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  • Bihar News Update; Report On Oxygen Consumption In PMCH Given To Patna High Court

PMCH में ऑक्सीजन घोटाला:कोविड वार्ड में 150 की जगह 348, क्रिटिकल वार्ड में 13 की जगह 120 सिलेंडर एक दिन में खर्च हुए

पटना5 महीने पहले
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PMCH में ऑक्सीजन के बड़ा खेल का खुलासा पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी टीम ने अपनी रिपोर्ट में किया है। - Dainik Bhaskar
PMCH में ऑक्सीजन के बड़ा खेल का खुलासा पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी टीम ने अपनी रिपोर्ट में किया है।

पटना के PMCH में ऑक्सीजन का बड़ा खेल चल रहा है। अस्पताल में इसकी जरूरत से ज्यादा खपत दिखाई जा रही है। यह खुलासा पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी टीम ने PMCH पर दी अपनी रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल में जिस दिन जांच की गई, उस दिन 127 कोविड मरीजों पर अधिकतम 150 सिलेंडर की खपत होनी चाहिए थी, लेकिन चार्ट में 348 की खपत दिखाई गई। इसी तरह अन्य विभागों में भी मरीजों की जरूरत के हिसाब से सिलेंडर की खपत ज्यादा थी।

जरूरत और खपत का निर्धारण कैसे हुआ

रिपोर्ट बनाने वाली कमिटी ने बीते एक मई को PMCH में पटना के DDC से मुलाक़ात की, जो वहां ऑक्सीजन वितरण हेतु नोडल अफसर प्रतिनियुक्त थे। यहां तीन बातें स्पष्ट हुई;

  • PMCH में मुख्यतः डी टाइप सिलेंडर का इस्तेमाल होता है, जिसमें प्रति सिलेंडर 7 हज़ार क्यूबिक लीटर (7MT) गैस रहता है।
  • अस्पताल के विभिन्न वार्ड में कोविड सहित अन्य तमाम मरीज, जिन्हें ऑक्सीजन की ज़रूरत थी, उनमें 99% नॉर्मल रेस्पिरेशन वाले मरीज थे। इन्हें खून में नॉर्मल ऑक्सीजन सैचुरेशन स्तर पाने के लिए 5 लीटर/मिनट की दर से रोजाना लगभग एक सिलेंडर की ज़रूरत होती है। यह भी तब, जब लगातार सिलेंडर से ही सांस लेते रहें।
  • कोविड के एक फीसदी ही ऐसे गंभीर मरीज हैं, जिन्हें अपने खून में नार्मल ऑक्सीजन लाने के लिए 15 लीटर/मिनट की दर से रोजाना 3 सिलेंडर की ज़रूरत होती है।

विभागवार टीम को क्या शिकायत मिली

कोविड वार्ड: एक दिन के चार्ट के मुताबिक वहां कोविड मरीजों की संख्या 127 थी। उनमें नॉर्मल रेस्पिरेटरी वाले मरीज 125 (रोजाना 1 सिलेंडर) और 2 मरीज गंभीर रेस्पिरेटरी (रोजाना 3-4 सिलेंडर वाले) थे। यानी 24 घंटे में उन 127 मरीजों को ज़्यादा से ज़्यादा 150 सिलेंडर की ही ज़रूरत थी, लेकिन चार्ट के मुताबिक उनपर 348 सिलेंडर की खपत हुई।

क्रिटिकल वार्ड: 30 अप्रैल को नार्मल रेस्पिरेशन वाले (5 लीटर/मिनट) मात्र 13 मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर लगा हुआ था। बीच-बीच में ऑक्सीजन मास्क हटा भी लिया जाता था। इसलिए अमूमन उन पर एक दिन में 13 सिलेंडर खर्च होने चाहिए थे, वहां 120 सिलेंडर की खपत दिखाई गई।

इसी तरह गाइनी वार्ड में तीन पेशेंट पर 32 सिलेंडर, ईएनटी विभाग में 23 मरीजों पर 63 और टाटा वार्ड में 48 मरीजों के लिए अधिकतम 50 सिलेंडर की ज़रूरत थी, वहां एक दिन में 143 खर्च हो गए।

रिपोर्ट का निष्कर्ष क्या निकला

इस मामले में कोर्ट मित्र बनाए गए एडवोकेट मृग्यांक मौली ने सिफारिश की है कि PMCH में ऑक्सीजन ऑडिटिंग की व्यवस्था एक स्वतंत्र निकाय से कराई जाए। गुरुवार को हुई सुनवाई में इस रिपोर्ट की चर्चा की गई। चीफ जस्टिस की खण्डपीठ कहा कि अगले दिन सुनवाई करेंगे।

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