 बेड का अस्थाई अस्पताल तैयार करवाया जा रहा है। पिछले साल भी कोरोना के मामले बढ़ने के बाद सरकार ने इस खेल परिसर में अस्थाई अस्पताल बनाया था।

इसमें मरीजों के लिए ऑक्सीजन-दवा की व्यवस्था रहेगी।
इसमें मरीजों के लिए ऑक्सीजन-दवा की व्यवस्था रहेगी।

डॉक्टरों की तैनाती पर स्थिति स्पष्ट नहीं

विभाग का दावा है कि 48 घंटों में 100 बेड के इस अस्थाई अस्पताल को तैयार कर लिया जाएगा। इसमें मरीजों के लिए ऑक्सीजन के साथ ही दवाओं की भी व्यवस्था रहेगी। हालांकि यहां कितने डॉक्टरों और नर्सिग स्टाफ की तैनाती होगी, इसपर फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

अस्पताल चलाने में डॉक्टरों की कमी सबसे बड़ी बाधा

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अस्थाई अस्पतालों को तैयार करवाने की तैयारी पहले से थी। पाटलिपुत्रा खेल परिसर की तरह ही पटना के ज्ञान भवन में अस्थाई अस्पताल बनाने का भी विचार सरकार कर चुकी है। लेकिन इस प्लानिंग में सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की कमी है। पटना के PMCH-NMCH में भी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी देखी जा रही है। इस हालात में अस्थाई अस्पतालों में डॉक्टरों को लगाना स्वास्थ्य विभाग के लिए कड़ी चुनौती जैसा है।

CM दे चुके डॉक्टरों की कमी दूर करने का निर्देश

CM नीतीश कुमार ने सोमवार को ही अपनी मीटिंग में निर्देश दिया था कि राज्य में आयुष, यूनानी डॉक्टरों के साथ ही डेंटल और रिटायर्ड डॉक्टरों का भी सहयोग इस महामारी से निपटने में लिए जाए। साथ में चिकित्सा कार्य से जुड़े अन्य कर्मियों की भी ट्रेनिंग कराकर उनकी सेवा ली जाए। भास्कर ने इससे पहले रविवार को ही कहा था कि बिहार में कुल 1।19 लाख डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं। इनमें 40,200 एलोपैथिक, 33,922 आयुष, 34,257 होम्योपैथी, 5,203 यूनानी और 6,130 दांत के डॉक्टर हैं। सरकार थोड़ी सी ट्रेनिंग के बाद इन डॉक्टरों की भी सेवा ले सकती है। इससे डॉक्टरों की कमी को भरने में भी मदद मिलेगी। बड़ी संख्या में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना संक्रमण की जद में आने पर IMA पहले ही बिहार के लिए रेड अलर्ट जारी कर चुका है।

आज CMG की मीटिंग में भी डॉक्टरों की भर्ती पर हुआ फैसला

बिहार में आज ही क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (CMG) की मीटिंग के बाद सख्तियों को बढ़ाने का फैसला किया गया है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि बिहार के एलोपैथिक, आयुष, यूनानी, डेंटिस्ट चिकित्सक; लैब तकनीशियन, नर्स, पारा मेडिकल स्टाफ एव एनेस्थेटिस्ट के अस्थायी पदों का सृजन कर वाक-इन-इंटरव्यू से न्यूनतम एक वर्ष के लिए संविदा पर नियुक्ति होगी। इस तरह के सभी सेवानिवृत्त चिकित्सकों को भी आवश्यकतानुसार महामारी से नियंत्रण के काम में लगाया जाएगा।

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