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महागठबंधन में दरार:CPI के कन्हैया कुमार को कांग्रेस में लेने पर सभी वाम दलों ने किया था विरोध

पटना2 महीने पहले
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कन्हैया कुमार लगातार लाइमलाइट में रहे हैं। - प्रतीकात्मक तस्वीर। - Dainik Bhaskar
कन्हैया कुमार लगातार लाइमलाइट में रहे हैं। - प्रतीकात्मक तस्वीर।

बिहार उपचुनाव में भले कांग्रेस और RJD के बीच में मतभेद दिख रहा हो, लेकिन महागठबंधन में दरार उसी समय पड़ गई थी, जब कन्हैया कुमार CPI छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। बिहार के महागठबंधन में RJD मुख्य दल है, जिसमें कांग्रेस, CPI, CPM और माले शामिल है। जब JNU के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और CPI के फायर ब्रांड नेता कन्हैया कुमार कांग्रेस में शामिल हुए, तो महागठबंधन की नींव हिलने लगी थी। जब बिहार में उपचुनाव की घोषणा हुई तो RJD ने अपना पहला दांव खेल दिया।

कन्हैया कुमार को प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पहले से ही पसंद नहीं करते थे। यही वजह रही थी कि जब बेगूसराय से कन्हैया लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे तो, तेजस्वी यादव ने RJD की तरफ से अपने उम्मीदवार उतार दिए थे। उसके बाद कन्हैया कुमार की पार्टी CPI में उनका ग्राफ लगातार गिरता रहा। इस बीच कन्हैया कुमार और उनके कुछ साथियों ने पटना के CPI ऑफिस में मारपीट और तोड़फोड़ की थी। इस घटना का CPI में काफी कड़े लहजे में विरोध हुआ था और निंदा प्रस्ताव लाया गया था, हालांकि कन्हैया कुमार CPI के लिए फायर ब्रांड नेता थे तो CPI ने उन्हें पार्टी से ना तो बर्खास्त किया और ना ही निलंबित किया, लेकिन कन्हैया कुमार पार्टी में हाशिए पर आ चुके थे। ऐसे में उन्होंने कांग्रेस जाने का निर्णय लिया।

कन्हैया को शामिल कर कांग्रेस ने गठबंधन के CPI को दिया बड़ा झटका
इसमें मुख्य भूमिका निभाई राजनीति के रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने। माना जाता है कि गठबंधन धर्म में जो दल शामिल होते हैं उसके नेता एक दूसरे दल में नहीं जाते हैं, लेकिन कांग्रेस ने कन्हैया कुमार को अपने पार्टी में शामिल करा कर अपने ही गठबंधन के CPI को बड़ा झटका दे दिया। उस वक्त भी CPI, CPM और माले के नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उस समय वामदलों ने कन्हैया कुमार और कांग्रेस के खिलाफ बयानबाजी भी की थी।

कन्हैया कुमार का एक अपना फॉलोअर वर्ग है
सीनियर जर्नलिस्ट रवि उपाध्याय बताते हैं कि कन्हैया कुमार लगातार लाइमलाइट में रहे हैं। जब से JNU प्रकरण हुआ है कन्हैया कुमार का एक अपना फॉलोअर क्लास तैयार हुआ है। ऐसे में जब CPI में वह दरकिनार किए गए तो उन्हें बेचैनी हुई। फिर वह कांग्रेस में शामिल हो गए, जोकि गठबंधन धर्म के खिलाफ है, चूंकि तेजस्वी यादव कन्हैया कुमार को लेकर कांग्रेस से काफी खुश नहीं थे, जैसे ही तेजस्वी यादव के हाथ में मौका आया उन्होंने कांग्रेस को आइना दिखा दिया। उपचुनाव में अपने उम्मीदवार उतार दिए।

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