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बिहार में 12 जुलाई से स्कूल-कॉलेज अनलॉक:50% उपस्थिति के साथ 10वीं से ऊपर के स्कूल और कॉलेज खोले जाएंगे, कोरोना प्रोटोकॉल का रखना होगा ख्याल

पटनाएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक तस्वीर।

12 जुलाई से बिहार में विश्वविद्यालय, कॉलेज, तकनीकी शिक्षण संस्थान और 11-12वीं तक के स्कूल 50% उपस्थिति के साथ खुल जाएंगे। 1-10वीं क्लास अभी नहीं खोले गए हैं, लेकिन स्कूल में 50 प्रतिशत शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मी को आना होगा। कोचिंग खोलने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है।

सरकार ने स्कूल-कॉलेजों को खोलने के लिए स्पष्ट तौर से निर्देश दिए हैं कि किसी भी दिन क्लास में 50 प्रतिशत से अधिक अटेंडेंस ना हो। क्लास में 6 फीट की दूरी को चिह्नित किया जाए, जिस पर बच्चे बैठें। इसके अलावा बसों में सैनिटाइजेशन की व्यवस्था, हैंड सैनिटाइजर आदि का भी ध्यान रखना होगा। स्कूल-कॉलेज में दरवाजे की कुंडी, डैशबोर्ड, डस्टर, बेंच-डेस्क आदि की निरंतर सफाई और सैनिटाइजेशन किया जाएगा। इसके अलावा मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा जाएगा।

निर्धारित मानक संचालक प्रक्रिया का पालन करते हुए राज्य के सरकारी विद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ ही निजी विद्यालयों, मेडिकल व इंजीनियरिंग कॉलेज, सभी सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों और उच्च शिक्षा संस्थानों के खोलने के संबंध में निर्णय लिया गया।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने लेटर जारी किया है, जिसमें स्कूल, कॉलेजों को खोलने के लिए निर्देश जारी किया गया है। सूबे में अभी इसी के अनुसार स्कूल-कॉलेज खोले जाएंगे। मुख्य सचिव ने सभी विश्वविद्यालयों, जिला जिलाधिकारियों और सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जारी पत्र में कोरोना संक्रमण के कारण बंद स्कूलों या उच्च शिक्षण संस्थानों को खोलने को लेकर निर्देश जारी किया है।

पत्र में कहा गया है कि राज्य के आयोगों द्वारा नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी और शैक्षणिक संस्थान के वयस्क छात्र- छात्राओं, शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मियों को कोविड-19 का टीका लेना सुनिश्चित किया जाए। इस अवधि में स्कूल और यूनिवर्सिटी में किसी भी तरह की परीक्षाएं नहीं ली जाएंगी।

एक अलग पत्र में शिक्षा विभाग को सेवा उपलब्ध कराने के लिए एक एजेंसी का चयन करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए तकनीकी समिति और वित्तीय समिति का गठन किया गया है।

सैनिटाइजेशन पर जोर

शिक्षण संस्थान, विद्यालय कैंपस, कक्षाओं के फर्नीचर, स्टेशनरी, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला आदि की सफाई और सैनिटाइजेशन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। डिजिटल थर्मामीटर, सैनिटाइजर, साबुन आदि की व्यवस्था की जाए। संस्थान या विद्यालय में परिवहन व्यवस्था शुरु किए जाने के पहले सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

बैठने से जुड़ी गाइड लाइन

  • स्टूडेंट्स के बीच कम से कम 6 फीट की दूरी के साथ बैठने की व्यवस्था की जाए। यदि संस्थान या विद्यालय मे एक सीट का बेंच-डेस्क हो तो इसे भी 6 फीट की दूरी पर बैठने की व्यवस्था की जाए।
  • शिक्षक के स्टाफ रूम में या गेस्ट रूम में भी 6 फीट की दूरी पर बैठक कने की व्यवस्था चिन्हित की जाए।

इन बातों पर भी रखना होगा ध्यान

  • किसी भी कार्य दिवस पर किसी भी कक्षा में कुल क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति नहीं होगी।
  • जहां नामांकन अधिक हो को दो पाली में संचालित किया जाए और प्रत्येक शिफ्ट के समय को परिस्थिति अनुकूल कम किया जा सकता है।
  • शैक्षणिक संस्थान या विद्यालय को वैसे आयोजन से बचना चाहिए, जहां भौतिक या सामाजिक दूरी का पालन करना संभव नहीं हो।
  • समारोह- त्योहार आदि के आयोजन से संस्थान या विद्यालय को बचना चाहिए।
  • नए कक्षा में नामांकन के समय केवल परिवार या अभिभावक को ही रखा जाए, बच्चों को अभिभावक के साथ आने से मुक्त रखा जाए।
  • संभव हो तो ऑनलाइन नामांकन संचालन की व्यवस्था की जाए।
  • शिक्षक व छात्रों की नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की जाए।
  • बीमारी संबंधी छुट्टी की नीति को लचीला बनाई जाए और ऐसे आवेदन पर उन्हें घर में रहने की अनुमति दी जाए।
  • अधिकतम उपस्थिति के लिए पुरस्कार या मानदेय को हतोत्साहित किया जाए।
  • विद्यालय खुलने के पूर्व विद्यार्थियों को पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

स्कूल-कॉलेज खोलने के बाद की तैयारी

  • संस्थान या विद्यालय की सफाई अभियान में विद्यालयों को नहीं लगाया जाए।
  • छूट जाने वाले तल जैसे दरवाजे की कुंडी, डैशबोर्ड, डस्टर, बेंच-डेस्क आदि की निरंतर सफाई और सैनिटाइजेशन की जाए।
  • साफ पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही विद्यार्थियों को घर से पानी बोतल लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
  • बाहरी वेंडर को शैक्षणिक संस्थान या विद्यालय में कुछ बेचने पर रोक लगायी जाए।

स्टूडेंट की सुरक्षा के लिए कदम

  • बसों को प्रतिदिन दो बार सैनिटाइज किया जाए
  • बसों पर चढ़ते समय बच्चों का थर्मल स्क्रीनिंग की जाए
  • बिना मास्क के किसी को भी बस में बैठने की अनुमति नहीं जाए। बस की सभी खिड़कियों में पर्दा नहीं रखा जाए। सभी खिड़कियां खुली रहें।
  • बस में हैंड सैनिटाइजेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
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