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गांव की नई सरकार का कंफ्यूजन दूर:पंचायत से नगर निकाय में शामिल हुए क्षेत्र के प्रतिनिधियों को परामर्शी समिति में नहीं मिलेगा स्थान, सरकार ने जारी किया नया फरमान

पटनाएक वर्ष पहले
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बिहार में त्रिस्तरीय पंचयत चुनाव को टाल दिया गया है। ऐसे में सरकार ने परामर्शी समिति बनाकर पंचायतों में विकास के काम को जारी रखने के लिए बीच का रास्ता निकाला है। सरकार ने एक और फरमान जारी किया है कि पंचायती राज संस्था को पूर्ण या आंशिक रूप से नगर निकाय में सम्मिलित कर दिए जाने के पूर्व संबंधित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे पंचायत प्रतिनिधि का परामर्शी समिति में कोई स्थान नहीं होगा।

सम्बन्धित पंचायत के क्षेत्र को जिस तिथि से नगर निकाय में सम्मिलित कर लिए जाने पर अंतिम अधिसूचना निर्गत की गई है, उस तिथि से संबंधित प्रतिनिधि पंचायत के पदधारक नहीं रह गए हैं। यह जानकारी पंचायती राज मंत्री सम्राट चाैधरी ने दी है।

आपको बता दें कि परामर्शी समिति गठित होने के बाद उन पंचातयों को ज्यादा कंफ्यूजन था, जिन्हें अब नगर निगम में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में सरकार ने यह आदेश जारी कर स्थिति को साफ कर दिया है।

पंचायत की तीनों व्यवस्थाओं पर यह लागू

अगर किसी ग्राम पंचायत को पूर्ण रूप से नगर निकाय में सम्मिलित कर लिया गया है तो उस ग्राम पंचायत के मुखिया और सभी ग्राम पंचायत सदस्य यानी वार्ड सदस्य अपने पद से उसी तिथि से मुक्त हो गए। अगर ग्राम पंचायत के कुछ वार्ड ही नगर निकाय में सम्मिलित किए गए हैं तो उस वार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे वार्ड सदस्य अपने पद से मुक्त हो गए। यही स्थिति ग्राम कचहरी, पंचायत समिति और जिला परिषद के सम्बंध में भी लागू होगी।

237 ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से नगर निकाय क्षेत्र में शामिल

परामर्शी समिति में वैसे क्षेत्रों के पंचायत प्रतिनिधि सम्मिलित नहीं किए जाएंगे, जो क्षेत्र पूर्ण या अपूर्ण नगर निकाय में सम्मिलित कर लिए गए हैं। बिहार में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई ग्राम पंचायतों को नगर निकाय का हिस्सा बनाया गया। बिहार में दरभंगा की सर्वाधिक 9 और CM नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा की 8 समेत करीब तीन सौ ग्राम पंचायतें शहरों का हिस्सा बन गई हैं।

प्रदेश में विभिन्न जिलों की 237 ग्राम पंचायतें पूर्ण रूप से नगर निकाय क्षेत्र में शामिल हो गई हैं। वहीं, 194 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनके कुछ हिस्से नगर निकाय में शामिल किए गए हैं। इन 194 में करीब 65 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनके अधिकांश भाग नगर निकाय में आए हैं। इस तरह अब राज्य में ग्राम पंचायतों की संख्या करीब 300 तक घट जाएगी। अभी 8386 ग्राम पंचायतें राज्य में हैं। इनमें 300 पंचायतें घटती हैं तो ग्राम पंचायतों की संख्या 8086 के आसपास रह जाएंगी।

क्या है परामर्शी समिति

कोरोना के कारण पंचायत चुनाव नहीं हो सका है, जबकि उसका कार्यकाल 15 जून को ही खत्म हो रहा था। ऐसे में गांव में विकास कार्य को सुचारु रुप से संचालित करने के लिए सरकार ने परामर्शी समिति का गठन किया है। इस कारण राज्य के करीब साढ़े आठ हजार मुखिया व सरपंच, 534 प्रखंड प्रमुख और 38 जिला पर्षद अध्यक्ष अब पंचायत चुनाव होने तक परामर्शी समिति के अध्यक्ष रहेंगे।

पंचायत में मुखिया, ग्राम कचहरी में सरपंच, पंचायत समिति में प्रखंड प्रमुख और जिला पर्षदों में जिला पर्षद अध्यक्ष परामर्शी समिति के अध्यक्ष के तौर पर अपना काम कर रहे हैं. उन्हें वह सभी अधिकार व कर्तव्य मिल हुए हैं, जो पहले प्राप्त थे।

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