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मां को नहीं दी गई बेटे की मौत की खबर:हार्ट की पेशेंट हैं, 7 साल पहले हो चुकी है इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार के पिता की मौत

पूर्णिया / जानकीनगर5 महीने पहले
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बेटे की शहादत से बेखबर बूढ़ी मां को सहारा देते परिजन। - Dainik Bhaskar
बेटे की शहादत से बेखबर बूढ़ी मां को सहारा देते परिजन।
  • घटना के बाद पूर्णिया के जानकीनगर थाना क्षेत्र स्थित पांचू मंडल टोला में मातमी सन्नाटा

किशनगंज टाउन थानेदार अश्विनी कुमार की बंगाल के पांजीपाड़ा में मॉब लिंचिंग के दौरान हुई हत्या की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव पूर्णिया के जानकीनगर थाना क्षेत्र के पांचू मंडल टोला में मातमी सन्नाटा पसर गया है। हर कोई अपने गांव के लाल अश्विनी की मौत की खबर सुन स्तब्ध है। अश्विनी के पिता महेश्वरी प्रसाद यादव की 7 साल पहले ही मौत हो चुकी है। हार्ट पेशेंट मां को इंस्पेक्टर बेटे के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई है, क्योंकि वह यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकेंगी। छोटे भाई प्रवीण कुमार उर्फ गुड्डू बड़े भाई का शव लाने किशनगंज के लिए रवाना हो गए हैं।

घटना से घरवाले और ग्रामीण काफी गमगीन हैं। अश्विनी के छोटे भाई की पत्नी पूनम कुमारी ने बताया कि सुबह 8 बजे के करीब मेरे पति के मोबाइल पर फोन आया कि मेरे जेठ की हत्या हो गई है। मेरी सास हार्ट की मरीज हैं, वह पांच दिन पहले ही अपने मायके रामपुर तिलक पंचायत गई हैं। उन्हें अभी घटना की जानकारी नहीं दी गई है। वह अपने बेटे के शहीद होने का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकेंगी। पति की मौत के बाद से वह अक्सर बीमार रह रही हैं।

अश्विनी कुमार की बुआ अमीरका देवी बताती हैं अश्विनी काफी अच्छे व सबका ख्याल रखने वाला था। वह हर पर्व-त्योहार में सबकी खोज खबर लेते रहता था। आठ दिन पहले ही उससे फोन पर बात हुई थी। भरोसा ही नहीं हो रहा है कि उसकी इस तरह मौत हो जाएगी।

इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार के शहीद होने बाद रोते-बिलखते परिजन।
इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार के शहीद होने बाद रोते-बिलखते परिजन।

अश्विनी का परिवार पटना में रहता है

पूनम ने बताया कि पिछले तीन-चार सालों से अश्विनी कुमार का पूरा परिवार पटना के हनुमान नगर में किराए के मकान में रहता है। उन्हें तीन बच्चे हैं। पटना में उनकी पत्नी मीनू स्नेहलता, 15 साल की बड़ी बेटी नैंसी व 2 जुड़वां बेटा-बेटी ग्रेसी व वंश (उम्र करीब 6 साल) रहती हैं। बड़ी बेटी आठवीं की छात्रा है। पूरा परिवार पर्व-त्योहार, शादी-ब्याह के मौके पर गांव जरूर आता था। अंतिम बार पूरा परिवार 2019 में छठ के समय गांव आया था। कोरोना संक्रमण के बाद से उन लोगों का गांव आना थोड़ा कम हो गया था। घटना की खबर मिलते ही पूरा परिवार पटना से गांव के लिए रवाना हो गया है।

पद का नहीं था कोई घमंड
अश्विनी के चाचा राजकिशोर यादव ने बताया कि अश्विनी में कभी किसी चीज का कोई घमंड नहीं देखने को मिला। लगता ही नहीं था कि वे पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर हैं। जब भी गांव आते थे चाहे बड़ा हो या छोटा, सबसे बड़े प्रेम व आत्मीयता से मिलते व अच्छे से बात करते थे। सामाजिक रूप से भी वे गांव में काफी सक्रिय रहते थे।

गांव में ही हुई थी प्राथमिक पढ़ाई
परिजनों ने बताया कि अश्विनी कुमार चार-भाई बहनों में सबसे बड़े थे। उनकी प्राथमिक पढ़ाई गांव में ही हुई थी। इसके बाद वे ठाकुर उच्च विद्यालय खूंट से मैट्रिक किए थे। जबकि,उनके कॉलेज की पढ़ाई मधेपुरा TP कॉलेज से हुई। सभी भाई-बहनों की शादी हो चुकी है।

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