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आम आदमी पर भारी IGIMS की VIP व्यवस्था:कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल में खाली बेडों पर पर्दा ; न डिस्प्ले, न मेडिकल बुलेटिन और न ही जारी होता है डयूटी रोस्टर

पटना2 महीने पहले
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IGIMS में आम आदमी को इलाज के लिए हो रही परेशानी। - Dainik Bhaskar
IGIMS में आम आदमी को इलाज के लिए हो रही परेशानी।

कोरोना के डेडिकेटेड हॉस्पिटल इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) का VIP कल्चर आम आदमी पर भारी पड़ रहा है। हर व्यवस्था ऑनलाइन है लेकिन खाली बेडों की जानकारी ऑफलाइन है। आम आदमी को हमेशा बेड फुल बताया जाता है लेकिन इसकी जानकारी अस्पताल के बाहर डिस्प्ले नहीं की जाती है। सिवान के राजेश कुमार सोमवार की सुबह अपने पिता सुरेश को लेकर इलाज के लिए पहुंचे। हालत गंभीर थी ऑक्सीजन लगातार गिर रहा था। लेकिन बेड खाली नहीं होने से वह वापस चले गए। पटना के शास्त्री नगर की 30 साल की रोशनी भी बेड नहीं होने से PMCH चली गईं। सरकार ने 400 बेड के डेडिकेटेड हॉस्पिटल की बात कही थी लेकिन IGIMS ने 220 बेड की व्यवस्था की है, वह भी हमेशा फुल बताया जाता है। बेड फुल हैं और इसका डिस्प्ले नहीं करना बड़ा सवाल है। ऐसे में सरकार के आदेश भी हवा में हो हैं। यहां न डिस्प्ले होता है और ना ही मेडिकल बुलेटिन और ड्यूटी रोस्टर ही डिस्प्ले होता है

आखिर बेड कैसे मिलेगा, यह बड़ा सवाल

IGIMS में बेड कैसे मिलेगा यह बड़ा सवाल है। आम आदमी को कहा जाना होगा किससे मिलना होगा कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है जहां से ऑनलाइन पता चल सके कि बेड कितने हैं और उनकी क्या स्थिति है। आम मरीजों में बेड को लेकर हमेशा यह संशय बना रहता है कि वह कहां से बेड के लिए आवेदन करें। एक एक बेड के लिए सुपरीटेंडेंट को कॉल करना पड़ता है। ऐसे में आम मरीजों को राहत नहीं मिल पा रही है। आम लोगों को राहत तभी मिलेगी जब ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जहां खाली बेडों की संख्या और वहां भर्ती मरीजों की सूची पारदर्शिता के साथ लगाई जाए।

अस्पतालों में हवा में सरकार का आदेश

सरकार ने अस्पतालों को लेकर आदेश जारी किया है कि कोरोना के बेडों की संख्या और वहां भर्ती मरीजों की संख्या के साथ खाली बेडों का पूरा ब्यौरा कोविड वार्ड के बाहर हॉस्पिटल को डिस्प्ले करना है। लेकिन पटना में इस आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। IGIMS में तो आम आदमी को पता ही नहीं चल पाता है कि संस्थान में कितने बेड हैं और कितने मरीज भर्ती हैं। IGIMS में स्टेट कैंसर के भवन, RIO और फोर्थ फ्लोकर को मिलाकर कुल 220 बेड हैं लेकिन आम लोगों को यह कैसे पता चले इसकी कोई व्यवस्था नहीं की गई है।

दौड़ भाग करने में उखड़ जाएगी सांस

मरीजों की दौड़ भाग करने में ही सांस उखड़ जाती है। IGIMS को कोरोना का डेडिकेटेड हॉस्पिटल घोषित करने के बाद लोगों को लगता है कि यहां आसानी बेड मिल जाएगा लेकिन जब इमरजेंसी में वह भागकर यहां पहुंचते हैं तो बेड नहीं मिल पाता है। ऐसे में अस्पतालों की दौड़भाग करने में भी मरीजों की सांस उखड़ जाती है। IGIMS पहुंचने के बाद भी मरीजों को इधर से उधर दौड़ना पड़ता है जिससे हालात बिगड़ती है और बाद में बताया जाता है कि बेड खाली नहीं है।

निदेशक लगा रहे हैं पता

सरकार ने पारदर्शिता लाने के लिए हर मरीज की 24 घंटे में मेडिकल बुलेटिन, बेडों का पूरा डिस्प्ले और डॉक्टराें की ड्यूटी का रोस्टर सार्वजनिक करते हुए अस्पताल में बड़ी स्क्रीन पर डिस्प्ले करने को कहा है लेकिन इसका पालन खाली बेडों पर पर्दा डालने के लिए ही नहीं किया जा रहा है। आम लोगों की इस बड़ी समस्या के लिए जब संस्थान के निदेशक डॉ एन आर विश्वास से सवाल किया गया तो उनका कहना है इमरजेंसी के सामने डिस्प्ले लगाने का निर्देश दिया गया है, क्यों ऐसा नहीं हो रहा है इसका पता लगा रहे हैं। उनका कहना है कि व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी होगी।