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बिहार BJP ने बागियों के लिए खोले दरवाजे:राजेंद्र सिंह सहित 8 नेताओं की हुई वापसी; 48 महीने के लिए निकाला, 16 महीने में ले आए

पटना5 महीने पहले
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बेतिया में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के साथ घर वापसी करने वाले राजेंद्र सिंह। - Dainik Bhaskar
बेतिया में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के साथ घर वापसी करने वाले राजेंद्र सिंह।

बिहार भाजपा ने बागियों के लिए पार्टी के दरवाजे खोल दिए हैं। सबसे पहले राजेन्द्र सिंह की जोरदार वापसी हुई है। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में राजेन्द्र सिंह भाजपा से बगावत कर चिराग की पार्टी लोजपा के टिकट पर दिनारा सीट से चुनाव लड़े थे। अब 16 महीने 28 दिन बाद पार्टी में वापस लौट आए हैं, हालांकि 12 अक्टूबर 2020 को जारी निष्कासन पत्र के अनुसार उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निकाला गया था।

राजेन्द्र सिंह ने रविवार को बेतिया में संजय जायसवाल के सामने भाजपा में वापसी की। बड़े तामझाम से हुई इस घर वापसी की तस्वीरें प्रदेश भाजपा की तरफ से साझा की गईं। यह स्वागत और यह तस्वीरें, यह बताने को काफी थी कि भाजपा ने राजेन्द्र सिंह की तरह अन्य बागी नेताओं के लिए भी अपने दरवाजे खोल दिए हैं।

12 अक्टूबर 2020 को जारी लिस्ट में जो और नाम हैं, वो हैं - रामेश्वर चौरसिया, डॉ उषा विद्यार्थी, रवीन्द्र यादव, श्वेता सिंह, इंदु कश्यप, अनिल कुमार, मृणाल शेखर और अजय प्रताप। ये वही नेता हैं, जिन्हें राजेन्द्र सिंह के साथ ही भाजपा ने 6 साल के लिए निष्कासित किया था।

12 अक्टूबर 2020 को जारी भाजपा नेताओं के निष्कासन की लिस्ट।
12 अक्टूबर 2020 को जारी भाजपा नेताओं के निष्कासन की लिस्ट।

पार्टी से ज्यादा चर्चाओं में प्रभावी रहे हैं राजेन्द्र सिंह

राजेन्द्र सिंह उन नेताओं में से एक हैं जो संघ की मजबूत पृष्ठभूमि से भाजपा के साथ सक्रिय राजनीति में आए थे। मूल रूप से रोहतास के रहनेवाले राजेन्द्र सिंह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं। साल 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के रणनीतिकार रहे थे। जब वो भाजपा के साथ सक्रिय राजनीति से जुड़कर बिहार आए तो चर्चाओं में उन्हें भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जाने लगा।

हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव में वो हार गए। पार्टी के अंदर उनके पक्ष के कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं ने दबी जुबान में इसके लिए तब भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को हार का साजिशकर्ता तक कहा था। यानी चर्चाओं ने ही राजेन्द्र सिंह को हराया था।

2020 में जब एक बार फिर से भाजपा और जदयू गठबंधन चुनाव में उतरी तो दिनारा सीट JDU के खाते में चली गई। इसे लेकर भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं रहीं। कुछ लोगों का कहना था कि उनके टिकट कटने की वजह पिछली हार थी तो कुछ लोग कह रहे थे कि प्रदेश भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं ने जानबूझकर उनकी सीट JDU को जाने दी। कुछ यह भी कह रहे थे कि राजेन्द्र सिंह पर नीतीश कुमार की नाराजगी भारी पड़ी।

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह को लोजपा में शामिल कराते चिराग पासवान। (फाइल फोटो)
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह को लोजपा में शामिल कराते चिराग पासवान। (फाइल फोटो)

बहरहाल, भाजपा से टिकट कटने के बाद राजेन्द्र सिंह चिराग पासवान की पार्टी लोजपा में शामिल हो गए। राजेन्द्र सिंह के लोजपा जाने से चिराग की तरफ से किए जा रहे उस दावे को और बल मिला, जिसमें वो खुद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हनुमान कहते रहे।

यही वजह है कि राजेन्द्र सिंह का लोजपा में जाना बड़ी चर्चा का केन्द्र रहा और उनके बाद धड़ाधड़ भाजपा से लोजपा में नेताओं की एंट्री हुई। हालांकि, इसमें से कोई भी जीत हासिल नहीं कर सका। उल्टे इनमें से कई नेता JDU उम्मीदवारों की हार का कारण बन गए।

भाजपा ने JDU को बागी का जवाब बागी से दिया

भाजपा और जदयू के बीच 13 जनवरी से शुरू हुई बयानी तल्खी के बीच राजेन्द्र सिंह की घर वापसी, जदयू और भाजपा के बीच की नोंक-झोंक को और तेज करेगा। वजह है कि राजेन्द्र सिंह के कारण ही 2020 में जदयू के यानी NDA के घोषित प्रत्याशी जय कुमार सिंह को हारना पड़ा था। पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह ने नतीजों के बाद इसे लेकर कई बार खुलकर भाजपा को कोसा भी था।

हालांकि, भाजपा से पहले JDU ने बागियों को शामिल करना शुरू कर दिया है। गोपालगंज के बैकुंठपुर सीट से भाजपा के मिथिलेश तिवारी के हार का कारण बने पूर्व विधायक मंजीत सिंह जदयू में शामिल हो चुके हैं। पार्टी ने उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष भी बना दिया है।