पुरुषों की अपेक्षा कमजोर हो रही महिलाओं की हड्डियां:​​​​​​​ऑस्टियोपोरोसिस से कमजोर हो रहा हड्डियों का घनत्व, हल्की चोट में बढ़ गए फ्रैक्चर के मामले

पटनाएक महीने पहले
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ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर शुक्रवार को हुए जागरुकता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। - Dainik Bhaskar
ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर शुक्रवार को हुए जागरुकता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं।

हड्डियों में दर्द है और छोटी सी चोट भी सामान्य लोगों की अपेक्षा अधिक दर्द देती है तो सावधान हो जाएं। यह ऑस्टियोपोरोसिस का लक्षण हो सकता है। बिहार में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में बढ़ती हडि्डयों की इस बीमारी से डॉक्टर भी परेशान हैं। यह ऐसी बीमारी है जिसमें हल्की चोट में भी हडि्डयों के फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है। ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर शुक्रवार को हुए जागरुकता कार्यक्रम में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। डॉक्टरों ने महिलाओं को अलर्ट रहने की सलाह दी है।

महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस का कारण

ग्लोबल ऑर्थोपैडिक एसोसिएशन के सचिव डॉ अमूल्य कुमार सिंह का कहना है कि बिहार में महिलाएं सेहत को लेकर गंभीर नहीं हैं। इस कारण से महिला घर में जिस भी रुप में है वह अपनी सेहत को लेकर गंभीर नहीं है। पुरुषों की अपेक्षा वह काफी लापरवाह है और इस कारण से उनके अंदर ऑस्टियोपोरोसिस का केस अधिक देखने को मिल रहा है। देखा जा रहा है कि महिलाओं में हड्डी के घनत्व में कमी आ रही है। इससे हड्डियां अधिक नाजुक हो रही हैं। पुरुषों में भी मामले हैं लेकिन महिलाओंं ध्यान नहीं देने के कारण खतरा बढ़ा है। डॉ अमूल्य ने लोगों से संतुलित और नियमित आहार लेने की सलाह दी है। डॉक्टर का कहना है कि

डिप्टी सीएम ने मीहलाएं सुधार लें जीवन शैली

पटना के प्रमुख हड्डी रोग केंद्र अक्षत सेवा सदन में आयोजित ऑस्टियोपोरोसिस जागरुकता दिवस पर मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम रेणु देवी ने कहा कि बदलती जीवनशैली, खराब खान-पान की आदतों को लेकर सावधान रहने की जरुरत है। डिप्टी सीएम का कहना है कि अनुवांशिकता के साथ ही एक्सरसाइज में कमी ऑस्टियोपोरोसिस होने के मुख्य कारण है। इस बीमारी के कारण फ्रैक्चर में टूटी हडि्डयों के जुड़ने में काफी समय लग जाता है।

लक्षण पर हो जाएं सावधान

पटना मेनोपैस सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ रेनू रोहतगी ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस हड्डी का एक रोग है जिससे फ़्रैक्चर का ख़तरा बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस में अस्थि खनिज घनत्व (BMD) कम हो जाता है, सामान्य तौर पर, अस्थि बचपन और किशोरावस्था के दौरान सबसे तेजी से बनता है और 30 की उम्र के बीच में अपने चरम पर पहुंच जाता है। लगभग 40 वर्ष की आयु से जब हड्‌डी का द्रव्य कम होता है तो समस्या शुरु हो जाती है।

ग्लोबल ऑर्थोपैडिक एसोसिएशन के डॉ विजय शंकर सिंह ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस होने का पता चलने वाले व्यक्तियों को फ्रैक्चर को रोकने के लिए उचित सावधानी बरतनी चाहिए। अलग-अलग स्थितियों के आधार पर, डॉक्टर कैल्शियम सप्लीमेंट, एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट, विटामिन डी, बिसफ़ॉस्फ़ोनेट्स या कैल्सिटोनिन जैसी दवाएं लिख सकते हैं।

डॉ विजय शंकर सिंह ने कहा दुग्ध उत्पादों का सेवन नहीं करने वालों को दिन भर कैल्शियम की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ जैसे सोयाबीन उत्पाद, हड्डियों सहित समुद्री भोजन या मछली खाना, गहरे हरे रंग की सब्जियों, बीज और मेवे को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

डॉ आर आर कनौजियाने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस आमतौर पर अपने आप में कोई लक्षण नहीं पैदा करती है, यदि ऑस्टियोपोरोसिस से संबंधित फ्रैक्चर होता है, तो फ्रैक्चर की जगह पर सामान्य लोगाें की अपेक्षा अधिक दर्द हो सकता है। छोटी चोट या गिरने के बाद भी ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर हो सकता है।

ऑस्टियोपोरोटिक फ्रैक्चर की सामान्य जगहों में जांघ की हड्डी (कूल्हे के जोड़ के पास), रीढ़ (कशेरुक) और अग्र बाहु (कलाई के पास) शामिल हैं। रीढ़ में किसी भी आघात के बिना फ्रैक्चर हो सकता है। कशेरुकी फ्रैक्चर से पीठ में कुबड़ हो सकता है और शरीर की ऊंचाई में कमी, और कभी-कभी पीठबचपन और किशोरावस्था के दौरान मजबूत स्वस्थ हड्डी का निर्माण करें।

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