वेतन के लिए नियोजित शिक्षकों का अभियान:3 माह से नहीं मिला वेतन, दो साल से एरियर भी बकाया; इसलिए अब 'प्रोटेस्ट विद पोस्टर' कर रहे

पटना6 महीने पहले
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राज्य के हजारों शिक्षकों ने आज स्कूलों और घरों से इसी तरह तख्तियों के साथ प्रोटेस्ट किया है। - Dainik Bhaskar
राज्य के हजारों शिक्षकों ने आज स्कूलों और घरों से इसी तरह तख्तियों के साथ प्रोटेस्ट किया है।
  • नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट ने इस स्थिति को मानवाधिकारों का उल्लंघन कहा
  • माध्यमिक शिक्षक संघ ने 15 मई तक शिक्षकों को कार्यमुक्त रखे जाने की मांग की

बिहार के नियोजित शिक्षकों को जनवरी माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि स्थायी शिक्षकों को वेतन समय से दिया जा रहा है। नियोजित शिक्षकों का दो साल से एरियर भी बकाया है। वह भी सरकार नहीं दे रही है। एरियर की रकम भी डेढ़ से दो लाख के बीच हो गई है। दूसरी तरफ उन्हें कोरोना काल में 33 फीसदी हाजिरी भी बनानी पड़ रही है। इसको लेकर नियोजित शिक्षकों में गहरा आक्रोश है।

स्कूल-घर से मांग वाली तख्तियों के साथ प्रतिवाद

बिहार के नियोजित शिक्षकों ने अब वेतन भुगतान की राशि का अलाटमेंट, वर्षों से लंबित एरियर भुगतान की अविलंब गारंटी, कोरोना कार्य में प्रतिनियुक्त शिक्षकों के मेडिकल और आर्थिक सुरक्षा एवं वेतन भुगतान नियमित करने की मांग को लेकर राज्यव्यापी 'प्रोटेस्ट विद पोस्टर कैंपेन' शुरू कर दिया है। राज्य के विभिन्न जिलों के हजारों शिक्षकों ने स्कूलों और घरों से अपनी मांगों से संबंधित तख्तियों के साथ प्रतिवाद किया है।

कोरोना की भयावहता और रमजान के बीच आर्थिक संकट

TET-STET उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक और प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय ने बताया कि सूबे के लाखों शिक्षकों का वेतन तीन महीने से भी अधिक समय से लंबित है। शिक्षक अपनी जान हथेली पर रख कर कोरोना कार्य में प्रतिनियुक्त हैं और अपने दायित्व का पालन कर रहे हैं। कोरोना की भयावहता और रमजान का दवाब शिक्षकों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट पैदा कर रहा है, जबकि वेतन महीनों से लंबित है। विभागीय पदाधिकारी राशि आवंटन के अभाव का बहाना बना रहे हैं। संघ के नेताओं ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए कहा कि अक्टूबर माह में ही हड़ताल अवधि का कार्य दिवस सामंजित हो जाने के बाद भी अधिकांश जिलों में लंबित वेतन के भुगतान की प्रक्रिया नहीं शुरू की गई है। हजारों नवप्रशिक्षित शिक्षकों का एरियर भी सालभर से लंबित है।

केदार पाडेय ने 15 मई तक कार्यमुक्त रखने की मांग की

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष और विधान परिषद् सदस्य केदार नाथ पांडेय ने कहा कि बेगूसराय जिले में अब तक तीन दर्जन शिक्षक कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। इनमें से कई दिवंगत भी हो चुके हैं। यह रफ्तार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में पूरे बिहार के शिक्षक डरे हुए हैं। अन्य कई जिलों में भी कई शिक्षक बुरी तरह कोरोना की चपेट में हैं। उपस्थिति दर्ज करने विद्यालय आने में भी अब इन्हें काफी डर लग रहा है। महिलाओं की स्थिति तो और भी ज्यादा विकट है। विद्यालय में शिक्षक कार्य ठप है। अभिभावक नामांकन के लिए नहीं आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास शिक्षकों के फोन नंबर उपलब्ध हैं। जरूरत के अनुसार उन्हें बुलाया जा सकता है। पिछले साल भी शिक्षकों ने कोरेंटाइन सेंटर पर अपनी सेवाएं दी थीं। लेकिन इस बार बिना कोविड वैक्सिन का डोज दिलाए शिक्षकों को सेंटर पर लगाया है। इससे उनकी जान को खतरा है। मांग की है कि अगले तीन सप्ताह तक यानी 15 मई तक शिक्षकों को उपस्थिति और टीकाकरण अभियान में लगे शिक्षकों को मुक्त किया जाए। शत-प्रतिशत कोविड वैक्सिन का दोनों टीका लगाने के बाद ही उन्हें कार्य में लगाया जाए।

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