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बिहार विधानसभा में क्यों गई पुलिस:सुरक्षा प्रहरियों के पद 105 और तैनाती मात्र 20 की, ऐसे में कैसे संभलता इतना बड़ा बवाल

पटनाएक महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय
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विधानसभा में हुई घटना की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
विधानसभा में हुई घटना की फाइल फोटो।
  • 23 मार्च को विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा को विपक्ष ने बनाया था बंधक
  • सुरक्षाकर्मियों (मार्शल) की भारी कमी की वजह से बुलानी पड़ी थी बाहर से पुलिस

23 मार्च को बिहार विधानसभा में जो हुआ, उस पर पूरे देश-दुनिया की नजर रही। विधानसभा अध्यक्ष को बंधक बना लिया गया, सदन के अंदर पुलिस को बुलाने की जरूरत पड़ गई, विधायकों को घसीटकर बाहर निकाला गया, उन्हें लातों से मारा गया। कहा जा रहा है कि सदन के अंदर गाली-गलौच भी हुई। सवाल यह उठ रहा है कि विधानसभा में पुलिस को बुलाने की जरूरत क्यों पड़ी? आखिर जब विधानसभा की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी रहते हैं तो फिर बाहर से पुलिस को क्यों बुलाया गया।

विधानसभा में बाहर से सुरक्षाकर्मी को नहीं बुलाया जाता है। यहां तक कि चलते सत्र में CM की सुरक्षा को छोड़ सभी माननीयों के सुरक्षाकर्मी परिसर से बाहर ही रहते हैं। सुरक्षाकर्मी अपने साथ हथियार नहीं ला सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद बिहार पुलिस विधानसभा भवन ही नहीं, सदन के अंदर तक गई। दैनिक भास्कर आपको बता रहा है कि आखिर क्या मजबूरी थी? बाहर से बिहार पुलिस को सदन में क्यों बुलाया गया था? उससे पहले आप उस दिन की घटना को समझ लीजिए।

6 बार स्थगित करनी पड़ी थी सदन की कार्यवाही
23 मार्च , बिहार विधानसभा का वह दिन, जब अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा को विपक्ष के विधायकों ने बंधक बना लिया। पूरे विधानसभा में विपक्ष के नेताओं का धरना प्रदर्शन चल रहा था। पूरे दिन विधानसभा सत्र नहीं चलने दिया गया। सदन के अंदर विपक्ष के नेता इतने उग्र थे कि जब भी अध्यक्ष या सभापति सदन के आसन पर आते, विपक्षी नेता उग्र हो जाते थे। ऐसे में पूरे दिन 6 बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अंत में जब विपक्ष के नेताओं ने अध्यक्ष के चैंबर को बाहर से रस्सी से बांध दिया था तो अध्यक्ष ने सुरक्षा कारणों से बिहार पुलिस को बुला लिया। आनन-फानन में पूरा विधानसभा परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। सदन के अंदर से बिहार पुलिस के जवान विपक्ष के विधायकों को उठाकर बाहर फेंकने लगे। विधायकों के इस हंगामे को पुलिस के बल पर शांत करा दिया गया। उस दिन देर रात नौ बजे तक सदन की कार्यवाही चलाई गई।

दोषी पुलिस कर्मियों पर होगी कार्रवाई
इस पूरी घटना के बाद राजनीति तेज हो गई।। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने एक साथ CM नीतीश कुमार और सभा अध्यक्ष पर कई आरोप लगाए। बात उठी कि विधानसभा के मुख्य भवन और सदन में बिहार पुलिस की अब तक एंट्री नहीं होती थी। लेकिन, इतिहास में यह पहली बार हुआ कि विधानसभा के सदन में राज्य की पुलिस गई और पुलिस ने विधायकों को सदन से बाहर फेंका। इस क्रम में विपक्ष के कई विधायकों को चोटें आईं। कई विधायक अस्पताल में भर्ती हुए। उस दिन के वीडियो में एक विधायक को एक अधिकारी द्वारा मारते हुए शार्ट्स भी हैं। ऐसे में जब पुलिस पर सवाल उठने लगे तो पुलिस मुख्यालय ने साफ कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस को बुलाया था। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने गृह सचिव चैतन्य प्रसाद से बात कर दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।

80 फीसदी पोस्ट खाली
बिहार विधानसभा में कुल 105 सुरक्षाकर्मियों के पद हैं, जिसमें सुरक्षा प्रहरी के 90 पद हैं। इसमें चीफ मार्शल, अवर चीफ मार्शल, मार्शल और सब मार्शल होते हैं, लेकिन वर्तमान में यहां मात्र 20 सुरक्षा प्रहरी ही तैनात हैं। बाकी सुरक्षा प्रहरी के 70 पद खाली हैं। वहीं, चीफ मार्शल, अवर चीफ मार्शल के पद भी खाली हैं। कुल मिलाकर 79 पद खाली हैं, मात्र 20 सुरक्षा प्रहरी और एक मार्शल की तरफ से इतने बड़े विधानसभा की सुरक्षा की जाती है। वह भी, ये सुरक्षा प्रहरी इतनी ही संख्या में दो शिफ्ट करते हैं। जब सुरक्षाकर्मियों का 80 फीसदी पोस्ट खाली रहेगा तो बाहर से पुलिस तो बुलानी ही पड़ेगी।

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