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जिम ट्रेनर गोलीकांड:पावर-पैसे से खुशबू और खुद को बचाने की सेटिंग कर रहा था डॉक्टर, पुलिस को सत्ताधारी दल के बड़े नेता से कराए थे कई कॉल

पटना9 महीने पहले
खुशबू सिंह, लेफ्ट की तस्वीर में अपने डॉक्टर पति और राइट वाली तस्वीर में जिम ट्रेनर विक्रम सिंह के साथ।

पटना में जिम जिम ट्रेनर विक्रम सिंह गोलीकांड में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. राजीव कुमार सिंह और उनकी पत्नी खुशबू जेल जा चुकी हैं। हालांकि, विक्रम का बयान होने के बाद भी पुलिस ने 5 दिन बाद डॉक्टर दंपति का गिरफ्तार किया। इसका कारण था कि गिरफ्तारी और जेल जाने से बचने के लिए डॉ. राजीव ने बहुत तिकड़मबाजी की। डॉ. राजीव ने पुलिस के ऊपर नेताओं के जरिए प्रेशर बनाने की काफी कोशिश की थी। इसमें सत्ताधारी दल जदयू के कुछ बड़े नेता लगातार राजीव और उनकी पत्नी के मददगार बनने की कोशिशों में लगे रहे।

सूत्र यह भी दावा करते हैं कि इन नेताओं में सत्ताधारी दल जदयू के एक बड़े नेता लगातार डॉ. राजीव और उनकी पत्नी के मददगार बनने की कोशिशों में लगे रहे। इनके अलावा भी कुछ नेताओं और अफसरों ने राजीव की पैरवी की थी। इनके बीच बड़ी डील होने की भी बात भी कही जा रही है।

दरअसल, पिछले कुछ सालों से डॉ. राजीव अखबारों के पेज-3 पर छाए रहते थे। उन्होंने पटना के बड़े लोगों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी पहुंच बनाई। स्वजातीय नेताओं, पुलिस अफसर और डॉक्टर तक के साथ उठना-बैठना शुरू किया। जदयू के बड़े नेताओं तक डॉक्टर ने खुद और अपनी पत्नी की बेगुनाही की एकतरफा बात पहुंचाई। इसी आधार पर जदयू नेता ने पुलिस अधिकारियों को कॉल भी की थी।

हिरासत के दौरान भी मोबाइल चला रहा था डॉक्टर
18 सितंबर की सुबह जिम ट्रेनर को गोली मारी गई थी। घायल हालत में विक्रम ने पुलिस को बयान दिया था। उसने डॉ. राजीव और उनकी पत्नी खुशबू सिंह का नाम लिया था। दोनों के नाम जैसे ही सामने आए। पुलिस ने कुछ देर बाद दोनों को हिरासत में ले लिया था। उस दिन पाटलिपुत्र थाने में दोपहर से लेकर रात तक दोनों से पूछताछ की गई।

पति के साथ खुशबू सिंह।
पति के साथ खुशबू सिंह।

उस वक्त पुलिस के पास राजीव और खुशबू के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था। लगातार पैरवी भी हो रही थी। पुलिस हिरासत में होने के बाद भी राजीव अपने मोबाइल का इस्तेमाल बेधड़क कर रहा था। वह जदयू के एक नेता को हर पल की जानकारी दे रहा था।

हालांकि, कोई सबूत न होने की वजह से रात में पुलिस ने पति-पत्नी को घर जाने की इजाजत तो दे दी थी। मगर, दूसरी तरफ कदमकुआं थाने में इनके खिलाफ घायल विक्रम के बयान के आधार पर हत्या के प्रयास की नामजद FIR भी दर्ज कर ली थी।

विक्रम सिंह के साथ खुशबू की तस्वीर।
विक्रम सिंह के साथ खुशबू की तस्वीर।

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड यानी CDR से मिले सबूत
डॉ. राजीव का कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है। 22 सितंबर की रात पुलिस ने दोनों पति-पत्नी को दोबारा हिरासत में लिया। इनसे पूछताछ शुरू की। दोनों अपने ऊपर हत्या के प्रयास के आरोपों को नकारते रहे। हालांकि, तब तक पुलिस के हाथ ठोस सबूत लग चुके थे। मेन शूटर्स समेत 3 अपराधी भी पकड़े जा चुके थे। इनमें अमन कुमार, आर्यन उर्फ रोहित और शमशाद शामिल हैं।

पुलिस ने इन अपराधियों के कॉल डिटेल्स को खंगाला। इससे पहले खुशबू और उसके एक्स ब्वॉय फ्रेंड मिहिर सिंह के बीच बातचीत का सबूत सामने आ चुका था। अपराधियों के पकड़े जाने से पहले ही इन दोनों के बीच इस साल मई में हुई कॉल का CDR पुलिस को मिल चुका था। मिहिर की फोटो भी पुलिस के पास थी। जब पुलिस ने मिहिर की फोटो शूटर्स को दिखाई तो वह उसे पहचान गए। पुलिस के सामने अपराधियों ने स्वीकार कर लिया कि मिहिर ने ही उन्हें विक्रम को मारने की सुपारी दी थी।

अफसरों की काली कमाई को ठिकाने लगवाता था राजीव
राजीव के संबंध सिर्फ नेताओं के साथ ही नहीं, बल्कि काली कमाई करने वाले बिहार सरकार के कई अफसरों के साथ भी हैं। इनमें कई पुलिसवाले हैं, जिनके साथ राजीव के रिश्ते काफी मजबूत हैं। हमेशा इनका साथ में उठना-बैठना था। सूत्र बताते हैं कि अफसरों की काली कमाई को ठिकाने लगाने में राजीव की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। बड़े पैमाने पर काली कमाई के रुपयों को अलग-अलग लोगों के पास ब्याज पर लगाया जाता रहा है।

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