बिहार पुलिस में कोरोना से छठी मौत:भोजपुर में SI कामेश्वर सिंह वायरस से जंग हारे, बड़े भाई ने कहा- 10 दिन तक खुद किया ऑक्सीजन का जुगाड़, कोई मदद नहीं मिली

पटना7 महीने पहले
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कोरोना की दूसरी लहर में बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टरों को मिलाकर यह छठी मौत है। - Dainik Bhaskar
कोरोना की दूसरी लहर में बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टरों को मिलाकर यह छठी मौत है।
  • झारखंड में SI बड़े भाई ने भास्कर से साझा किया अपना दर्द
  • एसोसिएशन ने परिवार के लिए 50 लाख की आर्थिक मदद मांगी

बिहार पुलिस का एक सब इंसपेक्टर कोरोना वायरस से जंग हार गया। इलाज के दौरान आज उनकी मौत हो गई। कोरोना के संक्रमण से मरने वाले सब इंस्पेक्टर का नाम कामेश्वर सिंह है। 58 साल के कामेश्वर सिंह भोजपुर जिले में कोईलवर थाना के तहत गिद्दा आउट पोस्ट के इंचार्ज थे। रिटायरमेंट के करीब होने की वजह से उनकी पोस्टिंग होम डिस्ट्रिक्ट में थी।

बड़े भाई ललन सिंह के अनुसार 12 दिन पहले उन्हें सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत हुई। फिर सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें आरा से पटना लाया गया था। 10 दिन से वो पटना में नेशनल हाइवे पर स्थित फोर्ड हॉस्पिटल में एडमिट थे। यहीं उनका इलाज लगातार चल रहा था। लेकिन, गुरुवार की सुबह उनकी मौत हो गई। कोरोना के दूसरी लहर में बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर मिलाकर यह छठी मौत है।

खुद कर रहे थे ऑक्सीजन का जुगाड़, नहीं मिली सरकारी मदद

कामेश्वर सिंह मूल रूप से भोजपुर में बड़हरा थाना के तहत हरना पंचायत छपरा पर गांव के रहने वाले थे। 4 भाइयों में दूसरे कामेश्वर सिंह की तो मौत हो गई। इनके एक भाई अभी झारखंड पुलिस में सब इंस्पेक्टर, तो सबसे छोटा भाई CRPF में बतौर सिपाही अपनी सेवा दे रहे हैं। सब इंस्पेक्टर कामेश्वर अपनी तीन बेटियों की शादी भी कर चुके हैं।

भास्कर के साथ अपना दर्द साझा करते हुए बड़े भाई ललन ने बताया कि कामेश्वर सिंह के बीमार होने की जानकारी भोजपुर के SP, ग्रामीण DSP, थानेदार और पुलिस एसोसिएशन तक को दी। मगर, किसी के तरफ से कोई मदद नहीं मिली। हर दिन खुद से ऑक्सीजन का जुगाड़ करना पड़ रहा था। बहुत मुश्किल हो रही थी ऑक्सीजन गैस की व्यवस्था करने में। सरकारी स्तर पर हमें कोई मदद नहीं मिली। भाई का दाह संस्कार अब पटना में ही बांस घाट पर कर रहे हैं।

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परिवार को मिले 50 लाख का आर्थिक सहयोग

कोरोना से मरने वाले पुलिस कर्मियों की बढ़ती हुई संख्या को देख बिहार पुलिस एसोसिएशन ने सरकारी व्यवस्था और इंतजामों पर सवाल उठाया है। अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह के अनुसार पुलिस कर्मियों की जांच और उनके इलाज का अब तक कोई अलग इंतजाम नहीं किया गया है। अब तक कई पुलिस कर्मी कोरोना की पहली और दूसरी लहर में मर चुके हैं। फ्रंट लाइन पर पुलिस काम कर रही है। सब इंस्पेक्टर कामेश्वर सिंह सहित अब तक कोरोना से जितने भी पुलिस कर्मी की मौत हुई है, उनके परिवार को सरकार की तरफ से 50-50 लाख रुपए की आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।

बिहार पुलिस में सिपाही से लेकर मुख्यालय में बैठे IPS तक संक्रमित

बिहार में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले पुलिस के सिपाही से लेकर मुख्यालय तक में बैठे अधिकारी कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। कुल 202 लोगों को कोरोना संक्रमण है। यह आंकड़े भी 9 दिन पहले के हैं। दूसरे सरकारी विभागों और प्राइवेट कंपनियों की तरह पुलिस का काम वर्क फ्रॉम होम की तर्ज पर नहीं चल सकता। इन्हें ड्यूटी करने के लिए हर हाल में निकलना ही है। यही वजह है कि DGP एसके सिंघल ने सिपाही से लेकर अधिकारी तक को ड्यूटी के दौरान हर हाल में मास्क पहनने का आदेश दिया था। ऑफिस से लेकर थाना और बैरक में कोरोना गाइडलाइंस का पालन करने को कहा। हर जगह पर फिजिकल डिस्टेंस मेंटेन करने का निर्देश दिया था।

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